Tuesday, February 28, 2017

** दल्लीराजहरा में ** चर्च पर हमले के खिलाफ जंगी प्रदर्शन और आमसभा * राजनैतिक दर ,मजदूर यूनियन और सामाजिक संगठनो ने दी प्रशासन को चेतावनी . ** दल्लीराजहरा में सांप्रदायिकता के खिलाफ मजदूर संगठनों की सदभावना रैली और आमसभा आज . *** दल्ली राजहरा में 29 जनवरी को चर्च पर हुये हमले और तोडफोड तथा चर्च के पास्टर के साथ बदसलूकी और मारपीट की गई लेकिन आज तक हमलावरों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई .इसके पहले भी रैली और प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर तथा अन्य अधिकारियों से मिला लेकिन आजतक किसी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई . हमलावरों की शिनाख्त करके उन्हें गिरफ्तार करने की मांग तथा बालोद जिले में सरकार के जन विरोधी तानाशाही रवैये के विरोध में विभिन्न मजदूर संघठन ,जन मुक्ति मोर्चे छत्तीसगढ़ ,छत्तीसगढ़ श्रमिक माइंस संघ ,स़युक्त खदान मजदूर संघ ,हिन्दुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन ,मेटल माइंस वर्क्स यूनियन के करीब तीन हजार लोगों ने आज रैली निकाली ,,रैली में हमलावरों को गिरफ करो ,अल्पसंख्यको को सुरक्षा प्रदान करै आदि के नारे लगे . रैली बाद में आमसभा में तब्दील हो गई ,सभा को बसंत रावटे ,वीएन प्रसाद राव, छत्तीसगढ़ कृश्यचन फेलोशिप .फादर जोशी पीयूसीएल ,मनोज कोंसरे ,नगरीय निकाय जनवादकाी सफाई कामगार संघ एक्टू ,कलादास डेहरिया ,छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति .का.मृदल सेन गुप्ता .सोरा यादव राज्य सचिव माकपा माले ,जयप्रकाश नायर राज्य सचिव ऐक्टू ,जीत गुहा नियोगी ,डा. शैवाल जाना मुख्य चिकित्सक शहीद हास्पिटल , संजय पराते ,राज्य सचिव माक्सर्वादी कम्युनिस्ट पार्टी ,का. जनक लाल ठाकुर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा आदि ने संबोधित किया .





*  दल्लीराजहरा में

** **  दल्लीराजहरा में

** चर्च पर हमले के खिलाफ जंगी प्रदर्शन और आमसभा
* राजनैतिक दर ,मजदूर यूनियन और सामाजिक संगठनो ने दी प्रशासन को चेतावनी .
**
दल्लीराजहरा में सांप्रदायिकता के खिलाफ मजदूर संगठनों की सदभावना रैली और आमसभा आज .
***

दल्ली राजहरा में  29 जनवरी को चर्च पर हुये हमले और तोडफोड तथा चर्च के पास्टर के साथ बदसलूकी और मारपीट की गई  लेकिन आज तक हमलावरों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई .इसके पहले भी रैली और प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर तथा अन्य अधिकारियों से मिला लेकिन आजतक किसी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई .
हमलावरों की शिनाख्त करके उन्हें गिरफ्तार करने की मांग तथा बालोद जिले में सरकार के जन विरोधी तानाशाही  रवैये के विरोध में विभिन्न मजदूर संघठन ,जन मुक्ति मोर्चे छत्तीसगढ़ ,छत्तीसगढ़ श्रमिक माइंस संघ ,स़युक्त खदान मजदूर संघ ,हिन्दुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन ,मेटल माइंस  वर्क्स यूनियन के करीब तीन हजार  लोगों ने आज रैली निकाली ,,रैली में हमलावरों को गिरफ करो ,अल्पसंख्यको को सुरक्षा प्रदान करै आदि के नारे लगे .
रैली बाद में आमसभा में तब्दील हो गई ,सभा को
बसंत रावटे ,वीएन प्रसाद राव,  छत्तीसगढ़ कृश्यचन फेलोशिप .फादर जोशी पीयूसीएल ,मनोज कोंसरे ,नगरीय निकाय जनवादकाी सफाई कामगार संघ एक्टू ,कलादास डेहरिया ,छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति .का.मृदल  सेन गुप्ता .सोरा यादव राज्य सचिव  माकपा माले ,जयप्रकाश नायर राज्य सचिव ऐक्टू ,जीत गुहा नियोगी ,डा. शैवाल जाना मुख्य चिकित्सक शहीद हास्पिटल , संजय पराते ,राज्य सचिव माक्सर्वादी कम्युनिस्ट पार्टी ,का. जनक लाल ठाकुर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा आदि ने संबोधित किया .
* राजनैतिक दर ,मजदूर यूनियन और सामाजिक संगठनो ने दी प्रशासन को चेतावनी .
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दल्लीराजहरा में सांप्रदायिकता के खिलाफ मजदूर संगठनों की सदभावना रैली और आमसभा आज .
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दल्ली राजहरा में  29 जनवरी को चर्च पर हुये हमले और तोडफोड तथा चर्च के पास्टर के साथ बदसलूकी और मारपीट की गई  लेकिन आज तक हमलावरों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई .इसके पहले भी रैली और प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर तथा अन्य अधिकारियों से मिला लेकिन आजतक किसी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई .
हमलावरों की शिनाख्त करके उन्हें गिरफ्तार करने की मांग तथा बालोद जिले में सरकार के जन विरोधी तानाशाही  रवैये के विरोध में विभिन्न मजदूर संघठन ,जन मुक्ति मोर्चे छत्तीसगढ़ ,छत्तीसगढ़ श्रमिक माइंस संघ ,स़युक्त खदान मजदूर संघ ,हिन्दुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन ,मेटल माइंस  वर्क्स यूनियन के करीब तीन हजार  लोगों ने आज रैली निकाली ,,रैली में हमलावरों को गिरफ करो ,अल्पसंख्यको को सुरक्षा प्रदान करै आदि के नारे लगे .
रैली बाद में आमसभा में तब्दील हो गई ,सभा को
बसंत रावटे ,वीएन प्रसाद राव,  छत्तीसगढ़ कृश्यचन फेलोशिप .फादर जोशी पीयूसीएल ,मनोज कोंसरे ,नगरीय निकाय जनवादकाी सफाई कामगार संघ एक्टू ,कलादास डेहरिया ,छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति .का.मृदल  सेन गुप्ता .सोरा यादव राज्य सचिव  माकपा माले ,जयप्रकाश नायर राज्य सचिव ऐक्टू ,जीत गुहा नियोगी ,डा. शैवाल जाना मुख्य चिकित्सक शहीद हास्पिटल , संजय पराते ,राज्य सचिव माक्सर्वादी कम्युनिस्ट पार्टी ,का. जनक लाल ठाकुर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा आदि ने संबोधित किया . 

Monday, February 27, 2017

गुरमेहर कौर के पोस्टर के पीछे जो वीडियो है, उसकी पूरी कहानी ये रही

गुरमेहर कौर के पोस्टर के पीछे जो वीडियो है, उसकी पूरी कहानी ये रही

  • 27 फरवरी 2017
गुरमेहर कौरइमेज कॉपीरइटYOUTUBE GRAB
दिल्ली के रामजस कॉलेज में लेफ़्ट और राइट विचारधारा वाले स्टूडेंट के बीच हुई झड़प के बाद सारा फ़ोकस फिलहाल एक युवती पर आ गया है.
युवती का नाम है गुरमेहर कौर जो दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में पढ़ती हैं. 22 फ़रवरी 2016 को उन्होंने फ़ेसबुक पर अपनी प्रोफ़ाइल पिक्चर बदली थी.
और यहीं से ये कहानी शुरू हुई. इसमें गुरमेहर एक पोस्टर के साथ दिख रही हैं. इस पर लिखा है, ''मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा हूं. मैं एबीवीपी से नहीं डरती. मैं अकेली नहीं हूं. भारत का हर छात्र मेरे साथ है. #StudentsAgainstABVP''
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इसके बाद सोशल मीडिया पर कई छात्र-छात्राओं ने #StudentsAgainstABVP के हैशटैग के साथ ऐसा ही संदेश लिखकर अपनी तस्वीर डालनी शुरू की.
लेकिन बवाल इस पर नहीं हुआ. हंगामा मचा गुरमेहर की उस तस्वीर पर जिसमें वो एक प्लेकार्ड लिए खड़ी हैं. इस पर अंग्रेज़ी में लिखा है, ''पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, बल्कि जंग ने मारा है.''
इसके बाद पूर्व बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग ने एक प्लेकार्ड लेकर तस्वीर डाली जिस पर लिखा था, ''मैंने दो तिहरे शतक नहीं लगाए, बल्कि मेरे बल्ले ने ऐसा किया.''
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इसके बाद सोशल मीडिया पर जंग शुरू हो गई. ना केवल सेंस ऑफ़ ह्यूमर दिखा बल्कि गुरमेहर को ट्रोल किया गया. उन्होंने इसकी शिकायत भी दर्ज कराई है.
उन्होंने सोमवार को कहा, ''कई बड़े लोग मेरी देशभक्ति पर सवाल उठा रहे हैं. मुझे राष्ट्रद्रोही कहा जा रहा है. उन्हें असल में पता ही नहीं कि देशभक्ति किसे कहते हैं.''
गुरमेहर ने कहा, ''जो हमने शुरू किया है, ये कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं है. और मैं सभी को ये साफ़ करना चाहती हूं. ये किसी राजनीतिक दल की बात नहीं है. ये कैम्पस की रक्षा करने का सवाल है.''
दरअसल, गुरमेहर कारगिल युद्ध में मारे गए मनदीप सिंह की बेटी हैं. अब सवाल उठता है कि जिस पोस्टर पर इतना बवाल हुआ, वो कब का है.
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ये हाल का नहीं, बल्कि साल भर पहले अप्रैल महीने का है. दरअसल, ये यूट्यूब पर वायरल हुए उस वीडियो का हिस्सा है, जिसमें गुरमेहर ने बिना कुछ बोले अपनी कहानी बताई थी.
ये वीडियो अब तक 71 हज़ार से ज़्यादा बार देखा जा चुका है और इस वीडियो के बाद पाकिस्तान से भी इस तरह के वीडियो सामने आए थे.
आइए जानते हैं कि गुरमेहर की जिस लाइन पर इतना हंगामा मचा है, उसका पूरा मतलब क्या है और इसमें क्या-क्या लिखा है.
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मेरा नाम गुरमेहर कौर है.

मैं भारत के जालंधर शहर की रहने वाली हूं.
ये मेरे पिता कैप्टन मनदीप सिंह हैं.
वो 1999 के कारगिल युद्ध में मारे गए थे.
मैं दो साल की थी, जब उनका निधन हुआ.
उनसे जुड़ी बहुत कम यादें हैं मेरे पास.
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पिता नहीं होते तो कैसा महसूस होता है, इसकी ज़्यादा यादें हैं मेरे पास.
मुझे याद है कि मैं पाकिस्तान और पाकिस्तानियों से कितना नफ़रत करती थी, क्योंकि उन्होंने मेरे पिता को मारा था.
मैं मुसलमानों से भी नफ़रत करती थी, क्योंकि मैं सोचती थी कि सभी मुस्लिम पाकिस्तानी होते हैं.
जब मैं छह साल की थी तो बुर्का पहनी एक महिला को चाकू मारने की कोशिश भी की.
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किसी अनजान वजह से मुझे लगा कि उसने मेरे पिता को मारा होगा.
मेरी मां ने मुझे रोका और समझाया कि.

पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, बल्कि जंग ने मारा है.

वक़्त लगा लेकिन आज मैं अपनी नफ़रत को ख़त्म करने में कामयाब रही.
ये आसान नहीं था लेकिन मुश्किल भी नहीं था.
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अगर मैं ऐसा कर सकती हूं तो आप भी कर सकती हैं.
आज मैं भी अपने पिता की तरह सैनिक बन गई हूं.
मैं भारत-पाकिस्तान के बीच अमन के लिए लड़ रही हूं.
क्योंकि अगर हमारे बीच कोई जंग ना होती, तो मेरे पिता आज ज़िंदा होते.
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मैंने ये वीडियो इसलिए बनाया ताकि दोनों तरफ़ की सरकारें दिखावा करना बंद करें.
और समस्या का समाधान दें.
अगर फ़्रांस और जर्मनी दो विश्व युद्ध के बाद दोस्त बन सकते हैं.
जापान और अमरीका अतीत को पीछे छोड़ आगे देख सकते हैं.
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तो हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते?
ज़्यादातर भारत और पाकिस्तानी शांति चाहते हैं, जंग नहीं.
मैं दोनों देशों के नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठा रही हूं.
हम तीसरे दर्जे के नेतृत्व के साथ पहले दर्जे का मुल्क़ नहीं बन सकते.
प्लीज़ तैयार हो जाइए. एक-दूसरे से बातचीत कीजिए और काम पूरा कीजिए.
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स्टेट प्रायोजित आतंकवाद बहुत हो चुका.
स्टेट प्रायोजित जासूस बहुत हुए.
स्टेट प्रायोजित नफ़रत बहुत हुई.
सरहद के दोनों तरफ़ कई लोग मारे जा चुके हैं.
बस, बहुत हुआ.
मैं ऐसी दुनिया चाहती हूं, जहां कोई गुरमेहर कौर ना हो, जिसे अपने पिता की याद सताती हो.
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मैं अकेली नहीं. मेरे जैसे कई हैं.
#ProfileforPeace
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दिक्कत ये है कि इस पूरे वीडियो में दिखाए गए प्लेकार्ड में से एक ही वायरल हुआ और कहानी कुछ और बन गई. गुरमेहर के पूरे वीडियो को देखा जाए तब समझ आता है कि वो क्या कहना चाहती थीं.

Saturday, February 25, 2017

बस्तर लौटना चाहते हैं, लड़ाई अभी बाक़ी है'

बस्तर लौटना चाहते हैं, लड़ाई अभी बाक़ी है'

  • 9 घंटे पहले
शालिनी गेरा और ईशा खंडेलवालइमेज कॉपीरइटBAR AND BENCH
Image captionबस्तर में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शालिनी गेरा और ईशा खंडेलवाल
"पुलिस संरक्षण में चलने वाले असामाजिक संगठनों ने भले हमें बस्तर से हटने के लिये बाध्य कर दिया हो लेकिन बस्तर के आदिवासियों के क़ानूनी अधिकार की लड़ाई जारी है."
इस लड़ाई का दावा करने वाली 46 साल की शालिनी गेरा उस जगदलपुर लीगल एड ग्रुप की संस्थापक सदस्यों में से एक हैं, जिन्होंने 2013 से बस्तर में काम करना शुरु किया.
गेरा का दावा है कि अपने साथी वकीलों की मदद से उन्होंने बस्तर के कई ज़िलों में आदिवासियों के लिये क़ानूनी लड़ाई की शुरुआत की.
मूलतः वैज्ञानिक शालिनी गेरा ने विदेश में काम किया लेकिन मानवाधिकार के प्रति काम करने की ललक उन्हें भारत खींच लाई. उनके प्रोफ़ेसर पति भी दिल्ली में ही थे. 40 साल की उम्र में शालिनी ने दिल्ली में क़ानून की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया.
इसी दौरान बस्तर की आदिवासी नेता सोनी सोरी से उनकी दिल्ली में मुलाकात हुई और बस्तर से जुड़े मुद्दों को जानने-समझने के बाद उन्होंने तय किया कि बस्तर में ही काम करना है.
एक मुलाकात से मिला रास्ता
शालिनी कहती हैं, "सोनी सोरी से मिलने के बाद ही हमारे मन में यह विचार आया कि क्यों नहीं बस्तर में क़ानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिये कोई संगठन बनाया जाए और वहां रह कर ये काम किया जाए."
शालिनी गेरा और ईशा खंडेलवालइमेज कॉपीरइटBAR AND BENCH
जुलाई 2013 में जगदलपुर लीगल एड ग्रुप बना और उसमें ईशा खंडेलवाल, पारिजाता भारद्वाज, रुपेश कुमार, गुनीत कौर और देवेश अग्निहोत्री जैसे वक़ील और सामाजिक कार्यकर्ता जुड़े. हालांकि बाद के दिनों में शालिनी गेरा और ईशा खंडेलवाल ने ही संगठन की कमान संभाली.
मध्यप्रदेश के नीमच की रहने वाली ईशा खंडेलवाल ने कंप्यूटर की पढ़ाई करने के बाद दिल्ली से क़ानून की पढ़ाई की और वहीं उनकी मुलाकात शालिनी गेरा से हुई.
ईशा कहती हैं, "हमने जगदलपुर लीगल एड ग्रुप बनाने के बाद शुरुआती दौर में बड़ी संख्या में न्यायालय और पुलिस के मामलों को लेकर सूचना के अधिकार के तहत आवेदन लगाये और जो तथ्य हमारे सामने आये, वो हैरान करने वाले थे. हमने ऐसे मुक़दमे चिन्हांकित किए, जिनमें आदिवासी लंबे समय से जेल में थे."
ईशा के अनुसार ऐसे सैकड़ों मामले अदालत में लंबित थे, जिनमें आदिवासियों की बरसों से पेशी नहीं हुई थी. यहां तक कि कई मामलों में वे सज़ा से अधिक दिन जेल में गुजार चुके थे लेकिन उनकी जमानत नहीं हो पाई थी.

आदिवासियों की पैरवी

अधिकांश मामलों में आदिवासियों को अपने मुक़दमे की स्थिति के बारे में भी कुछ भी पता नहीं था. जगदलपुर लीगल एड ग्रुप का दावा है कि स्थानीय वक़ीलों की मदद से उन्होंने इन मामलों की पैरवी शुरु की.
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पुलिस और सुरक्षाबलों द्वारा कथित रुप से आदिवासियों को फ़र्ज़ी मामलों में जेल भेजने, फर्ज़ी मुठभेड़ और महिलाओं के साथ दुष्कर्म जैसे मामलों को अदालत तक ले जाने वाला जगदलपुर लीगल एड ग्रुप जल्दी ही एक ऐसे संगठन के रुप में आदिवासियों के बीच लोकप्रिय हो गया, जिसके वकील बिना पैसे लिए आदिवासियों के मुक़दमे लड़ रहे थे.
लेकिन ऐसे मामलों ने पुलिस और सरकार के लिये मुश्किल पैदा कर दी. आरोप लगा कि जगदलपुर लीगल एड ग्रुप मूलतः माओवादियों के मामले अदालत में लेकर आ रहा है और माओवादियों को इससे मदद मिल रही है.
6 अक्टूबर 2015 को बस्तर ज़िला बार एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पारित किया कि जो भी वकील स्थानीय बार काउंसिल में रजिस्टर्ड नहीं हैं, वे बस्तर में वकालत नहीं कर सकते. इसके बाद फरवरी 2016 में बार एसोसिएशन ने जगदलपुर लीगल एड ग्रुप के वकीलों के साथ स्थानीय वकीलों के कामकाज पर भी सवाल खड़े करते हुये प्रस्ताव पारित किया और उन पर रोक लगायी.

संदिग्ध होने का आरोप

बस्तर ज़िला बार एसोसिएशन के सचिव नवीन कुमार ठाकुर का कहना है कि जगदलपुर लीगल एड ग्रुप से जुड़े वकीलों ने जब बस्तर में वकालत शुरु की तो उन्होंने स्थानीय वक़ीलों को नकारा साबित करने की कोशिश की. इसके अलावा वे ज्यादातर ऐसे ही मामलों में दिलचस्पी ले रहे थे, जिनका संबंध माओवादियों से था.
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नवीन कुमार ठाकुर का आरोप है कि जगदलपुर लीगल एड ग्रुप के सदस्य ऐसे इलाकों में सक्रिय थे, जहां आम लोगों का जा पाना संभव नहीं था. वकालत की आड़ में वे जो कुछ कर रहे थे, वह 'संदिग्ध' था.
ठाकुर कहते हैं, "हमने उनसे रजिस्ट्रेशन के काग़ज़ मांगे और उन्हें स्थानीय बार एसोसिएशन में रजिस्ट्रेशन करवाने के लिये भी कहा. लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया. इसके बाद बार एसोसिएशन ने बस्तर में अनाधिकृत रुप से वकालत कर रहे लोगों पर रोक का प्रस्ताव पारित किया."
नवीन ठाकुर का कहना है कि जगदलपुर लीगल एड ग्रुप के सदस्यों ने अपनी पहचान और पेशे को सुनिश्चित करने के बजाये उल्टा राज्य और देश की बार काउंसिल के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बस्तर जिला बार एसोसिएशन की शिकायत की.
लेकिन ईशा खंडेलवाल के पास अपना तर्क है. ईशा कहती हैं, "एडवोकेट्स एक्ट की धारा 30 किसी भी बार एसोसिएशन को किसी वकील को पूरे देश में कहीं भी वक़ालत करने से नहीं रोक सकती. इसके बाद भी हमने दिल्ली स्टेट बार काउंसिल से छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल में अपना रजिस्ट्रेशन ट्रांसफ़र कराने की प्रक्रिया शुरु की."
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बार एसोसिएशन के कड़े रुख के बाद भी शालिनी गेरा और ईशा खंडेलवाल ने अपना काम बंद नहीं किया लेकिन इनके लिए असली मुश्किलें तब पैदा हुईं, जब इन महिला वकीलों के ख़िलाफ़ पुलिस ने वातावरण बनाना शुरु किया.
पुलिस के सरंक्षण में बने सामाजिक एकता मंच ने उस मुहल्ले में जा कर विरोध प्रदर्शन शुरु किया, जहां शालिनी गेरा और ईशा खंडेलवाल रहती थीं. मंच का भी आरोप था कि वकीलों का यह समूह माओवादियों की मदद कर रहा है. इसके बाद एक अवसर तो यह भी आया कि पुलिस ने ही सार्वजनिक रुप से जगदलपुर लीगल एड ग्रुप से जुड़े लोगों के पुतले जलाए.
बस्तर के तत्कालीन आईजी पुलिस शिवराम प्रसाद कल्लुरी ने भी दावा किया कि जगदलपुर लीगल एड ग्रुप की गतिविधियां 'संदिग्ध' हैं.

अभी बिलासपुर में ठिकाना

शालिनी कहती हैं, "पुलिस ने हमारे मकान मालिक को धमकाया कि हमें मकान से निकाल बाहर करे. हमारे ख़िलाफ़ ऐसा माहौल बना दिया कि हमें फरवरी 2016 में बस्तर छोड़ना पड़ा. हमने इसके बाद बिलासपुर में काम करना शुरु किया और पिछले साल भर में बस्तर से जुड़े कई मामले हमने हाईकोर्ट में पेश किये. हम तो बस्तर पुलिस को धन्यवाद देंगे कि उनके कारण हम अब हाईकोर्ट में भी मुक़दमे लड़ रहे हैं."
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ईशा खंडेलवाल चाहती हैं कि बस्तर में ज़िला स्तर पर भी उनका समूह काम करे और आदिवासियों को न्याय मिले. बस्तर से चार सौ किलोमीटर दूर बिलासपुर में रह कर बस्तर के लिये काम करना मुश्किल हो रहा है.
ईशा कहती हैं, "मैं जल्दी बस्तर लौटना चाहती हूं. हमारी लड़ाई अभी बाक़ी है."
(बीबीसी