Tuesday, December 27, 2016

वाटस एप ग्रुप के छुटभैयों के खिलाफ करेंगे कार्यवाही .-प्रियंका शुक्ला





* वाटस एप ग्रुप के छुटभैयों के खिलाफ करेंगे कार्यवाही .
* में जेएनयू की स्टूडेंट नही हूँ .
* पुलिस के सरंक्षण में चल रहा है  सारा खेल अब नहीं करेंगे बर्दाश्त ,भ्रामक जानकारी फैला रहे है  कुछ लोग .
* क्या सरकार ने जेएनयू के लोगों के लिये कोई नोटिफिकेशन जारी किया है .

 ---  प्रियंका शुक्ला एडवोकेट छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने  जगदलपुर पत्रकारों से कहा .
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जेएनयू के छात्रों के लिये बस्तर में जिस तरह अघोषित प्रतिबन्ध सरकार पुलिस और उनके गुर्गो द्वारा लगा रखा है, इसपर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए .पुलिस के लिये काम करने वाले तथाकथित नेताओं ने वाटसेप ग्रुप में  जिसतरह भ्रम फैला रखा है ,वह बस्तर की हालिया स्थिति के लिये ठीक नही कहा जा सकता .
उक्त बातें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने मेकाज में विकलांग 13 वर्षीय युवक के पोस्टमार्टम के दौरान कही . प्रियंका के साथ शालिनी गेरा एडवोकेट ,निकिता अग्रवाल एडवोकेट और युवक के परिजनों के साथ उपस्थित थीं.
गौरतलब है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस द्वारा मारे गये युवक के शव का दुबारा पोस्टमार्टम के लिये एसडीएम नेताम बोडी लेकर आये थे .
प्रियंका ने वाटसेप ग्रुप में आधारहीन और अनर्गल पोस्ट पर आपत्ति दर्ज करते हुये कहा कि पुलिस अपने मुखबिरों के आधार पर अंधानुकरण न करे इससे बस्तर के हालात और खराब होंगें .
वाटसेप ग्रुप में वायरल हो रही छ: फोटो पर भी उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि पुलिस और उनके मुखबिर अच्छी तरह से जानते है कि हम जेएनयू के स्टूडेंट्स नही है . और न हमारा जेएनयू से कोई वास्ता ही है.

जेएनयू पर सवाल खड़ा करने वालों पर प्रियंका ने कहा कि क्या छत्तीसगढ़ सरकार ने जेएनयू के छात्रों के आने पर रोक को लेके कोई नोटिफिकेशन जारी किया है .एसे में जेएनयू के छात्रों के बस्तर में आने पर इतना हंगामा क्यों होता है . जेएनयू जैसी अंतर्राष्ट्रीय स्तर की संस्थान को बदनाम करने की कोशिश कहां तक ऊचित है. इससे भारत की छबि खराब ही होती है .

प्रियंका ने कहा कि एसे तथाकथित लोगों के खिलाफ पुलिस और सरकार द्वारा कोई कार्यवाही न किये जाने उन्हें नाराजगी है .वे जल्दी ही इन सब पोस्ट को लेकर कडा कदम उठाने की सोच रही है .

प्रियंका ने यह भी बताया कि वे बिलासपुर में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की प्रेक्टिस एडवोकेट है .उन्होंने पत्रकार को बताया कि जब वे दंतेवाड़ा गई  थी तब पुलिस के एस आई रजक ने हम छ: वकीलों की फोटो ली और तुरंत ही अपने समर्पित अग्नि को फोटो भेज कर आपत्तिजनक टिप्पणी के साथ वायरल कर दिया .
उस ग्रुप के एडमिन ,वायरल करने वाले और एस आई के खिलाफ कार्यवाही की मांग भी करती है .
पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उस दिन गाडी में कोई भी जेएनयू का स्टूडेंट्स नही था .
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Monday, December 26, 2016

मूर्खों की ज़मात है छत्तीसगढ़ पुलिस ,कहानी भी ऐसी गढी की बच्चा भी भरोसा न करे.





मूर्खों की ज़मात है छत्तीसगढ़ पुलिस ,कहानी भी ऐसी गढी की बच्चा भी भरोसा न करे.
*   सात वरिष्ठ वकील ,जाने माने पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता मिलकर एक लाख रूपये बदलवाने आये थे वो भी नक्सलियों का .
पुलिस की कारगुजारियों को सामने लाना कबसे हो गया गैरकानूनी काम.
* एस आरपी कल्लुरी ने आते ही दिखाया अपना बदरंग चेहरा .
* बस्तर में लगातार हो रही फर्जी भुठभेड ,हत्यायें और बलात्कार  को छिपाने के लिये की गई गिरफ्तारी.
* सारे देश में छत्तीसगढ़ सरकार  की हो रही है आलोचना ,कल्लूरी ऐसे ही सरकार को डालते रहे है
 संकट में .असंवैधानिक ,अनैतिक और अलोकतांत्रिक गिरफ्तारी के खिलाफ मानवाधिकार संगठनों ने की रिहाई की मांग.
* छत्तीसगढ़ जनसुरक्षा अधिनियम का दुरपयोग .
*कल्लूरी ने इन्हें सफेदपोश माओवादी बताया .
* कारपोरेट घरानों को लाभ पहुचाने कि लिये शिवराम कल्लूरी ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के क्षेत्र में बदल दिया है. जो लोग बस्तर का सच बाहर लाना चाहते है उन्हें यह झूठे मामले में फंसा रहा हैं.
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अभी दो महीना भी नहीं बीता जब बस्तर पुलिस ने ठीक एसे ही दिल्ली के दो प्रोफेसर और छत्तीसगढ़ के राजनैतिक नेता पर हत्या का केस रजिस्टर किया था ,और सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ सरकार की फजीहत कराकर अपने ही आरोपों से मुकर जाने वाली पुलिस फिर एक बार नई मूर्खतापूर्ण कहानी लेके सामने आई है.
और अब कहानी रची है
तेलंगाना से सात लोग जिनमें हाईकोर्ट के दो वरिष्ठ एडवोकेट,एक जाने माने पत्रकार दो मानवाधिकार संगठन के सदस्य और दो काँलेज के छात्र एक लाख रूपये (पुराने नोट ) बदलवाने के लिये ,नक्सली साहित्य अपने बेग में रखकर छत्तीसगढ़ पुलिस के खिलाफ भडकाने के लिये बस्तर में आ रहे थे ,तो उन्हें छत्तीसगढ़ जन सुरक्षा अधिनियम में गिरफ्तार कर लिया गया .
पत्रिका लिखता है
 नक्सलियों के नोट बदलने ग्रामीणों पर दबाव बनाने के आरोप में सुकमा पुलिस ने किस्टाराम थाने के धर्मापेंटा से अधिवक्ता, पत्रकार, छात्रों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। सुकमा एएसपी जितेन्द्र शुक्ला ने बताया, तेलांगाना राज्य के यह लोग लगातार छत्तीसगढ़ में घुसकर ग्रामीणों पर नोट बदली का दबाव बना रहे थे। ग्रामीणों से मिली शिकायत के बाद तेलांगाना पुलिस की मदद से घेराबंदी कर इन्हें गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से एक लाख रुपए के 500 व हजार रुपए के पुराने नोट मिले है। साथ ही नक्सली साहित्य भी बरामद किया गया है।

गिरफ्तार सभी सात लोग में हाईकोर्ट अधिवक्ता आंध्र व तेलंगाना के बाला रविन्द्रनाथ पिता बी सोमैय्या, अधिवक्ता सीएच प्रभाकर पिता रामैया, डी प्रभाकर पिता त्रिपालु, हैदराबाद के पत्रकार बी दुर्गाप्रसाद पिता एल्लैयाह, तेलंगाना विद्यार्थी वेदिका संस्था से जुड़े राजेंद्र प्रसाद पिता के.य्या, नजीर पिता मो.याकुब और रामानंदा लक्ष्मय पिता आर सितैय्या शामिल हैं। पुलिस ने इन पर राज्य जनसुरक्षा अधिनियम के उल्लंघन का मामला दर्ज कर सोमवार को सुकमा कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।

 * आईजी ने कहा सफेदपोश नक्सली
दिल के ऑपरेशन के बाद बस्तर पहुंचे आईजी एसआरपी कल्लूरी ने इस गिरफ्तारी के बाद सभी को सफेदपोश नक्सली बताया है। उन्होंने कहा, ये लोग नक्सलियों के नोट बदलवाने लंबे समय से ग्रामीणों पर दबाव बना रहे थे। तेलांगाना पुलिस से मिली पुख्ता सूचना के बाद इन्हें गिरफ्तार किया गया है।

गिफ्तारी के विरोध में स्वर हुए तेज
इधर गिरफ्तारी को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। कम्युनिस्ट नेता संजय पराते ने जारी बयान में कहा, ये सातों तेलंगाना डेमोके्रटिक फोरम(टीडीएफ) से जुड़े हुए हैं। ये राज्य में हो रहे फर्जी मुठभेड़ों की फैक्ट फाइंडिंग करने यहां पहुंचे थे। ये लोग काले कानून की भेंट चढ़ा दिए गए हैं। इससे पहले विनायक सेन की गिरफ्तारी हुई भी इसी अधिनियम के तहत की गई थी। लंबे समय के बाद यह दूसरा मामला बताया जा रहा है।

पीयूसीएल प्रदेश इकाई के अध्यक्ष लाखन सिंह ने घटना को अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने आरोप लगाया, बस्तर में लगातार हो रहे फर्जी मुठभेड़ की जांच करने आ रहे दल को खम्मम में गिरफ्तार कर छत्तीसगढ़ पुलिस को सौंपा गया। इन सभी को तुरंत रिहा किया जाए।

झूठे आरोप में फंसाने का आरोप ;

आन्ध्र और तेलंगाना के मानवाधिकार कार्यकर्ता मदन स्वामी का आरोप है कि बस्तर पुलिस और सुरक्षा बल के लोग निर्दोश आदिवासियों की हत्या कर रहे है ,उनके घरों को उजाड़ और महिलाओं के साथ बलात्कार कर रहे है .स्वामी का कहना है कि गिरफ्तार लोग समाज के प्रतिष्ठित वकील पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता है .
तेलंगाना पुलिस ने इसलिए झाडा पल्ला .

तेलंगाना डेमोक्रेटिक फोरम के संयोजक प्रोफेसर विश्वेश्वरैया ने कहा कि  फोरम के सदस्य 25 दिसंबर को सुबह  हैदराबाद के लिये
कार से रवाना हुये थे ,वे करीब नौ बजे  तेलंगाना के खम्मम  इलाके मे पहुचे तो दुगुडम पुलिस ने इनसे कडी पूछताछ की ,सबके पास अपने अपने पहचान पत्र, आधार कार्ड चैक किये
इसके बाबजूद इन सबको माओवादी गतिविधि में संलग्न बताकर छत्तीसगढ़ की सुकमा पुलिस के  धरमपेटा पुलिस को सोंप दिया .
इसकी सूचना मिलते ही तेलंगाना के कार्यकर्ता हैदराबाद  में डीजीपी अनुराग शर्मा से मिलने  गये .लेकिन उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड लिया कि उनकी गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ पुलिस ने की है.

विश्वेश्वरैया का आरोप है कि चूंकि तेलंगना के विधानसभा का सत्र चल रहा है ,इसलिए किसी बबंडर से बचने के लिये एसा कहके अपनी जिम्मेदारी से बचाव किया है.
लोकस्वातंत्र संगठन पीयूसीएल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि किरण जैन और महासचिव व्ही सुरेश ने इस गिरफ्तारी को अलोकतांत्रिक और गैरकानूनी बताया है.
उन्होंने कहा कि कारपोरेट घरानों को लाभ पहुचाने कि लिये शिवराम कल्लूरी ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के क्षेत्र में बदल दिया है. जो लोग बस्तर का सच बाहर लाना चाहते है उन्हें यह झूठे मामले में फंसा रहा हैं.
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मंडी में नहीं मिला भाव तो गुस्साए किसानों ने सड़कों पर फेंका 20 ट्रैक्टर टमाटर


Photo मंडी में नहीं मिला भाव तो गुस्साए किसानों ने सड़कों पर फेंका 20 ट्रैक्टर टमाटर

2016-12-26 17:01:

<img src=http://img.patrika.com/upload/icons/photo.png alt=Photo Icon title=Photo Icon valign=middle width=16 height=16 /> मंडी में नहीं मिला भाव तो गुस्साए किसानों ने सड़कों पर फेंका 20 ट्रैक्टर टमाटर

रायपुर. नोटबंदी के 46 दिन बाद भी इसका असर कम नहीं हो रहा है। नोटबंदी का पहाड़ छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के किसानों पर टूटा है। एेसे में किसानों को मंडी में टमाटर का भाव नहीं मिलने पर उन्हें सड़कों पर फेंकना पड़ा। किसानों के इस गुस्से को देखकर वहां के लोग भौचक्के रह गए। एेसे में वहां मौजूद लोग जब तक कुछ समझ पाते, इससे पहले सड़क पर टमाटर का ढेर लग गया। चारों ओर टमाटर फैल जाने से सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

किसानों ने बताया कि उन्होंने टमाटर यह सोच कर लगाए थे कि आमदनी अच्छी होगी। लेकिन दुर्ग व आसपास के किसानों पर नोट बंदी का पहाड़ ही टूट गया है। टमाटर का भाव बीस रुपए प्रति किलो टूट कर पचास पैसा प्रति किलो हो गया है। वहीं खुदरा मार्केट में इसे कोई मुफ्त में लेने को तैयार नहीं है।
tomatoes

परेशान होकर किसानों ने टमाटर को सड़कों पर बिखेरना ज्यादा बेहतर समझा। बाजार में आने जाने वाले रास्तों पर टमाटर ही टमाटर बिखरे पड़े हैं। नोट बंदी ने किसानों के चेहरे को टमाटर की तरह लाल करने की बजाए मुरझा दिए हैं। टमाटर की अधिक पैदावार भी किसानों के किसी काम की नहीं।
Farmers
























नोट बंदी से टूट गए किसान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऊंचे मूल्य की करेंसी नोटों की बंदी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। विरोध कर रहे किसान ने बताया कि इस बार उम्मीद थी कि टमाटर की कीमतों में भारी उछाल आएगा। इसी भरोसे के साथ इस बार बड़े पैमाने पर टमाटर की फसल ली। लेकिन नोट बंदी की वजह से अब कोई भी टमाटर लेने को तैयार ही नहीं है। हालत ये है कि कोचिए भी टमाटर नहीं उठा रहे हैं।
मालूम हो कि इससे पहले भी दिसंबर माह में छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में पसीने की उपज का भाव नहीं मिलने से सैकड़ों किसानों ने सड़कों पर टमाटर बिखेर दिया था। जिससे यहां पैदल चल पाना भी दूभर हो गया था। सड़कों पर जगह-जगह टमाटर का ढेर लग जाने से वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। पसीने की उपज का किसानों को भाव नहीं मिलने से सैकड़ों किसानों ने सड़क पर पहुंच कर सरकार के विरोध में नारेबाजी भी की थी।

हाड़ कंपकपा देने वाली ठंड में यहां के आदिवासियों की हालत देख सिहर उठेंगे


Photo हाड़ कंपकपा देने वाली ठंड में यहां के आदिवासियों की हालत देख सिहर उठेंगे आप

2016-12-26 14:44:39


<img src=http://img.patrika.com/upload/icons/photo.png alt=Photo Icon title=Photo Icon valign=middle width=16 height=16 /> हाड़ कंपकपा देने वाली ठंड में यहां के आदिवासियों की हालत देख सिहर उठेंगे आप

आरती सिंह/रायपुर. मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता हूं, मगर हर सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती हैं...कुछ ऐसे ही हालातों को बयां करती ये तस्वीर छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक ठंडे पर्यटन स्थल मैनपाट की है।

कड़ाके की ठंड का मुकाबला

यहां हाड़ कंपा देने वाली हवा और 5.4 डिग्री पर गिरे तापमान में जब लोग हीटर और रजाई के साथ घरों में दुबके होते हैं तो अंबिकापुर के मैनपाट में एक दुनिया ऐसी भी है, जहां लोग मवेशियों के बीच पुआल से कड़ाके की ठंड का मुकाबला करते हैं। हर कोई उस पुआल से सर्दी से दो-दो हाथ करता दिखता है। यहां के मांझी आदिवासियों को मवेशियों के बीच पुआल (पैरा) में सोते देखकर एकबारगी आप भी सिहर उठेंगे।
cold
विकास पथ पर अग्रणी होने का दंभ भर रहे राज्य में इनकी स्थिति अब भी जस की तस है और वे गरीबी के चलते रोटी-कपड़ा और मकान जैसी सुविधाओं से कोसों दूर हैं। मैनपाट के सभी 39 पंचायतों में रहने वाले करीब 20 हजार मांझी आदिवासियों की खस्ता माली हालत सरकारी योजनाओं पर सवाल उठाती नजर आती हैं। 
temperature
हाड़तोड़ मजदूरी के बाद रात में उन्हें सर्दी के सितम से भी रोजाना इसी तरह सामना करना होता है। रविवार को यहां का तापमान 5.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो कई बार शून्य तक भी चला जाता है। इसके अलावा इन पुआलों में जहरीले जीव-जंतुओं के काटने और आगजनी जैसी घटनाओं का भी खतरा बना रहता है।
Cold

उत्तरी हवाओं से और गिरेगा तापमान

शनिवार व रविवार के तापमान में ज्यादा अंतर नहीं था, लेकिन फिर भी रात में ठिठुरन वाली ठंड जारी है। रविवार को प्रदेश में सबसे कम तापमान 9 डिग्री अंबिकापुर, जगदलपुर और राजनांदगांव में दर्ज किया गया। वहीं, इस दिन प्रदेश का औसत न्यूनतम तापमान 14 डिग्री था। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, आने वाले दिनों में बस्तर व अंबिकापुर संभाग में कड़ाके की ठंड पडऩे की संभावना है।
उत्तरी बर्फीली हवाओं के कारण यहां का तापमान और गिरेगा। इससे इन क्षेत्रों में शीत लहर के आसार हैं। मौसम वैज्ञानिक उमेश राय के अनुसार, जल्द ही पश्चिमी विक्षोभ बनने की संभावना है, इसके असर से प्रदेश में ठंड और बढ़ेगी।

हाईकोर्ट वकीलों की गैरकानूनी पूछताछ के नाम पर परेशान करने की कोशिश.

अभी अभी :जगलपुर  पुलिस की कारिस्तानी

26.12.2016  8.25 ,pm

** हाईकोर्ट के आदेश और कमिश्नर जगदलपुर के निर्देश के बाद भी छत्तीसगढ़ पुलिस किसी की सुनने को तैयार नहीं .
* हाईकोर्ट वकीलों की गैरकानूनी पूछताछ के नाम पर परेशान करने की कोशिश.
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अभी दो दिन पहले ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने  13 साल के बच्चे की लाश को खोदकर दुबारा पोस्टमार्टम के आदेश दिये थे .और जगदलपुर कमिश्नर श्री वासनीकर की देखरेख में पोस्टमार्टम के आदेश दिये थे ,सारी कार्यवाही परिजनों के समक्ष करने के आदेश दिये थे.
आदेश के अनुपालन में याचिकाकर्ता की वकील प्रियंका शुक्ला और निकिता कमिश्नर की सलाह और कहने पर गोयल धर्मशाला में रात को ठहरने गये थे .
गोयल धर्मशाला रूम नं 3, जहा कल ही  हमको कमिश्नर से  रुकने के लिए बात हो गयी थी,इसके बावजूद अभी कुछ देर पहले पुलिस की एक टीम अचानक आई और हमको परेशान करने लगी।हमने सब कुछ बताया इसके बावजूद हमसे  सब इंसपेक्टर अर्चना ने बोला कि हम नही जानते आपको थाने चलना होगा,अपना सामान चेक करवाना होगा आप लोग अवैधानिक तरीके से रुके है।
हमने बताया कि कमिशनर महोदय और sdm जगदलपुर महोदय से हमारी बात हुयी है माननीय कोर्ट के आदेश पर हम यहाँ पोस्टमॉर्टम के लिए आये,हम वकील है पर फिर भी मानने को तैयार ही नही हो रहे थे.
बाद में फिर से हमारी फ़ोटो ली गयी. न ही हमारे कहने के बाद भी  अपने किसी अधिकारी से बात करा  रहे थ

 काफी देर बाद जब कमिशनर साहब को फोन पर लेकर स्पीकर ऑन करके सबके सामने रक्खा तब जाकर मजबूरी में si अर्चना को बात करना पड़ा.
अधिवक्ता निकिता को कमरे के बाहर से बोला "ए लड़की इधर बाहर आओ" बताने के बावजूद कि अधिवक्ता है,बत्तमीजी से ट्रीट किया गया।बाद में जब अधिकारी से स्पीकर पर बात हुयी,चूँकि सब सुन रहे थे इसलिए plz plz करके बात करते हमारी फोटो ली।
पुलिस हम सबको परेशान और डराने आई थी .
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प्रियंका शुक्ला की रिपोर्ट
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Activists who visited Maoist-hit Chhattisgarh arrested under security act

Activists who visited Maoist-hit Chhattisgarh arrested under security act
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Updated: Dec 26, 2016 16:56 IST

By Ritesh Mishra and S Kareemuddin, Hindustan Times, Raipur/Bastar
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According to the Sukma superintendent of police, the accused were found with old currency notes and some important Naxal related documents. (HT file)

Updated: Dec 26, 2016 16:56 IST

By Ritesh Mishra and S Kareemuddin, Hindustan Times, Raipur/Bastar

Police in Chhattisgarh’s Bastar arrested on Monday a group of civil society members, including lawyers, journalists and students , who had gone to the region to probe alleged atrocities on locals in Maoist areas.

The police booked the activists under the draconian Chhattisgarh Public Security Act. They were detained at around 9:30 am in Dummagudem in Telangana and later handed over to Chhattisgarh police.

Police sources said those booked included advocates Chikud Prabhakar and Bala Ravinder, journalist B Durgaprasad, tribal rights activist R Lakshmanaiah and two students.

Chikud Prabhakar is human rights lawyer and member secretary of Telananga Public Front.

“The accused were found with old currency notes and some important Naxal related documents. They were arrested and booked and were produced in court,” said Indira Kalyan Elesela, SP of Sukma said.


The accused were on a fact-finding mission related to encounters and alleged atrocities in Maoist-hit areas of Telangana and Chhattisgarh.

Bastar is among the regions worst-affected by Maoist insurgency. Both the rebels and the police face accusations of rights abuses. Access to interiors of Bastar is largely controlled either by the police and its sponsored local vigilante groups or the Maoists.



The Chhattisgarh Police have been extremely touchy about the foray of civil rights activists into the Maoist-hit regions where allegations of rights abuse are aplenty.

In Bastar, journalists too have been at the receiving end for what activists say are persistent attempts by police to intimidate the media. Four local journalists have been arrested since last year. A visiting BBC newsman was forced to leave the district. Another was forced to flee the region after being accused of having Maoist links.


Early last month, the Chhattisgarh Policeregistered a murder case against Nandini Sundar, a Delhi University professor and others in Sukma on the complaint of the wife of a tribal who was killed on 4 November in Chhattisgarh.

Sundar rubbished the allegations of the police, even as a number of civil rights bodies called the charges a tactic of “revenge and harassment”.

Sundar has been working extensively in Maoist-hit regions like Bastar. On her petition, the Supreme Court had banned the state-backed anti-Maoist force Salwa Judum, calling it unconstitutional. She has also been highlighting situation of ordinary villagers in Bastar and other areas.

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PUCL Condemns arrest of Fact Finding Team Members by Telangana Police and unlawfully handing over to Chhattisgarh Police

PEOPLE’S UNION FOR CIVIL LIBERTIES,PUCL .
270-A, Patpar Ganj, Opposite Anand Lok Apartments, Mayur Vihar I, Delhi 110 091
Phone 2275 0014 PP FAX 4215 1459
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E.mail: puclnat@gmail.com& pucl.natgensec@gmail.com
26th December, 2016

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                Press Statement
*
PUCL Condemns arrest of Fact Finding Team Members by Telangana Police
and unlawfully handing over to Chhattisgarh Police
The PUCL strongly condemns the illegal, unprovoked and malicious arrest by the
Telangana police of a 7-member team of lawyers, journalists and human rights activists  belonging to the Telangana Democratic Forum and other organisations on 25th December,
2016 at Dummagudam village of Bhadrachalam District of Telangana who were planning to  visit Chhattisgarh to enquire into complaints of human rights violations suffered by adivasis  villagers of Chhattisgarh at the hands of security forces. The seven members of the team are:

1. Balla Ravindranath, Advocate.High Court, AP and Telangana.
2.Chikkudu Prabhaker, Advocate
3.Durga Prasad, Journalist Hyderabad
4.Duddu Prabhaker, President, AP Kula Nirmulana Poratta Samiti
5. Rajendra Prasad, Telangana Vidhyarthi Vedika
6. Nazeer, Telangana Vidhyarthi Vedika
7. Ramananda Lakshmay.
It is reported that after holding them under arrest till about 600 pm or thereabouts on
25th December, the Telangana police took the 7 arrested persons across the border and
handed them over to Chhattisgarh police at Kunta Police Station on the same day, i.e. 25th
December, 2016.
It is learnt that today, 26.12.2016 in the morning, all the 7 persons were produced
before the remanding Court in Sukma and remanded to custody under sections 8(1), (2) and
(3) of the Chhattisgarh State Public Security Act. At the time of production before the
remand court, the Chhattisgarh police is reported to have informed the court that the 7  persons were arrested in Chhattisgarh state.
PUCL expresses shock at the brazen abuse of the law committed by both Telangana state police and the Chhattisgarh police. Firstly, there was no reason to arrest the Fact Finding Team members in Dummagudam in Telangana state. Secondly, when they were arrested in Telangana by the Telangana police, the courts in Chattisgarh have no jurisdiction
and they should have been produced before a Court in Telangana alone. Thirdly, the SC has  clarified the law on numerous occasions, that if the persons shown as arrested will not escape or evade justice or threaten witnesses or destroy evidence, there is no reason to
remand them to custody and they can be released and asked to appear as and when
required. It should be noted that the arrested persons include a lawyers of the High Courts,
journalists and others. So there was no need to remand them, if at all the police wanted to
prosecute them.
The brazen disregard for the law has been reportedly compounded by the
Chhattisgarh police reportedly misleading the remanding court in Sukma that the 7 persons
were arrested within Chhattisgarh state itself.
PUCL strongly condemns the illegal and unlawful actions of both the Telangana and
Chhattisgarh police. Such acts of highhandedness and flagrant abuse of law is only possible
when the State promises the police total impunity and protection from any prosecution for
abuse of law. The actions of the police of both states is violative of the fundamental rights to
free movement, freedom of speech and expression and the fundamental duty to protect the
fundamental rights of adivasis and other local people in Bastar area who are victims of a
severely repressive state police. It also needs to be pointed out that the FFT was seeking to
visit villages in Bastar affected by human rights violations in areas which are not declared to
be closed for movement of people. Such actions of the police are therefore deliberate acts
meant to thwart bringing to the attention of the people of India the harsh situation
prevailing in the villages of Bastar region in Chhattisgarh state. It is also to scare others in
the future from daring to visit the conflict hut areas.
The open abuse of the law by the Chhattisgarh police will have to be seen against the
backdrop of the remarks passed recently by the National Human Rights Commission
(NHRC) which remarked that the complaints about widespread abuse of law and
unleashing of violence by security forces in Chhattisgarh cannot be ignored or taken lightly.
The NHRC had in fact summoned the Chief Secretary of Chhattisgarh government and the
Inspector General of Police, Mr. Kalluri, who is accused of masterminding the repressive
actions of the police, to appear before the Commission.
PUCL demands that the Chhattisgarh police immediately drops all charges against
the 7 member team and release them from custody. PUCL also demands that the NHRC
should immediately intervene in the issue, ascertain facts, especially the reported untruths
about the arrest of the 7-member Fact Finding Team who were arrested in Telangana but
claimed to have been arrested in Chhattisgarh, and to initiate criminal prosecution against
the Police officials of both states, if there found to have abused the law.

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Mr. Ravi Kiran Jain, Dr. V. Suresh,
National President, PUCL National General Secretary, PUCL
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