Monday, August 4, 2014

Cabinet approves changes in three labour laws


  • Cabinet approves changes in three labour laws

According to news reports, the Cabinet approved changes in three labour laws on July 30, 2014. These laws are: (a) the Factories Act, 1948, (b) the Apprentices Act, 1961, and (c) the Labour Laws (Exemption from Furnishing Returns and Maintaining Registers by Certain Establishments) Act, 1988.
Key proposed amendments include:
     Factories Act, 1948: Key amendments relate to: (a) increasing the overtime limit for workers, (b) improving safety of workers, (c) relaxing norms for women to work night shifts in certain industries, and (d) reducing the number of days that an
employee must work before becoming eligible for benefits such as leave without pay from 240 days to 90 days.
  •   Apprentices Act, 1961: The Act regulates the training of apprentices. Key amendments relate to: (a) including new trades under the purview of the Act, and (b) removing the clause that called for the imprisonment of employers who did not adhere to provisions of the Act.
  •   Labour Laws (Exemption from Furnishing Returns and Maintaining Registers by Certain Establishments) Act, 1988: Currently firms with up to 19 employees are covered under the Act. These firms can file a combined compliance report for up to 9 labour laws. Key amendments relate to: (a) exempting firms employing up to 40 workers from complying with certain labour regulations, and (b) allowing these firms to file a combined compliance report for up to 16 labour laws. 

Saturday, August 2, 2014

कांकेर कलेक्टर की कारस्तानी देखें


रात को दो बजे कारखाने मे डेटोनेटर बनाते पाँच मजदुरो कि मौत, अपराधिक लापरवाही के लिये हत्या का मुकदमा दर्ज़ किया जाये .

  • रात को दो बजे कारखाने मे डेटोनेटर बनाते पाँच मजदुरो कि मौत, अपराधिक लापरवाही के लिये हत्या का मुकदमा दर्ज़ किया जाये . 

रायपुर से 40 किलोमिटर आगे अभानपुर के पास उर्ला गॉव मे बारूद फेक्टरी मे डेटोनेटर बनाते हुये पाँच मजदुरो कि जान चली गई , विस्फोट इतना जबर्जस्त था कि 50 एकड मे फैले कारखाने का एक बड़ा हिस्सा मल्बे मे तब्दिल हो गया ,मजदुर  डेटोनेटर बनने के बाद उसे ड्रायर मे सुखा रहे थे, तभी पीटीएस सेक्सन मे बिस्फोट हुआ ,फेक्टरी मे बत्तिया बनती है ,जिसकी सप्लाई खदानो मे होती हैं ,

ये कारखाना भाजपा नेता नीना सिंह के पती व्ही के सिंह और उनके पुत्र विशाल सिह कि हैं , रात के दो बजे मरने वाले मजदुरो के नाम हैं, श्री कोमल सिंह ठाकुर  ,श्री पुनउराम यादव,श्री गणेश हरवंस,श्री रेख राम साहु, श्री माखन लाल निर्मलकर , हैं ,
अभी बहुत दिन नहीं हुये जब भिलाई स्टील प्लांट मे गैस रिसने से सात मजदुर मरे गए थे ,उस केस मे आज  तक एक भी व्यक्ति को जिम्मेदार मानकर सजा नहीं मिली और ना ही किसी को जिम्मेदार ही माना गया ,

विस्फोट कि ये घटना अपरधिक लापरवाही हैं , फेक्टरी मे  मजदुरो के बचाव के कोई साधन नहीं हैं ,उनके रसुखदार मालिको ने नियमो कि अवहेलना कि थी ,मलिक भाजपा कि नेता हैं ,रात को दो बजे फेक्टरी कैसे चल राही थी ,इसका कोई जबाब नहीं हैं ,जिस जगह बिस्फोटक का निर्माण होता हो उस कर्खाने मे बचाव के जबर्जस्त इंतज़ाम होने ही चाहिये थे ,लेकिन कारखने मे झमता से कही ज्यादा विस्फोटक जमा था ,कभी किसी अधिकारी कि नज़र नहीं गई कि रात भर फेक्टरी कैसे चल रही थी ,जितनी जिमेदारी फाक्टरी मालिको की है उतनी ही जिम्मेदारी उन अधिकरियॉ की भी जिनकी  मिली भगत के कारण ऐसे अवैध काम चल रहे थे,
घटना के वक़्त 500 फिट उंची लपटें जल रही थी, उस समय सात मजदूर डीटोनेटर फ्यूज़ तैयार कर रहे थे ,उनमेसे दो मजदूर जितेंड्रा निषद और टेसुरम निषाद चाय पीने बाहर चले गये थे ,की अचानक विस्फोट होने शुरू हो गये , चारो तरफ हाहाकर मच गया ,मजदूरो ने भागकर अपनी जन बचाई , 
विवादो से भरा रहा है नवभारत ग्रूप ऑफ कम्पनीज़ का ,इसके मालिक सत्ता के गलियारो मे खासा रसूख रखते हैं , इनकी पत्नी नीना सिंह भाजपा की बड़ी नेता हैं .इस कम्पनी का नवभारत कॉल फील्ड लिमिटेड विवाद मे जब आया ,जब 2012 मे कोल आवंटन मे गड़बड़ी मे इनका नाम आया था, राज्य सरकार ने मदनपुर नॉर्थ कोल ब्लॉक के लिये स्क्रीनिंग समिति ने इस कम्पनी को गलत तरीके से सिफारिश की थी, इस कम्पनी ने कोल ब्लॉक हासिल करने के लिये 75 प्रतिशत शेयर नागपुर की कम्पनी सोलर  एक्सप्लोसिव लिमिटेड को बेच दिया ,
चूंकि ये कारखाना भाजपा के नेता की है तो शाशन पूरी तरह मालिको का साथ दे रहा हैं ,मुख्यमंत्री रमन सिंह ओपचारिक रूप से जांच की घोषणा कर दी हैं , 
छत्तीसगढ मे रोज कहीं ना कहीं ऐसी दुर्घटनाए हो रही हैं , लेकिन कभी भी फेक्टरी के प्रशाशन या शासकीय अधिकारियो के खिलाफ के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई , हमारी मांग है की  कारखाने और शाशकीय अधिकारियो के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज़ होना चाहिये .



सब डरते है कठमुल्लो से , कोंग्रेस ,माकपा और अब भाजपा सब हमाम मे नंगे .

सब डरते है कठमुल्लो से , कोंग्रेस ,माकपा और अब भाजपा सब हमाम मे नंगे .
भाजपा सरकार ने तस्लिमा नसरीन का अस्थाई आवास का वीज़ा रद्द कर दिया , उसकी जगह  टूरिस्ट वीज़ा जारी किया गया हैं , आज तस्लिमा गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी मिली , अफसोस है की भरत जैसे देश मे एक आज़ाद खयाल लेखिका को  सम्मान तक नहीं दे सकी, दुनिया के बहुत से देश दी जॉ तस्लिमा को अपने देश मे रखने को तैयार भी दी , लेकिन उन्हे लगा की भतर मे बंगाली साहित्य के लिये माहोल समन हैं ,लेकिन हमारे देश मे भी उन्हे वो सम्मान नहीं मिला ,विचार विभिन्नता का तो सम्मान होना हो चाहिये ही, मेने उनकी लगभग सारी किताबें पढी हैं , द्विखंडिता भी , .
मुझे नहीं लगता की किसी को धर्म मे असहमती के लिये दण्डित किया जा सकता हैं , बंगला देश या कोई और इसलामिक देश का विरोध तो समझ आता है ,लेकिन भारत जैसे देश मे जहाँ धर्म की जबर्जस्त असहमती को भी हमेशा साहित्य मे प्रुमुखता से लिया गया है ,और तो और उसे ज्यादा सम्मान मिलता रहा है, 
लेकिन जब  सरकारे सिर्फ धर्म के चश्मे से किसी साहित्य को आंकेतो उसे किसी भी तराह न्यायोचित नहीं कहा जा सकता , सबसे बड़ी रुचिकर यही है की  कोंग्रेस ,माकपा और अब भाजपा सब हमाम मे नगे खडे हैं , 

आदिवासी युवती के साथ गेंगरेप के बाद हत्या का आरोप, बीजापुर के पोदमुर निवासी आटमी समबती की मौत की जांच की मांग

आदिवासी युवती के साथ गेंगरेप के बाद हत्या का आरोप, बीजापुर के पोदमुर निवासी आटमी समबती की मौत की जांच की मांग

बीजापुर के पोदमुर निवासी आदिवासी महिला आटमी  को अप्रेल के महीने मे नेमेड पुलिस सप्ताहिक बाजार से पकड़ के ले गई ,ऐसा कहा जा रहा है की उसे केम्प मे लेजाके उसके साथ सामूहिक अनचा र्किया गया ,बाद मे बेहोशी की हालत मे बीजापुर के अस्पताल मे भर्ती किया गया ,जहा उसकी मोत हो गई, स्थानिया ग्रामवासियो और अन्य संघटनो ने इसकी जांच की मांग की है ,उन्होंने कहा की मामले को दबाने के लिये लाश को दफन का र्दिया गया , 
पहले से ही बदनाम कल्लूरी को बस्तर रेंज का आईजी  पदस्थ कर दिया गया हैं , जिनपे बस्तर मे कई आदिवासियो के साथ अत्याचार और फर्जी मुठभेड़ का आरोप है ,और स्वामी अग्निवेश के साथ मारपीट करने के आरोप मे भी सीबीआई जांच चल रही हैं, सोनी सोरी के साथ अपमानजनक व्यबहार के आरोप भी लगे हैं ,ऐसे अधिकारी को तुरंत हटाया जाना चाहिये ताकि कोई जांच प्रभावित ना हो, 

Friday, August 1, 2014

क्या हम फासिस्ट राज्य की और नहीं नहीं जा रहे हैं , डाक्टर लारेन्स ब्रिट का अध्यन तो यही बताता हैं , चलो पढ़ने मे क्या हर्ज़ हैं

क्या हम फासिस्ट राज्य की और नहीं नहीं जा रहे हैं , डाक्टर लारेन्स ब्रिट का अध्यन तो यही बताता हैं , चलो पढ़ने मे क्या हर्ज़ हैं .

 हंस मे संजय सहाय ने इस अध्यन का विवरण दिया है , पढ़ा तो दो महीने पहले था ,आपने भी पढ़ा होगा ,लेकिन जिन मित्रो की नज़र से नहीं गुजरा उनके लिये ही सही ,  लॉरेन्स ब्रिट ने 2003  मे उन्होने अध्यन किया था ,जिसमे उन्होने कई फासिस्ट राज्यो जैसे मुसोलिनी ,हिटलर ,फ्रेंको ,सुहार्तो , और दूसरे लातिनी तानाशाही को बारीकी से देखा और 14 कॉमन बिन्दु तलाशे , ये 14 बिन्दु निम्न हैं .
१, राष्ट्रावाद का शशक्त प्रचार ,
२,मानवाधियकरो के प्रति धिक्कार [ शत्रु और राष्ट्रीय सुरक्षा का भय दिखा के लोगो को इस बात के लिये तैयार करना की वे खास परिस्थितियोमे मानवाधिकार को अनदेखा किया जा सकता हैं ,और इसी स्थिति मे शारीरिक प्रताड़ना से लेके हत्या तक को जायज माना जा सके ]
३, शत्रु को और बलि के बकरो को चिन्हित करना ,[ ताकि उनके नाम पे अपने समूहो को एकत्रित किया का सके और उन्हे उन्मादित किया जा सके ,ताकि वे राष्ट्राहित मे अल्पसंख्यको ,भिन्‍न नस्लो, उदारवादियो ,वामपंथियो और उग्रवादियो को मानवाधिकार से वंचित रखने मे समर्थन दें ]
४, सेना को जरूरत से ज्यादा तरजीह देना और उसका तुष्टिकरण करना ,
5 पुरुषवादी वर्चस्‍व
6, मास मीडिया को एन केन प्रकरण प्रभावित करना  और नियंत्रण मे रखना ,
7,  बुद्धजीवियो और संस्कृतिजीवियो पे नकेल कसना , 
8, सरकार और धार्मिकता मे घालमेल करना [ बहुसंख्यको के धर्म और धार्मिक आवंदर का का स्तेमाल करके जनमत को अपने पक्ष मे करते रहना ,
9, कार्पोरेट जगत को पूरी तरह प्रश्र्य देना ,[ कार्पोरेट ताकतें और उद्योगपति ब्यापारी ही फासिस्ट को सत्ता पा पहुचते हैं ,]
10,  श्रमिको की शक्ति को कुचलना ,
11, अपराध और दंड के प्रति उत्तेजना का माहोल बनाना .
12 पुलिस और सेना को असीमित दंडात्मक  अधिकार देना 
13, भयानक भाई भतीजावाद और भ्रष्टाचार 
14 चुनाव जितने के लिये हर प्रकार के हथकंडे सेमल करना .

 उपर के 14 बिन्दु पढ़ने से तो ऐसा ही लगता है की ये अध्यन हमारे देश मे किया गया हैं ,अब आपकी मर्जी है की इसका मतलब जो भी निकालर और सचेत रहे ,नहीं तोकहें की " गर्व से कहो हम फासिस्ट हैं 
'
9, 

गर्व से कहो हम फासिस्ट हैं


  • गर्व से कहो हम फासिस्ट हैं.

अभी आपको थोड़ा अटपटा लगरहा होगा ,लेकिन वो दिन बहुत दूर नहीं है जब सही मे ये लोग अपने आपको फासिस्ट कहने मे गर्व करेंगे और कहेंगे की हाँ हम फासिट है ,किसी को क्या प्रॉब्लम हैं . 
हंस के पिछले अंक मे संजय सहाय ने फासिस्ट नाम की व्याख्या की थी , आप भी देखें की कैसे एक अच्छा भला शब्द फासीवाद का प्रतीक कैसे बन गया . 
फासीज़ प्राचीन रोम के पहले इट्रास्क्न सभ्यता का चिन्ह था ,जिसे रोम मे दंडाधिकार के प्रतीक के रूप मे अपना लिया रोमन फासीज़ बर्च या या एल्म की लकड़ी  से बना पांच पांच फीट के डॅंडो से बना गठ्ठर होता था, जो समूह की शक्ति का प्रतीक था .गठ्ठर को लाल रंग के चमड़े के फीते से कसा जाता था  , और उपर एक कुल्हाड़ी / फरसे का फल बांध दिया जाता था .कुल्हाड़ी दंडाधिकारी के म्रत्युदंड या  जीवनदान  देने के अधिकार को इंगित करता था .फसिज़ के चिन्ह का उपयोग इटली मे भिन्‍न भिन्‍न राजनेतिक दल पहले भी करते थे .. अमेरिका, फ्रेंच , फ्रांस मे भी इसका इसी के लिये उपयोग होता रहा हैं ,
मुसोलीन ने भी इसका उपयोग फासिस्म के मूल रूप मे किया था , इसका चिन्ह देख सकते हैं .