Friday, November 14, 2014

अधिकारियों की मनमानी 2 फर्जी मामला कर रहे दर्ज, परेशान हो रहे हैं ग्रामीण

अधिकारियों की मनमानी 2 फर्जी मामला कर रहे दर्ज, परेशान हो रहे हैं ग्रामीण

Forest offers making villagers to suffer


Forest offers making villagers to suffer
11/13/2014 10:55:50 PM
रायगढ़। वन विभाग में अब फर्जी मामला दर्ज करने का सिलसिला शुरू हो चुका है। किसी ना किसी मामले में फर्जी अपराध कायम कर ग्रामीणों को वन विभाग के अधिकारी सताने में लगे हुए हैं।

पूर्व में जहां भैंसगढ़ी में एक किसान के घर से अवैध चिरान पकड़ा गया था और वह उसके खेत होने के बाद भी उसके खिलाफ अपराध कायम कर दिया गया। अब अवैध उत्खनन के मामले में एक ट्रैक्टर को जबरन राजसात करने के लिए वन अधिकारी जुटे हुए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वन अमला ने जब भेलवाटिकरा से हरिराम राठिया का ट्रैक्टर जब्त किया।

तब ट्रैक्टर में कुछ भी लोड नहीं था और ना ही अवैध उत्खनन वहां किया गया था। इसके बाद भी ट्रैक्टर को बिना वजह से फारेस्ट डिपो लेकर आ गए। इसके बाद जब मामले में जांच हुआ, तब भी ग्रामीणों ने बताया कि हरिराम के ट्रैक्टर में अवैध मुरूम नहीं है।

इसके बाद से लेकर अब तक किसान अपने ट्रैक्टर को छोड़ाने के लिए वन विभाग का चक्कर काट रहा है, लेकिन किसान का ट्रैक्टर नहीं छोड़ा जा रहा है। इससे वह काफी परेशान है। विभाग के जानकारों का कहना है कि अगर ट्रैक्टर में खनिज लोड नहीं है, तो उसे जब्त नहीं किया जा सकता है और जुर्माना लेकर उसे छोड़ा जा सकता है। इसके अलाव खेत का लकड़ी होने पर बिना अनुमति पेड़ काटने के जुर्म में भी जुर्माना लेकर किसानों को छोड़ा जा सकता है। इसके बाद भी विभाग के अधिकारी किसान को सताने में लगे हुए हैं।

पहले भी आया मामला

इससे पहले भी फर्जी केस बनाने का मामला सामने आ चुका है। जहां पूर्व में बडग़ांव के लाबो के घर से दो ट्रैक्टर लकड़ी जब्त किया गया, पर इस मामले में अब तक विभाग यह सिद्ध नहीं कर सकी कि वह लकड़ी जंगल का है। इसमें पीओआर भी दर्ज नहीं किया गया। वहीं हेतराम के घर से भी लकड़ी जब्त किया गया, पर इसमें भी उसके खेत की लकड़ी को जब्त कर फर्जी मामला तैयार किया गया।

समिति हो रहे लामबंद

ग्रामीणों ने बताया कि विभाग के लापरवाह कार्रवाई के कारण अब समिति भी लामबंद हो रही है। बडग़ांव, दनौट, बरलिया, भेलवाटिकरा, भैंसगढ़ी के समिति सदस्यों ने पूर्व में डीएफओ को ज्ञापन सौंपकर समिति भंग करने की भी मांग कर चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग के अधिकारियों की वजह से गांव को बदनाम किया जा रहा है।

अवैध उत्खनन से संबंधित मामला होने की वजह से यह प्रकरण रायगढ़ एसडीओ के कोर्ट में चलेगा। इसके बाद जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे। उसके हिसाब से कार्रवाई की जाएगी और रही बात घर से लकड़ी जब्त करने का, तो सराई लकड़ी काटने से पहले उसकी मंजुरी लेनी पड़ती है।
विवेकानंद झा, प्रभारी, डीएफओ

वन अमला ने बिना वजह ट्रैक्टर जब्त किया है। ट्रैक्टर में थोड़ा भी मुरूम लोड नहीं था। यह बात वन अधिकारी भी जान रहे हैं, लेकिन पता नहीं क्यों ट्रैक्टर को जब्त कर लिया गया। अब उसे छोड़ाने के लिए कई बार गुहार लगा चुके है। लोन लेकर ट्रैक्टर को खरीदा गया था। अब ट्रैक्टर जब्त हो जाने से काफी परेशानी हो रही है।
इंदर राठिया, ट्रैक्टर चालक
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दोहन पूरा, संरक्षण अधूरा

दोहन पूरा, संरक्षण अधूरा

Full exploitation, conservation incomplete


Full exploitation, conservation incomplete
11/14/2014 1:56:25 AM
रायगढ़। जिले के उद्योगों में एक ओर भू-गर्भ जल का दोहन जमकर किया जा रहा है। दूसरी ओर जल संरक्षण के मामले में उदासीनता बरती जा रही है। इस बात की गवाही टास्क फोर्स टीम की ओर से की गई जांच के बाद सामने आ रही है। हलांकि यह जांच 2011 में की गई थी। जिसमें खुद टीम ने कहा है कि कई उद्योगों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को संपादित नहीं किया गया है।

ऎसे में जब हाल में संबंधित अधिकारियों से उद्योगों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के मामले के विषय में पूछ ताछ की गई तो किसी अधिकारी ने कहा कि यह उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता है। जब कोई शिकायत आती है तो जांच कर ली जाती है। वहीं किसी अधिकारी ने कहा कि इस विषय में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यदि संपादित नहीं किया जा रहा है तो इसके लिए उद्योगों को निर्देश दिया जाएगा।
ऎसे में उद्योग और अधिकारी रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए कितना सचेत हैं इस बात की पोल खुल जाती है। अब टास्क फोर्स की ओर से भूगर्भ जल दोहन के लिए की गई जांच के रिपोर्ट की बात करें तो सूचना के अधिकार के तहत निकली इस जानकारी में 17 उद्योगों में टास्क फोर्स टीम की ओर से जांच की गई थी। ऎसे में केवल 3 उद्योगों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को संपादित किए जाने की बात कही गई है। जबकि 14 उद्योगों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग कार्य संपादित नहीं था। ऎसे में विभाग ने दोबारा इस मामले की जांच नहीं की। न तो इसके लिए कोई कार्रवाई की।
यहां नहीं हुआ काम
रायगढ़ अनविभाग में कार्यरत औद्योगिक इकाईयों में जब जांच की गई। तो रूपेश स्टील, सुनील इस्पात, एनआर इस्पात, महामाया रोलिंग, रायगढ़ इस्पात, चंद्रहासिनी रोलिंग मिल, अभिषेक रोलिंग मिल, गायत्री रोलिंग मिल, साकंभरी स्टील, मां मंगला इस्पात, शिव शक्ति, आरआर एनर्जी, इंडस एनर्जी महापल्ली, इंडस एनर्जी कोटमार का नाम शामिल है।
इनके यहां काम पूरा
जांच टीम को केवल तीन उद्योगों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का कार्य संपादित होना पाया है। जिसमें एमएसपी मनवापाली, एमएसपी जामगांव और जेएसपीएल का नाम शामिल है। तीन साल पहले हुई जांच के बाद दोबारा अधिकारियों ने इसकी सुध तक नहीं ली है।

    एनटीपीसी मामले में तीसरी एफआईआर

    एनटीपीसी मामले में तीसरी एफआईआर

    3rd FIR loges in NTPC 

    3rd FIR loges in NTPC matter
    11/14/2014 7:49:55 AM
    रायगढ़। एनटीपीसी के फर्जी ऋण पुस्तिका मामले में पुसौर पुलिस ने गुरुवार को तीसरा अपराध दर्ज किया। जिसमें तहसीलदार संजय सोमावार व पटवारी केशव राठिया को आरोपी बनाया गया है।

    इन्होंने दूसरे जिले के किसानों को एनटीपीसी का बोनस दिलाने के लिए फर्जी ऋण पुस्तिका बनाने का काम किया था। जमीन के टुकड़े-टुकड़े कर एनटीपीसी को करोड़ों का चूना लगाने के मामले में आरोपियों पर एफआईआर दर्ज होने का सिलसिला जारी है।

    गुरुवार को पुसौर पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार संजय सोमावार व पटवारी केशव राठिया के खिलाफ फर्जी ऋृण पुस्तिका बनाने के मामले में अपराध दर्ज किया गया। इस मामले में पुलिस दो अपराध पहले ही दर्ज कर चुकी है। जिसमें पटवारी केशव राठिया पहले ही गिरफ्तार हो चुका है। जबकि तहसीलदार व भाजपा नेता के भाई संजय सोमावार पुलिस को चकमा देकर अब तक फरार है।

    पुलिस के जांच अधिकारियों की माने तो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर लगातार छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है। आरोपियों की गिरफ्तारी दर्ज होगी।
    शहर में खलबली
    एनटीपीसी फर्जीवाड़े में तीसरी एफआईआर दर्ज होने के बाद शहर में हडकंप का माहौल है। गौरतलब है कि इस फर्जीवाड़े में शहर के कई लोग शामिल है। जो खुद व अपने रिश्तेदारों की काली कमाई की मदद से किसानों की जमीन को खरीदा है।

      नसबंदी से मौत पर हाईकोर्ट गंभीर, राज्य शासन से जवाब मांगा

      नसबंदी से मौत पर हाईकोर्ट गंभीर, राज्य शासन से जवाब मांगा

      High court issues notice to State government


      High court issues notice to State government
      11/13/2014 8:56:28 AM
      बिलासपुर। नसबंदी ऑपरेशन के बाद महिलाओं की लगातार मौतों को हाईकोर्ट ने बेहद गंभीर मामला मानते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। जस्टिस टीपी शर्मा, इंदरसिंह उबोवेजा की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद केंद्र, राज्य शासन व मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को नोटिस जारी किया है।

      कोर्ट ने इस मामले की पड़ताल के लिए न्यायमित्र भी नियुक्त किए हैं। कोर्ट ने शासन से मौत का कारण पूछा है। यह सवाल भी किया है कि रोकथाम क्यों नहीं हो पा रही है? कोर्ट ने अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। साथ ही महिलाओं को हर संभव इलाज उपलब्ध कराने और जरूरत पर अन्य अस्पताल भेजने का आदेश दिया।

      शहर के लगे हुए ग्राम पेंडारी में शनिवार को हुए नसबंदी ऑपरेशन के बाद सोमवार से महिलाओं की मौत का सिलसिला शुरू हुआ जो थम नहीं रहा है। बुधवार की दोपहर को रुटीन सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने लगभग 12.30 बजे इस प्रकरण की आफिस रेफरेंस के तौर पर सुनवाई शुरू की। हाईकोर्ट में राज्य शासन की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रफुल्ल भारत और आशुतोष सिंह कछवाहा को कोर्ट ने आदेश दिया कि इस मामले में शासन द्वारा की गई इलाज की व्यवस्था, मौत की वजह, शासन रोकथाम क्यों नहीं कर पा रहा है, इस पर विस्तृत रिपोर्ट 10 दिन में प्रस्तुत करें।

      कोर्ट को तथ्यों की जानकारी देंगे न्यायमित्र

      कोर्ट ने इस मामले में सही तथ्य एकत्रित करने और कोर्ट को जानकारी उपलब्ध कराने के लिए वकील सलीम काजी और सुनीता जैन को न्यायमित्र भी नियुक्त किया है। दोनों न्यायमित्र पीडि़त महिलाओं के इलाज के लिए किए जा रहे प्रयास, उनको उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं सहित अन्य पूरी जानकारी कोर्ट को देंगे। साथ ही वे शासन द्वारा दिए गए जवाब और रिपोर्ट की स्क्रूटनी भी करेंगे।

      कोर्ट ने की टिप्पणी

      मामले की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने टिप्पणी की है कि प्रदेश में लगातार ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। कोर्ट ने मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद कई लोगों के आंखों की रोशनी जाने, कुछ की मौत और गर्भाशय कांड का उल्लेख किया। कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की बदतर हालत और मरीजों की मौत पर चिंता भी जताई।

        नसबंदी केस: चैती बाई के परिजनों ने किया चेक वापस, अंतिम संस्कार से इनकार

        नसबंदी केस: चैती बाई के परिजनों ने किया चेक वापस, अंतिम संस्कार से इनकार

        Sterilization case - family members denied for cremation


        Sterilization case - family members denied for cremation
        11/13/2014 12:30:09 PM
        पेंड्रा। बिलासपुर के सकरी के बाद पेंड्रा के धनोली में नसबंदी में लापरवाही की शिकार हुई बैगा महिला चैती बाई के मौत के बाद परिजनों ने शासन के 2 लाख रुपए के मुआवजे का चेक वापस कर दिया है। पीडि़ता के परिजन शासन से 10 लाख रुपए मुआवजा की मांग कर रहे हैं। बैगाओं का ऑपरेशन करने वालों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं।

        परिजनों ने चैती बाई का अंतिम संस्कार करने से भी इनकार कर दिया है। धनोली गांव आज छावनी में तब्दील हो गया है। चैती बाई के मौत से आक्रोशित लोगों ने मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ अंतरराज्यीय मार्ग पर धनोली गांव में चक्काजाम कर दिया है। चैती बाई के दोनों मासूस बच्चे भी चक्काजाम में शामिल है। गौरतलब है कि बैगा जनजाति संरक्षित जनजाति है, जिनका नसबंदी करना या करवाना गैरकानूनी है। मौके पर पूरे प्रशासनिक अधिकारी मौजूद हैं।

        18 बैगा महिलाओं की नसबंदी

        पेंड्रा के नसबंदी केस में एक नया खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि धनोली गांव की 18 बैगा महिलाओं को डरा-धमकाकर नसबंदी करवाया गया है। अधिकारी जांच के बाद कार्यवाही करने का भरोसा दे रहे हैं।
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        छापे के एक दिन पहले ही तीन ट्रक दवाइयां कर दी गई नष्ट

        छापे के एक दिन पहले ही तीन ट्रक दवाइयां कर दी गई नष्ट

        A day before the raid destroyed three trucks were drugs


        11/14/2014 4:50:09 AM
        बिलासपुर। पुलिस ने गुरूवार को तिफरा औद्योगिक क्षेत्र के कविता फार्मास्यूटिकल्स में छापेमारी की। छापे की खबर पहले ही लीक हो गई थी, जिससे टीम के हाथ कुछ खास नहीं लगा। छापे के एक दिन पहले ही तीन ट्रक दवाई यहां से ले जाई जा चुकी है। फैक्ट्री को सील कर टीम लौट आई है। महिलाओं को जो दवाईयां दी गई थी, उसकी सप्लाई कावो फार्मा ने की थी।
        गुरूवार की शाम आईजी के आदेश पर एसपी के नेतृत्व में एक जांच टीम का गठन किया गया, जिसने कावो फार्मा पर छापा मार कर जांच की। टीम में चकरभाठा टीआई, आईजी कार्यालय टीआई व अन्य पुलिस कर्मी शामिल थे। टीम ने फार्मा से दवा बनाने व बेचने का लाइसेंस व दवाओं की सप्लाई का बिल जब्त किया है।
        बदतर फैक्ट्री
        कविता फार्मास्यूटिकल्स की हालत देखकर पुलिस प्रशासन के अफसर भी चकित रह गए। दवा बनाने वाली इस फैक्ट्री धूल की परतें, गंदगी, जंग लगी मशीनें मिलीं। इस फैक्ट्री का संचालक कानपुर निवासी राजेश खरे है। संचालक ने दवाई बनाने के लिए सन् 1992 में लाइसेंस लिया था।
        नहीं पहुंचे ड्रग विभाग के अधिकारी
        छापे के दौरान पुलिस पहुंच गई। लेकिन औषधि प्रशासन विभाग से कोई नहीं पहुंचा। इसलिए इस फैक्ट्री से दवाईयां जब्त करने की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।
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        आईएमए का दावा : केमिकल टॉक्सिमिया मौत का कारण

        आईएमए का दावा : केमिकल टॉक्सिमिया मौत का कारण

        IMA claims : Chemical Toksimia cause of death


        IMA claims :  Chemical Toksimia cause of death
        11/14/2014 7:57:48 AM
        बिलासपुर। डॉक्टरों को बचाने के लिए आईएमए के प्रख्यात डॉक्टरों की टीम ने नसबंदी कराने वाली महिलाओं की मौत का कारण खराब जेनरिक दवा व संक्रमित लेप्रोस्कोप है। आईएमए ने सभी दवाएं जब्त कर कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है।

        आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रभात श्रीवास्तव ने शकरी व गौरेला के नसबंदी शिविर में बरती गई लापरवाही को लेकर बुधवार को बैठक बुलाइ । बैठक में महिलाओं की मौतों पर शोक व्यक्त करते हुए डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी टीम ने सभी घटनाओं की सिलसिलेवार विवेचना की है। इसमें पाया गया है कि सभी नसबंदी कैंपों में एक ही बैच की जेनेरिक दवा वितरित की गई थी।

        इसके साथ ही जांच में यह भी पाया गया था कि चारों शिविर में प्रयोग किया गया लेप्रोस्कोप भी एक ही था। आईएमए के डॉक्टरों ने पीडि़त महिलाओं की ब्लड कल्चर रिपोर्ट व प्रोकेल्सीटोनिन निगेटिव पाया है। इससे यह सिद्ध होता है कि मामला सेप्टीसेमिया का नहीं बल्कि कैमिकल टॉक्सिमिया यानी ड्रग रिएक्शन का है।

        आईएमए की ओर से जिला अध्यक्ष डॉ. एलसी मढ़रिया, सचिव डॉ. आशुतोष तिवारी, डॉ. देवेंद्र सिंह, डॉ. आरए शर्मा, डॉ. केके साव, डॉ. व्हीके खेत्रपाल, डॉ. अरुण बलानी, डॉ. अनुराग, डॉ. सुनीता घोष व डॉ. जीबी सिंह आदि उपस्थित थे।
        दवाओं पर प्रतिबंध
        आई बुप्रोफेन 400एमजी टेबलेट - टीटी-450413 - मे. टेक्रिकल लैब एंड फार्मा प्रा.लि. हरिद्वार
        सिप्रोसीन 500एमजी टेबलेट - 14101 सीडी - मे. महावर फार्मा प्रलि. खम्हारडीह रायपुर
        लिग्नोकेन एचसीएल आईपी - आरएल 108 - मे. रिगेन लेबोरेटरीज हिसार
        लिग्नोकेन एचसीएल आईपी - आरएल 107 - मे. रिगेन लेबोरेटरीज हिसार
        एम्जारवेट कॉटन पुल आईपी- ए 0033 - मे. हेम्पटन इंडस्ट्रीज संजय नगर रायपुर
        जिलोन लोसन - जेई-179 - मे. जी फार्मा 323 कलानी नगर इंदौर
        यह निकले निष्कर्ष
        - मृत्यु व बीमारी का कारण घटिया जेनेरिक दवाएं हैं।
        - एक ही लेप्रोस्कोप से ऑपरेशन करने के चलते संक्रमण फैला।
        - एक ही बैच की दवाएं की गई सप्लाई।
        - सर्जन पर लॉपरवाही का कोई मामला नहीं बनता।
        - दवाओं की खरीदी व सप्लाई राज्य शासन द्वारा की गई, इसके लिए वहीं दोषी है।

        इस बैच की दवाएं हुई सप्लाई
        डॉ. प्रभात श्रीवास्तव ने बताया कि शिविरों में बैच क्रमांक 14101 सीडी की ही दवाएं सप्लाई की गई है। यह दवा अक्टूबर 2014 में निर्मित हुईं और व्ही केयर कंपनी द्वारा बनाई गई थीं।