घटाया जाएगा इंद्रावती अभयारण्य का क्षेत्रफल
इन्द्रावती अभ्यारण के
रिजर्व क्षेत्र को 1540.70 किमी से घटाकर 513 वर्ग किमी करने की अनुशंसा की गई,सरकार प्लांट को डिलमिली से हटाकर यहां स्थापित कर सकती है।
रायपुर. माओवाद प्रभावित बस्तर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व के बफर जोन को घटाने की कवायद शुरू हो गई है। वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक के दौरान बुधवार को� रिजर्व क्षेत्र को 1540.70 किमी से घटाकर 513 वर्ग किमी करने की अनुशंसा की गई। अब मंजूरी के लिए इसे केंद्र को भेजा जाएगा। बस्तर के डिलमिली इलाके में अल्ट्रा मेगा पावर प्लांट लगाए जाने की घोषणा के बाद ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि सरकार प्लांट को डिलमिली से हटाकर यहां स्थापित कर सकती है।इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग को भी बफर जोन बाहर कर दिया गया है।
आनन-फानन में बैठक
बफर जोन को घटाने के लिए राज्य वन्य जीव बोर्ड की सातवी बैठक बेहद आनन-फानन में बुलाई गई। सामान्य तौर पर बैठक की सूचना एक सप्ताह पहले लिखित में भेजी जाती रही है, लेकिन पहली बार बोर्ड के सभी सदस्यों को बैठक से एक दिन पहले यानी मंगलवार को दूरभाष के जरिए यह अवगत कराया गया कि उन्हें मौजूद रहना है। आनन-फानन में दी गई सूचना के चलते प्रकृति बचाओ आंदोलन से जुड़े शरद वर्मा, वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कार्यरत आरपी मिश्रा सहित कई अन्य लोग बैठक में नहीं आ पाए। फिर भी बैठक में बफर जोन घटाने के लिए सेवानिवृत प्रधान मुख्य वन संरक्षक धीरेंद्र शर्मा की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट का अनुमोदन कर दिया गया।
सरकार की दलील
रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि बफर जोन होने की वजह से इलाके के रहवासी वनोपज संग्रहण का काम ठीक ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। लिहाजा, इसे घटाया जाना उचित होगा। इसके साथ ही कहा गया है कि इससे माओवाद से लडऩे में भी आसानी होगी, क्योंकि बफर जोन का फायदा उठाकर माओवादी यहां अपना ठिकाना बनाकर जमे रहते हैं।
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