Thursday, December 11, 2014

क्या है अफ़ज़ल गुरु के गाँव में चुनावी फ़िज़ा?

क्या है अफ़ज़ल गुरु के गाँव में चुनावी फ़िज़ा?

  • 2 घंटे पहले
कश्मीर घाटी, कश्मीरी नौजवान
कश्मीर घाटी के कुछ गांवों के नाम चरमपंथ के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हैं.
इनमें तीन खासतौर पर उल्लेखनीय हैं- त्रेगाम, जगीर घाट और सोयबुग.
कुपवाड़ा जिले का त्रेगाम मक़बूल बट का गांव है, जिन्हें दिल्ली के तिहाड़ जेल में वर्ष 1984 में फांसी दी गई थी.
उन पर बैंक लूट, हत्या, आतंक फैलाने और देश के ख़िलाफ़ षड्यंत्र करने का अभियोग चला था.
कश्मीर में चरमपंथ की शुरुआत के लिए उनकी फांसी को भी एक तात्कालिक कारण माना जाता रहा है.
दूसरा गांव है- जगीर घाट, जो सोपोर के पास बारामूला ज़िले में पड़ता है. यह अफ़ज़ल गुरु का गांव है. उन्हें नौ फरवरी 2013 को तिहाड़ जेल में ही फांसी दी गई थी.

बहिष्कार

कश्मीर घाटी, कश्मीरी नौजवान
अफ़ज़ल पर भारतीय संसद पर चरमपंथी हमले की योजना में शामिल होने का मुकदमा चला था और वे मुकदमे की कार्यवाही के बाद दोषी पाए गए.
तीसरा गांव है- बडगाम ज़िले का सोयबुग, जो हिज़्बुल मुजाहिद्दीन के मौजूदा कमांडर-इन-चीफ सैय्यद सलाहुद्दीन का है.
सलाउद्दीन अब कथित तौर पर सरहद पार लाहौर और मुज़फ्फ़राबाद के पास के अपने अड्डों पर रहते हैं. इन तीनों गांवों में चुनाव की अलग-अलग तस्वीरें दिखीं.
सोपोर के जगीर घाट में नौ दिसम्बर को आमतौर पर लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया.
अफ़ज़ल गुरु को याद करते हुए नौजवानों ने गांव के बाहर एक पोस्टर लगा रखा था, जिस पर अफ़ज़ल के साथ मक़बूल बट की भी तस्वीर थी.

'इस तरह के जनतंत्र'

अफ़ज़ल गुरु की फांसी पर विरोध प्रदर्शन (फाइल फोटो)
अफ़ज़ल गुरु की फांसी पर विरोध प्रदर्शन (फाइल फोटो)
पोस्टर पर वोट बहिष्कार का ऐलान किया गया था. इसका असर भी दिखा. यहां किसी तरह की कोई हिंसक झड़प या ज़ोर-जबर्दस्ती नहीं हुई.
गांव के कुल 468 मतदाताओं में से सिर्फ़ छह ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. मतदान करने वाले लोग किसी न किसी राजनीतिक पार्टी के समर्थक या सदस्य बताए गए हैं.
उन्हें किसी ने भी वोट डालने से रोका नहीं.
अफ़ज़ल गुरु की बीवी रोज़ की तरह एक निजी नर्सिंग होम में अपनी ड्यूटी के लिए चली गई थी.
घर से निकलते वक्त उन्होंने कुछ स्थानीय पत्रकारों से केवल इतना कहा कि 'इस तरह के जनतंत्र' में उसका कोई यकीन नहीं रह गया है, जहां लोगों को बिन बताए फांसी दी जाती हो और फिर परिजनों को शव भी नहीं दिए जाते हों.

मतदान केंद्र

कश्मीर घाटी
कश्मीर घाटी में मक़बूल बट के पोस्टर.
उधर, कुपवाड़ा के त्रेगाम गांव, जहां मकबूल बट पैदा हुए थे, में इस बार मतदान पहले के मुक़ाबले बेहतर हुआ.
वहां दूसरे चरण में ही दो दिसंबर को मतदान हुआ था. मकबूल बट के परिजनों और उऩके खास समर्थक-परिवार के सदस्यों ने वहां मतदान नहीं किया.
लेकिन अन्य परिवारों को मतदान केंद्र पर लाइन में खड़े देखा गया.
भारत सरकार की नजर में मकबूल बट एक देशद्रोही था पर कश्मीर घाटी में उन्हें आज भी आज़ादी की लड़ाई का पहला शहीद कहा जाता है.
उनके चित्र वाले बड़े-बड़े पोस्टर कश्मीर के सभी शहरों-कस्बों में बिकते देखे जा सकते हैं.

मताधिकार

सैयद सलाहुद्दीन
बारामूला-सोपोर जाते वक्त नौ दिसम्बर को उनके चित्र वाला एक बड़ा पोस्टर मैंने बारामूला स्थित आर्मी पोस्ट के बगल में देखा. किसी ने उसे उतारा नहीं था.
सबसे दिलचस्प नज़ारा नौ दिसंबर को ही बड़गाम के सोयबुग में था, जो हिज़्बुल कमांडर-इन-चीफ सैय्यद सलाहुद्दीन का गांव है. यहां भारी पैमाने पर मतदान हुआ.
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक गांव के दोनों मतदान केंद्रों पर सत्तर फ़ीसदी से ज़्यादा लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.
कश्मीर के आधुनिक इतिहास का यह कम दिलचस्प पहलू नहीं कि एक समय सलाहुद्दीन कथित धांधली के चलते चुनाव नहीं जीत सके थे और आज उनके गांव में स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से मतदान हो रहा है.

वोट की लड़ाई

जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव
लोग कहते हैं कि वोट की लड़ाई में मिली निराशा के बाद ही मोहम्मद यूसुफ शाह (सैय्यद सलाहुद्दीन का वास्तविक नाम) 1987 में बाग़ी हो गए.
तब वह श्रीनगर के अमीराकदल से मुस्लिम युनाइटेड फ्रंट के प्रत्याशी थे. यासीन मलिक उनके चुनाव एजेंट थे.
आमतौर पर माना जाता है कि उस चुनाव में यूसुफ शाह जीत रहे थे पर भारी पैमाने पर कथित तौर पर धांधली की गई और मतगणना के समय नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रत्याशी को जीता हुआ घोषित कर दिया गया.
यूसुफ और यासीन बुरी तरह पीटे भी गए. कुछ दिनों बाद यूसुफ शाह अचानक ग़ायब हो गए. बाद में वह हिज़्बुल के कमांडर-इन-चीफ के रूप में जाने गए.

कश्मीर घाटी

जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव
कश्मीर घाटी में चरमपंथी गतिविधियों में उनका संगठन सबसे सक्रिय माना गया था.
सोयबुग के इब्राहिम और उन जैसे कई नौजवान कहते हैं, "गांव वालों के मतदान में शामिल होने का मतलब यह नहीं कि हमने 'आजादी की अपनी मांग' छोड़ दी है या कि 'शहीदों' को भुला दिया है."
उन्होंने कहा, "यह चुनाव स्थानीय समस्याओं के समाधान का ज़रिया है. हमें सड़क-पानी-बिजली-स्कूल-अस्पताल चाहिए. इन सबका इंतज़ाम कौन करेगा?"
वे कहते हैं, "हम कश्मीर मसले के समाधान तक अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी की समस्याओं के निदान का इंतज़ार नहीं कर सकते."

पुलिस के हत्थे चढ़ा मानव तस्करी करने वाला दलाल

पुलिस के हत्थे चढ़ा मानव तस्करी करने वाला दलाल

broker active human trafficking police team arrested in Delhi


broker active human trafficking police team arrested in Delhi
12/3/2014 1:41:51 PM
जशपुर। छत्तीसगढ़ के तीन जिलों में सक्रिय मानव तस्करी करने वाले दलाल को जशपुर पुलिस टीम ने दिल्ली में गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। उसके खिलाफ छत्तीसगढ़ में 12 मामले दर्ज हैं।

वह 2004 से दिल्ली के शुकरपुर में प्लेसमेंट एजेंसी का संचालन कर रहा था। यहां से वह किशोर-किशोरियों को लोगों के घरों में मेट का काम करने भेजता था।

फरसाबहार थाना प्रभारी मल्लिका बनर्जी ने बताया कि दिल्ली में गुम इंसान की तलाश के दौरान टीम को पता चला कि दिल्ली के शुकरपुर क्षेत्र में चंपारण बिहार निवासी गुड्डू उर्फ गौरव शाह कई सालों से प्लेसमेंट एजेंसी का संचालन कर रहा है और उसने छत्तीसगढ़ के किशोर व किशोरियों को दिल्ली में कई जगहों पर काम पर लगा दिया था। गौरव शाह पर छत्तीसगढ़ में 12 मामले दर्ज हैं।

उसे जशपुर, रायगढ़ और सरगुजा पुलिस खोज रही थी। मुखबिरों से सूचना मिलते ही टीम ने उसे शुकरपुर से गिरफ्तार कर लिया। उसे दिल्ली के न्यायालय में पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड में जशपुर लाया जाएगा।

लापता नाबालिग की रेप के बाद हत्या

लापता नाबालिग की रेप के बाद हत्या

Minor killed after rape in Raigarh


Minor killed after rape in Raigarh
12/11/2014 10:43:26 AM
रायगढ़। धरमजयगढ़ के कुडुमकेला से लापता नाबालिग की रेप के बाद हत्या का मामला सामने आया है। ३ दिन पहले परिजनों ने नाबालिग के लापता होने की रिपोर्ट घरघोड़ा थाना में दर्ज कराई थी। जिसमें परिजनों ने स्थानीय विवेक ठाकुर पर नाबालिग को भगाने का आरोप लगाया था। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ इपराध दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।

गेरवानी की शिक्षिका के पहले लापता व फिर हत्या का मामला अभी दर्ज भी नहीं हुआ था कि घरघोड़ा के कुडुमकेला में भी एक नाबालिग की रेप के बाद हत्या कर दी गई है। मिली जानकारी के अनुसार १७ वर्षीय सोनाली साहू पिता टिकेश्वर साहू रहस्यमय तरीके से लापता हो गई। ऐसे में, ७ दिसंबर को परिजनों ने नाबालिग के लापता होने की शिकायत घरघोड़ा थाना मेंं दर्ज कराई।

हालांंकि परिजनों ने इसमें स्थानीय युवक विवेक ठाकुर पर नाबालिग के भगाने का आरोप भी लगाया। पुलिस ने नाबालिग के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कर चुप्पी साध ली। ३ दिन बाद लापता नाबालिग की शव कुडुमकेला के जंगल से बरामद हुआ है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में नाबालिग के साथ पहले रेप उसके बाद हत्या की गई है। नाबालिग को गला घोंट की मौत की नींद सुलाया गया है। इससे पुलिस ने लापता नाबालिग के शव को कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेज दिया। वहीं पीडि़त परिवार व ग्रामीणों के बयान दर्ज कर मामले की जांच शुरू की दी है। चंूकि नाबालिग के लापता होने के मामले में धारा ३६३, ३६६ के तहत पहले से अपराध कायम था।

वरना बच जाती नाबालिग की जान

पीडि़त परिवार ने नाबालिग के लापता होने की रिपोर्ट ३ दिन पहले दर्ज कराई थी। जिसमें एक युवक का नाम भी दर्ज था। उसके बावजूद भी घरघोड़ा पुलिस ने नाबालिग की पतासाजी में रुचि नहींं दिखाई। पुलिस ने पीडि़त परिवार की शिकायत को गंभीरता से लेती तो शायद नााबालिग की जान बचाई जा सकती थी। 
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हमारे शहर में बच्चों को बेचने वाला गिरोह तो सक्रिय नहीं!

हमारे शहर में बच्चों को बेचने वाला गिरोह तो सक्रिय नहीं!

Is human trafficking gang active in city?


Is human trafficking gang active in city?
12/11/2014 8:18:25 AM
भिलाई। खुर्सीपार के एक निजी स्कूल में पढऩे वाली नाबालिग को दो अनजान युवक बहला कर कोलकाता ले जाने के फिराक में थे। वे पावर हाऊस स्टेशन तक लड़की को लेकर वे पहुंच भी गए। वहां घर वालों को न पाकर बच्ची रोने लगी। स्टेशन में जीआरपी व आरपीएफ के जवान तैनात थे।

उनको देखकर बच्ची को ले जाने की कोशिश करने वाले बच्ची को छोड़कर भाग निकले। बच्ची के बैग की तलाशी में स्कूल का पता चला। स्कूल से घर का पता लगा कर आरपीएफ ने बच्ची के सकुशल घर पहुंचाया। स्टेशन पर मौजूद आरपीएफ के एएसआई एसके दुबे ने बताया कि उन्होंने बच्ची से पूछताछ की तो वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। बैग की तलाशी लेने पर कापी में टीचर का नाम था।

यूनिफार्म के बेल्ट में निजी स्कूल का नाम था। स्कूल का नाम देखने के बाद वे बच्ची को लेकर खुर्सीपार स्थित स्कूल पहुंचे। स्कूल में बताया गया कि बच्ची उनके स्कूल की छात्र है। स्कूल से घर का पता लेकर लेकर बच्ची को उनके घर पहुंचाया गया। पूरी घटना जानकर बच्ची के माता पिता सकते में आ गए। उन्होंने आरपीएफ के एएसआई को इसके लिए धन्यवाद दिया।

बच्ची के पिता ने बताया कि उनकी बेटी खुर्सीपार के निजी स्कूल में पढऩे सुबह 11.45 बजे जाती है। सोमवार को भी दोपहर १२ बजे से पहले स्कूल के बाहर पहुंच गई थी। ऐसी घटना के बारे में कभी सोचा नहीं था।उन्होंने अपनी बच्ची से घटना के बारे में पूछा। बच्ची ने बताया कि उसे वेन में बैठाकर दो युवक कोलकाता ले जाने के लिए स्टेशन लेकर आए थे। स्टेशन पहुंचने के बाद वहां घर वाले नहीं दिखे तो मैं घबरा वह जोर जोर से रोने लगी।
आरपीएफ अलर्ट
शहर में बच्चों को बेचने वाला गिरोह सक्रिय होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इस घटना के बाद आरपीएफ भी अलर्ट है। बच्ची भागे युवकों का हुलिया ठीक से नहीं बता पा रही है, फिर भी दोनों युवकों की पतासाजी की जा रही है। इसकी सूचना पुलिस को भी दी गई है।
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Wednesday, December 10, 2014

Kotagada Landmine blasting and murder of police

CAMPAIGN AGAINST FABRICATED CASES, (CAFC) ODISHA Contact: campaignodisha@gmail.com , Ph: 9437426647
              
         Kotagada Landmine blasting and murder of police

Mr. Junash Pradhan, Ex-Chairperson of Daringbadi Panchayat Sammitee, Kandhamal get acquitted from the case of Kotagada Landmine blasting and murder of police

Mr. Junash Pradhan , a renowned tribal leader and social worker of Kandhamal district, Ex-Chair Person of Daringbadi block, Member of district level peace committee,  Ex-member of Sub divisional Forest Right Committee (SDLC), who was in Balliguda Sub-jail since 9th January to 5th October,2012  by a joint collaborative conspiracy of police, vested interest politicians and businessmen and falsely charge sheeted in Kotagarh Landmine blasting incident of 3rd and 4th January,2012 as GR-5/12 & GR-6/12 U/s120-B/121-A/506/34 IPC r/w section 3 E.S. Act/4 P.D.P.P. Act;. 120(B)/121/121A/124A/307/324/326/302/34 IPC r/w section 3 E.S. Act/25/27 Arms Act/4 P.D.P.P. Act/16(1) (a)/16(1)/18(18-B/20/38 U.A.P. Act  has lastly got acquitted from ADJ Court, Phulbani  by Justice Mr. Rajendra kumar Tosh on 9th December,2014. It may be noted that against the fabricated and arbitrary arrest of Mr. Junash Pradhan three people’s organization were given a ‘Daringbadi Bandh’ call on 10th January, 2012.
Mr. Narendra Mohanty ,  Convener of Campaign Against Fabricated Cases (CAFC) & Indian Social Action Forum(INSAF), Mr. Balabhadra Mallik, President of Odisha Adivasi Adhikar Andolan, Mr. Chakradhar Mallik of Peace & Justice Forum, Kandhamal,   has welcome the Court Order and describe the order as victory of truth and justice.
        
 (Narendra Mohanty)
Convener,
Campaign Against Fabrication of False Cases (CAFC), Odisha, Bhubaneswar.     

16 newborn die in a week at Chhattisgarh hospital

16 newborn die in a week at Chhattisgarh hospital

  
Santosh Sahu with the body of his newborn grandson at Chhattisgarh Institute of Medical Sciences in Bilaspur on Tuesday. (Express photo)
Santosh Sahu with the body of his newborn grandson at Chhattisgarh Institute of Medical Sciences in Bilaspur on Tuesday. (Express photo)
By: Express News Service | Raipur | Posted: December 10, 2014 1:54 am
Mani Sahu’s first baby, born at Bilaspur’s Chhattisgarh Institute of Medical Sciences Saturday, did not survive even 72 hours. He was among 16 infants who died within days of birth in the last week at CIMS. While some had low birthweight, others died due to lack of medicare facilities.
However, while the number of babies admitted in the hospital continues to go up and the child ward gets crammed, the government does not have any plan to shift the infants to other hospitals.
Significantly, while doctors admitted to the lack of facilities, Chhattisgarh Health Minister Amar Agrawal defended the hospital. “What is the fault of doctors or CIMS? No private hospital admits such babies. Serious cases come only to government hospitals. If some deaths take place, how can you hold CIMS responsible?”
Bilaspur CMHO O P Saxena had a curious take. “People are becoming aware and are coming to hospitals in large numbers. It is the responsibility of women and child development department to ensure that pregnant women receive proper nourishment,” he said.
Doctors, however, said the hospital does not have sufficient facilities at its newborn care unit, and instead of doctors, interns look after patients.
If a baby develops ailments after birth, it needs to be kept in incubator and each machine should have only one baby. In CIMS, a machine accommodates up to four babies, raising infection risks.
A neonatal ICU is closed since it was set up years ago and ventilators have no compressors. “Medical Council of India rules say that interns will operate only under doctors’ supervision. Here they are running the hospital,” said a doctor.
Health Secretary Dr Alok Shukla admitted the “lack of capacity and shortage of doctors” but said the babies were extremely malnourished and doctors tried their best to save them. “I have formed a committee to review every case,” he said.
Dissatisfied with the government’s response, some parents created ruckus in the hospital Tuesday. “They (doctors) made me sign a blank paper yesterday. Today they said the baby is dead),” said Mani Sahu.
Over 30 babies are still admitted in CIMS. Their condition is deteriorating, the hospital is crowded but the government has not shifted them. “There are too many babies here, 40 in one unit. We don’t know what to do,” said a father.

Some states want Maoism to continue: CRPF chief

Some states want Maoism to continue: CRPF chief


Dilip-Trivedi
Outgoing CRPF director-general Dilip Trivedi on Thursday said some states had vested interests in letting Maoist violence continue.
NEW DELHI: Outgoing CRPF director-general Dilip Trivedi on Thursday made serious allegations of Maoism benefitting Naxal-affected states. Trivedi, who is retiring at the end of this month, said certain states had vested interest in letting Maoist violence continue as it helped them get massive central funds. He also said the government was not serious about regulating sale of explosives whose easy availability to Maoists had led to increasing deaths of force personnel.

In a free-wheeling conversation with journalists, the DG even blamed government policies and systemic problems for non-resolution of Jammu and Kashmir and northeast problems. Without talking about the Army, he even said there was no need for Armed Forces Special Powers Act (AFSPA) and that the simple Criminal Procedure Code (CrPC) had enough protection for forces.

He even hinted at various committees and studies conducted by the government for welfare of forces as waste of public money.