Friday, October 28, 2016

बीजापुर की पुलिस प्रताड़ित महिलाओं ने अपनी व्यथा मीडिया के सामने रखी

छत्तीसगढ़ पीयूसीएल की आज पत्रकार वार्ता में बीजापुर की पुलिस प्रताड़ित महिलाओं ने अपनी व्यथा मीडिया के सामने रखी.


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1. ग्राम कोडेनार दिनांक 21.5.2016
मनोज हपका और उसकी पत्नी ताती पाण्डे को शाम को पुलिस और कुछ आत्मसमर्पित नक्सली गाँव मे आये और सब के सामने घर से पकड़ कर ले गये। जब घरवालों ने पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्हें आत्मसमर्पण के लिये ले जा रहे हैं। उन दोनों के हाथ पीछे रस्सी से बाँधे गये थे और उनसे संबंधित सारा सामान भी परिवार वालों को लाने के लिये कहा गया। दूसरे दिन जब परिवार के लोग थाने में जानकारी लेने पहुँचे तो उन्हें बताया गया कि इस दम्पति को छः लाख की ईनामी नक्सली थी इसीलिये उन्हें मार दिया गया जब कि वे पिछले पाँच साल से इसी गाँव से सामान्य नागरिक की तरह रहे थे।
2. ग्राम पालनार दिनांक 5.7.2016
घटना दिनांक की सुबह सीतू हेमला अपने परिवार के साथ अपने खेत में हल चला रहा था, जब अचानक जंगलों में से भारी संख्या में सुरक्षा बल के जवान आये और उसे घसीटते हुए जंगल ले गये। जब उसके परिजन उसके पीछे आना चाहते थे, तो उनको बुरी तरह से पूरे गाँव के समक्ष पीटा गया। इसके पश्चात्  उसकी माँ अपनी बेटियों को लेकर चेरपाल और गंगालूर पुलिस के पास गई पर वे कोई मदद नहीं कर पाये। उसी शाम सीतू को जंगल के मध्य पेड़ों से बाँध कर उसके हाथों में कीले ठोक दी गई और उसे मार दिया गया। जब अगले दिन उसके परिजनों ने उसकी लाश देखी तो उसपर कई प्रकार के प्रताड़ना के निशान थे जबकि वह पूर्ण रूप से निर्दोष था।
इस घटना में मारे गये सीतू की माँ सुकली हेमला उपस्थित हैं।

3. ग्राम कोरचोली दिनांक 25.11.2015
दिनांक 24.11.2015 को ग्राम ईतावर का सुक्कू कुंजाम अपने भाई सोमा कुंजाम के साथ खेत में धान उठा रहा था जब गाँव में पुलिस आई। पुलिस द्वारा प्रताड़ना के भय से अन्य पुरुषों के साथ सुक्कू भी जंगलों मे भाग गया। अगले दिन वह पास के गाँव कोरचोली में अपने रिश्तेदारों के घर खाना खा रहा था, कि पुलिस का गश्त वहाँ भी पहुँच गया। उसी घर से थोड़ी दूर पर जब वह गाँव के दो अन्य युवकों के साथ जा रहा था, पुलिस ने उन पर बिना किसी कारण या किसी घोषणा के गोलियाँ बरसा दी जिस कारण सुक्कू की मौत हो गई और उनके साथी के पाँव में गोली लग गई। इस घटना के कोरचोली में कई चश्मदीद गवाह है।
4. ग्राम अंड्री दिनांक 16-19 फरवरी, 2016
दिनांक 16.02.16 को गंगा कोहड़ामी सहित दो अन्य लड़के जंगल में सियाड़ी पत्ता तोड़ रहे थे जब वहाँ छिपे हुए पुलिस के जवानों ने उन पर गोलियाँ चलानी शूरु कर दी। अन्य दोनों युवक वहाँ से भागने में समर्थ हुए पर गंगा गोलियों से घायल होकर जंगल के ही गड्ढे में गिर गया, और उसकी वहीं मौत हो गई। दो दिनों बाद गाँव वालों को उसकी लाश वहीं मिली। तीसरे दिन पुलिस फिर गाँव आई और लगभग 8-9 साल के बालक सोढी सन्नू, जो उस समय टमाटर की खेती कर रहा था – उसे गोलियों से मार दिया। वह बालक कहाँ मरा, उसकी लाश कहाँ है, उसके परिजनों को आज तक नही पता चला, बीजापुर पुलिस ने उनको थाने के अंदर आने भी नहीं आने दिया।
सोढी सन्नू (बालक) के पिता सोढी हुर्रा आज उपस्थित हैं।

5. ग्राम तोड़का दिनांक 6.9.2016
बरसात के महीने में सुरक्षा बल ग्राम तोड़का आये, जिन्हे देख कर समस्त गाँव वाले जंगलों मे भाग गये। महिलाओ ने देखा कि फोर्स के लोग तीन अन्य महिलाओं के साथ लेकर आ रहे हैं, हमें लगा कि पुलिस के लोग हमारे साथ भी अनाचार कर सकते हैं, यह सोच कर हम लोग भी गाँव छोड़कर भाग गये। शाम के समय  फोर्स के वहाँ से जाने बाद हम सब वापस आये और हमने देखा कि पाँच घरों को सुरक्षा बलों ने लूटा था, जिनमें से चार घरों को पूरी तरह से तोड़ा भी गया था, उनके सारे बर्तन भी तोड़ दिये थे, उनके धान के बोरों को भी जमीन पर फेंक दिये थे। उन दिनों बहुत बारिश हो रही थी  जिस कारण बिना छत के कच्चे घरों मे भी रहना संभव नही था। धान के अभाव मे और बिना बर्तनों के इन परिवारों को रहने में बहुत कठिनाई हुई। जो साम्न फोर्स ने नष्ट नहीं किया, वह बारिश में भीगकर खराब हो गया।

इस गाँव से बुधरी मडियम और ताती मंगी, जिन दोनों के घर तोड़े गये थे, आज उपस्थित हैं।

6. ग्राम पेद्दा कोरमा दिनांक 22.10.2016
दिनांक 21.10.2016 को मंगू कोड़मे अन्य गाँववालों के साथ जंगल में बंदर भगाने और बाँस काटने गया था। बंदर को देखकर उसके पीछे मंगू पेड़ पर चढ़ गया, और उसके अन्य साथी चिल्ला चिल्ला कर बंदर को डराने की कोशिश कर रहे थे। तभी आवाज सुनकर वहाँ अचानक पुलिस वाले आ गये जिन्हें देखकर बाकी गाँववाले भाग गये, परंतु मंगु पेड़ से उतर नहीं सका और पुलिस द्वारा पकड़ं गया।  पुलिस उसे एक पूरा दिन गाँव गाँव घुमाती रही, उसके साथ बहुत मारपीट की, और फिर दिनांक 22.10.2016 को उसे गोलियों से मार दिया गया।
मृतक मंगू कोड़मे के परिवार से उसकी भाभियाँ सुक्की कोड़मे और शान्ति कोड़मे आज उपस्थित हैं।
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गाँव गाँव हत्याचार, हर घर पीड़ित बीजापुर में हत्याओं और अत्याचार का दौर लगातार जारी. -pucl chhattidgarh

           लोकस्वातंत्रय संगठन
            पीयूसीएल छत्तीसगढ़

               प्रेस क्लब रायपुर दिनांक  28.10.2016



               पत्रकार वार्ता में बीजापुर के विभिन्न गांव से आई पीड़ित महिलाओं ने अपने साथ  हुई  पुलिस प्रताडना की सिलसिले वार चर्चा की
प्रेस विज्ञप्ति संलग्न है .
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गाँव गाँव हत्याचार, हर घर पीड़ित
बीजापुर में हत्याओं और अत्याचार का दौर लगातार जारी.
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जहाँ एक तरफ सुरक्षा बल बस्तर में तथाकथित नक्सलियों को मारे जाने की नित नई कहानियाँ सुना कर जश्न मना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजापुर के पीडित आदिवासी इन हत्याओं की सत्यता को चुनौती देते हुए यह कहना चाहते हैं कि ज्यादातर मुठभेड़ फर्जी और निरपराध आदिवासियों के खिलाफ एक पक्षीय प्रताड़ना है। हमने उन सब प्रक्रियाओ से गुजरे है जो एक स्वतंत्र और लोकताँत्रिक देश में नागरिक को गुज़रना चाहिये । हम सब लोग हर घटना के बाद पुलिस थाने गये, प्रशासीय अधिकारियों के पास गये, उच्च न्यायालय और स्रर्वोच्च न्यायालय तक अपनी गुहार लगाई। लेकिन दुर्भाग्य है कि हमारी कोई सुनने वाला नहीं है।
 हम सभी पीडित परिवार छत्तीसगढ़ के उच्च न्यायालय अपनी याचिका दायर करने आये है और हमे लगा कि लोकतंत्र के सबसे मजबूत स्तम्भ मीडिया के समक्ष अपनी व्यथा कहने के लिये उपस्थित हैं।
ज्यादातर प्रकरणों में एक सी कहानी दोहराई जा रही है, कि हमारे गाँव में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल गश्त पर आते हैं और उन्हें देख कर पुराने अनुभव के आधार पर गाँव के पुरुष गाँव छोड़कर भाग जाते हैं। जो बचे रहते हैं उन्हें घरों से खींच कर पकड़ कर ले जाते है और जंगलो में जा कर हत्या कर दी जाती है। दो तीन दिन बाद जब उनकी जानकारी हमें मिलती है तो पुलिस थाने में उन्हें नक्सली मानकर मारा गया बताया जाता है। पुलिस गाँव में शेष बची महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ मारपीट, अपमानजनक व्यवहार, लूटमार और घरों की तोड़फोड़ की घडनाएँ आम हो गई हैं।
जो महिलाँयें इन सब का विरोध कर रही हैं उनमे से कुछ के साथ पुलिस ने वीभत्स तरीके से बलात्कार  किये और बाद में उनकी हत्या कर दी। छोटे बच्चो, युवाओं और महिलाओं की हत्या आमतौर पर की जा रही है।
इन हत्याओं और प्रताड़ना के बाद हमने बड़ी कठिनाई से एक दो दिन पैदल चल कर हम थाने पहुँचते हैं तो थाने में हमारी सुनने वाला कोई नहीं है। थाने से हमको धुतकार कर भगा देते हैं।
 हमारे क्षेत्र (बीजापुर) में दो तिहाई लोग अशिक्षित और गरीबी रेखा से जीने वाले, स्वास्थ्य सेवा और प्राथमिक सुविधाओं से वंचित है। वीजापुर जिले में 80 प्रतिशत आदीवासी निवास करते हैं।
हम एक लोकतांत्रिक देश में एक स्वतंत्र नागरिक समूह हैं। लेकिन सरकार और उनके प्रतिनिधि सुरक्षा बल हमारे गाँव में आक्रमणकारी की तरह पेश होते हैं मानो कि हम एक दुश्मन देश के नागरिक हैं। ऐसे में हमारा संविधान, कानून, लोकताँत्रिक हक, और स्वतंत्र नागरिक होने के सारे मूल अधिकार से हम वंचित हैं। संविधान द्वारा दिया गया गरिमा से जीने का हक भी हमारा छीन लिया गया है। इन सब परिस्थितियों मे हम यह कैसे भरोसा करे कि हम इस स्वतंत्र देश के स्वतंत्र नागरिक हैं।
संविधान की सुरक्षा करने वाली सरकार ने अभी तक आदिवासियों के विनाश के कई गैर संवैधानिक तरीके अपनाये  जिनमें सलवा जुडूम, एस पी ओ, सामाजिक एकता मंच, आत्म समर्पण के नाम से बड़ी संख्या में आदिवासी नौजवानों को माओवादी के रूप में चिन्हांकित करना, आत्मसमर्पित नक्सलियों को फोर्स मे भर्ती कर के उनका गाँव मे आतंक के लिये उपयोग, और अब अग्नि के नाम पर पूरे समुदाय की प्रताड़ना की जा रही है।
आत्मसमर्पित नक्सली जो कल तक हमारे गाँव में हत्याएँ और आगज़नी किया करते थे, अब शासन ने उन्हें वैधानिक रूप से हथियार दे कर उन्हीं गाँव में प्रताड़ना और हत्याओं का काम सौंप दिया है। जो कि अपने आप में गैर कानूनी है।

बीजापुर तहसील से आये हम पुलिस से प्रताडित लोग निम्न गाँव से उपस्थित हैं – सुनीता पोटाम और तुलसी पोटाम (ग्राम कोरचोली), सुकली हेमला (ग्राम पालनार), हुर्रा सोड़ी (ग्राम अंड्री), सुक्की कोड़मे और शांति कोड़मे (ग्राम पेद्दा कोरमा), बुधरी मोडियाम और मंगली ताती (ग्राम तोड़का).

छत्तीसगढ़ के माननीय उच्च न्यायालय में हमने निम्म घटनाये प्रस्तुत की हैं –
1. ग्राम कोडेनार दिनांक 21.5.2016
मनोज हपका और उसकी पत्नी ताती पाण्डे को शाम को पुलिस और कुछ आत्मसमर्पित नक्सली गाँव मे आये और सब के सामने घर से पकड़ कर ले गये। जब घरवालों ने पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्हें आत्मसमर्पण के लिये ले जा रहे हैं। उन दोनों के हाथ पीछे रस्सी से बाँधे गये थे और उनसे संबंधित सारा सामान भी परिवार वालों को लाने के लिये कहा गया। दूसरे दिन जब परिवार के लोग थाने में जानकारी लेने पहुँचे तो उन्हें बताया गया कि इस दम्पति को छः लाख की ईनामी नक्सली थी इसीलिये उन्हें मार दिया गया जब कि वे पिछले पाँच साल से इसी गाँव से सामान्य नागरिक की तरह रहे थे।
2. ग्राम पालनार दिनांक 5.7.2016
घटना दिनांक की सुबह सीतू हेमला अपने परिवार के साथ अपने खेत में हल चला रहा था, जब अचानक जंगलों में से भारी संख्या में सुरक्षा बल के जवान आये और उसे घसीटते हुए जंगल ले गये। जब उसके परिजन उसके पीछे आना चाहते थे, तो उनको बुरी तरह से पूरे गाँव के समक्ष पीटा गया। इसके पश्चात्  उसकी माँ अपनी बेटियों को लेकर चेरपाल और गंगालूर पुलिस के पास गई पर वे कोई मदद नहीं कर पाये। उसी शाम सीतू को जंगल के मध्य पेड़ों से बाँध कर उसके हाथों में कीले ठोक दी गई और उसे मार दिया गया। जब अगले दिन उसके परिजनों ने उसकी लाश देखी तो उसपर कई प्रकार के प्रताड़ना के निशान थे जबकि वह पूर्ण रूप से निर्दोष था।
इस घटना में मारे गये सीतू की माँ सुकली हेमला उपस्थित हैं।

3. ग्राम कोरचोली दिनांक 25.11.2015
दिनांक 24.11.2015 को ग्राम ईतावर का सुक्कू कुंजाम अपने भाई सोमा कुंजाम के साथ खेत में धान उठा रहा था जब गाँव में पुलिस आई। पुलिस द्वारा प्रताड़ना के भय से अन्य पुरुषों के साथ सुक्कू भी जंगलों मे भाग गया। अगले दिन वह पास के गाँव कोरचोली में अपने रिश्तेदारों के घर खाना खा रहा था, कि पुलिस का गश्त वहाँ भी पहुँच गया। उसी घर से थोड़ी दूर पर जब वह गाँव के दो अन्य युवकों के साथ जा रहा था, पुलिस ने उन पर बिना किसी कारण या किसी घोषणा के गोलियाँ बरसा दी जिस कारण सुक्कू की मौत हो गई और उनके साथी के पाँव में गोली लग गई। इस घटना के कोरचोली में कई चश्मदीद गवाह है।
4. ग्राम अंड्री दिनांक 16-19 फरवरी, 2016
दिनांक 16.02.16 को गंगा कोहड़ामी सहित दो अन्य लड़के जंगल में सियाड़ी पत्ता तोड़ रहे थे जब वहाँ छिपे हुए पुलिस के जवानों ने उन पर गोलियाँ चलानी शूरु कर दी। अन्य दोनों युवक वहाँ से भागने में समर्थ हुए पर गंगा गोलियों से घायल होकर जंगल के ही गड्ढे में गिर गया, और उसकी वहीं मौत हो गई। दो दिनों बाद गाँव वालों को उसकी लाश वहीं मिली। तीसरे दिन पुलिस फिर गाँव आई और लगभग 8-9 साल के बालक सोढी सन्नू, जो उस समय टमाटर की खेती कर रहा था – उसे गोलियों से मार दिया। वह बालक कहाँ मरा, उसकी लाश कहाँ है, उसके परिजनों को आज तक नही पता चला, बीजापुर पुलिस ने उनको थाने के अंदर आने भी नहीं आने दिया।
सोढी सन्नू (बालक) के पिता सोढी हुर्रा आज उपस्थित हैं।

5. ग्राम तोड़का दिनांक 6.9.2016
बरसात के महीने में सुरक्षा बल ग्राम तोड़का आये, जिन्हे देख कर समस्त गाँव वाले जंगलों मे भाग गये। महिलाओ ने देखा कि फोर्स के लोग तीन अन्य महिलाओं के साथ लेकर आ रहे हैं, हमें लगा कि पुलिस के लोग हमारे साथ भी अनाचार कर सकते हैं, यह सोच कर हम लोग भी गाँव छोड़कर भाग गये। शाम के समय  फोर्स के वहाँ से जाने बाद हम सब वापस आये और हमने देखा कि पाँच घरों को सुरक्षा बलों ने लूटा था, जिनमें से चार घरों को पूरी तरह से तोड़ा भी गया था, उनके सारे बर्तन भी तोड़ दिये थे, उनके धान के बोरों को भी जमीन पर फेंक दिये थे। उन दिनों बहुत बारिश हो रही थी  जिस कारण बिना छत के कच्चे घरों मे भी रहना संभव नही था। धान के अभाव मे और बिना बर्तनों के इन परिवारों को रहने में बहुत कठिनाई हुई। जो साम्न फोर्स ने नष्ट नहीं किया, वह बारिश में भीगकर खराब हो गया।

इस गाँव से बुधरी मडियम और ताती मंगी, जिन दोनों के घर तोड़े गये थे, आज उपस्थित हैं।

6. ग्राम पेद्दा कोरमा दिनांक 22.10.2016
दिनांक 21.10.2016 को मंगू कोड़मे अन्य गाँववालों के साथ जंगल में बंदर भगाने और बाँस काटने गया था। बंदर को देखकर उसके पीछे मंगू पेड़ पर चढ़ गया, और उसके अन्य साथी चिल्ला चिल्ला कर बंदर को डराने की कोशिश कर रहे थे। तभी आवाज सुनकर वहाँ अचानक पुलिस वाले आ गये जिन्हें देखकर बाकी गाँववाले भाग गये, परंतु मंगु पेड़ से उतर नहीं सका और पुलिस द्वारा पकड़ं गया।  पुलिस उसे एक पूरा दिन गाँव गाँव घुमाती रही, उसके साथ बहुत मारपीट की, और फिर दिनांक 22.10.2016 को उसे गोलियों से मार दिया गया।
मृतक मंगू कोड़मे के परिवार से उसकी भाभियाँ सुक्की कोड़मे और शान्ति कोड़मे आज उपस्थित हैं।

हम सरकार से माँग करते है कि
1. नक्सली मुठभेड़ के नाम पर की गई सभी हत्याओं की स्वतंत्र एजंसी द्वारा जाँच कराई जाये, और घटनाओं के लिये प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जिम्मेदार व्यक्तियों पर आपराधिक मुकद्दमें दर्ज कर उन्हें दंडित किया जाये।
2. बस्तर में हो रही हत्याओं के लिये पुलिस महानिरीक्षक एस आर पी कल्लूरी को जिम्मेदार मान कर उनके विरुद्ध आपराधिक मुकद्दमा दर्ज किया जाये और उन्हें दंडित किया जाय।
3. आत्मसमर्पित नक्सलियों का प्रयोग सैनिक के रूप में नहीं कर उन्हें दी जाने वाली अन्य सुविधायें दी जायें।

विनीत

डा. लाखन सिंह,
अघ्यक्ष छत्तीसगढ़ पीयूसीएल
फो – 7773060946
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सुधा भारद्वाज, एडवोकेट
महासचिव, छत्तीसगढ़ पीयूसीएल
फो -- 9926603877

Thursday, October 27, 2016

कल्लूरी हटाओ मार्च राजभवन पहुँचा .-कैच न्यूज

कल्लूरी हटाओ मार्च राजभवन पहुँचा .


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राजकुमार सोनी
@CatchHindi | 28 October 2016, 3:07 IST

बस्तर आईजी शिवराम कल्लूरी कहते रहे हैं कि उनके खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता, वकील, पत्रकार और माओवादी समर्थक एक सोची-समझी साज़िश के तहत मुहिम चलाते हैं.मगर ताड़मेटला आगजनी कांड में सीबीआई की रिपोर्ट के बाद छोटे-बड़े राजनीतिक दल और आदिवासी समाज ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. बस्तर में कल्लूरी की बर्खास्तगी की मांग को लेकर जो मुहिम चल रही है, वह देर-सबेर रमन सरकार की मुसीबत बढ़ सकती है.

बस्तर आईजी शिवराम प्रसाद कल्लूरी पर कार्रवाई की मांग राजभवन तक पहुंच गई है. गुरूवार को बस्तर बचाओ संघर्ष समिति ने राजभवन तक मार्च निकालकर उन्हें हटाने की मांग की.

इस मार्च में शामिल कृषि वैज्ञानिक संकेत ठाकुर ने कहा कि बस्तर तीन दशकों से अशांत है. आदिवासियों की जीवनशैली को बहाल करने के लिए त्रिपक्षीय शांति वार्ता शुरू करने की बात की जाती हैं, लेकिन सरकार माओवादियों और स्थानीय आदिवासी सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं से बातचीत के लिए तैयार नहीं है.

आदिवासी नेता सोनी सोरी ने कहा कि कल्लूरी ने आज तक किसी माओवादी को ढ़ेर नहीं किया और न ही किसी बड़े माओवादी लीडर को पकड़ सके. बस्तर में आज भी पापाराव, रमन्ना जैसे बड़े माओवादी लीडर सक्रिय हैं लेकिन कल्लूरी और उनकी पुलिस सिर्फ़ भोले-भाले आदिवासियों को ही अपना शिकार बनाती रही है.

सोनी ने आरोप लगाया कि कल्लूरी ने पहले सामाजिक एकता मंच के नाम से गुंडा वाहिनी खोल रखी थी और अब इस गुंडा विंग का नाम 'अग्नि' कर दिया गया है. इस संगठन के लोग जिसे माओवादी मान लेते हैं, कल्लूरी उनकी हत्या करवा देते हैं. सोनी ने कहा है कि वे पूरे बस्तर में पदयात्रा करके कल्लूरी पर कार्रवाई के लिए सरकार पर दबाव बनाएंगी. जल्द ही, राजधानी में भी रैली निकालकर छत्तीसगढ़ बंद किया जाएगा.

कल्लूरी भस्मासुर!

बस्तर में सोनी सोरी की तिरंगा यात्रा के दौरान दूरी बनाकर चलने वाले सर्व आदिवासी समाज ने भी कल्लूरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. संगठन का आरोप है कि कल्लूरी की वजह से बस्तर में तानाशाही हावी हो गई है. सरकार ने आईजी को इतनी छूट दे रखी है कि बस्तर में गृह युद्ध के हालात बन गए हैं. फोर्स भी बगावत कर सकती है.

सर्व आदिवासी समाज से जुड़े पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम और पूर्व सांसद सोहन पोटाई ने आरोप लगाया कि कल्लूरी किसी संविधान को नहीं मानते. उनका अपना निजी कानून है जिसे वे जेब में रखकर चलते हैं. पूर्व मंत्री और आदिवासी नेता अरविंद नेताम ने कहा कि सरकार ने एक भस्मासुर पैदा कर दिया है. गरीब-आदिवासियों की झोपडिय़ों में आग लगाने वाला यह भस्मासुर जिस दिन सरकार के किले पर आग लगाएगा, उस दिन बहुत देर हो चुकी होगी.

बस्तर पुलिस का एक और झूठ

बस्तर के बुरगुम गांव में दो छात्रों की हत्या के बाद बस्तर के पुलिस अधीक्षक आरएन दास ने दावा किया था कि उनकी फोर्स ने माओवादियों को मारा है. मगर गुरूवार को बिलासपुर के उच्च न्यायालय में सरकार अपने बयान से पलट गई. सरकार ने कहा कि बुरगुम गांव में छात्रों की मौत अज्ञात कारणों से हुई है और उन्हें मारने वाले भी अज्ञात हैं.

बयान बदलने के बाद प्रदेश कांग्रेस ने फिर हमला बोला है. प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार माओवादी उन्मूलन के नाम फर्जी कहानियां ही गढ़ रही है और कल्लूरी उन फर्जी कहानियों के मास्टर हैं. बच्चों की मौत के मामले में कल्लूरी ने भी कहा था कि उनके जवानों ने माओवादियों को ही ढेर किया है लेकिन अब मुकर रहे हैं.

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बुरगुम मुठभेड़: कोर्ट में पलटी सरकार -सीजी खबर

बुरगुम मुठभेड़: कोर्ट में पलटी सरकार



Thursday, October 27, 2016

सीजी खबर

बिलासपुर | संवाददाता: बुरगुम मुठभेड़ पर सरकार हाईकोर्ट में पलट गई. सरकार ने कहा कि बस्तर के बुरगुम में जो दो आदिवासी युवक मारे गये थे, उनकी हत्या अज्ञात लोगोंं ने की थी. इस मामले में मारे गये नाबालिग युवकों के वकील सतीशचंद्र वर्मा ने कहा कि पुलिस इससे पहले लगातार यह दावा करती रही है कि उसने 24 सितंबर को बुरगुम में माओवादियों के साथ मुठभेड़ किया था और दोनों लोग उसी मुठभेड़ में मारे गये थे. पुलिस ने इस मुठभेड़ में शामिल सुरक्षाबल के जवानों को 1 लाख रुपये का इनाम भी दिया था.

आज हाईकोर्ट इस तथ्य के सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने एक बयान जारी करते हुये कहा कि घटना 23 और 24 सितंबर की दरमियानी रात घटी थी जब शोक संदेश देने दोनों बच्चे अपने रिश्तेदार के घर बुरगुम गए हुए थे. रिश्तेदारों का बयान है कि पुलिस देर रात दोनों को घर से पकड़कर ले गई थी उसके बाद उन्होंने गोलियां चलने की आवाज सुनी थी और उसके बाद उन दोनों की लाश मिली थी.

सोनकू राम पिता पायकू की उम्र 16 साल और बिजलू राम कश्यप पिता नड़गीराम की उम्र 17 साल थी, जो बारसूर थाना क्षेत्र के भटपाल ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम गड़दा के निवासी थे. दोनों एक साल पहले तक हितामेटा बारसूर के पोटाकेबिन में रहकर कक्षा 8वीं में पढ़ाई कर रहे थे.

इस साल घरेलू काम में व्यस्तता की वजह से स्कूल में दाखिला नहीं लिया था.

घटना के अगले ही दिन बस्तर एसपी आरएन दास ने बकायदा एक पत्रकारवार्ता में दो नक्सलियों के मारे जाने का दावा किया था. पुलिस के अनुसार उन्हें नक्सली समूह के बारे में सूचना मिली थी, उसके बाद उन्होंने एक पुलिस दल रवाना किया था. उन्होंने मुठभेड़ और जवाबी गोलीबारी की भी बात कही थी.

आरएन दास के अनुसार बच्चों के पास से 12 बोर की बंदूक और रायफल, एक्सप्लोसिव और डेटोनेटर बरामद किया गया था.

इस मामले को सबसे पहले कांग्रेस विधायक देवती कर्मा ने ही 26 सितंबर को उठाया था और इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए इसकी जांच की मांग की थी. इसके बाद कांग्रेस का एक जांच दल भी घटना स्थल तक गया था और जांच रिपोर्ट में भी देवती कर्मा के आरोपों की पुष्टि हुई थी. लेकिन बाद में पुलिस ने बच्चों के परिजनों पर दबाव बनाना शुरु कर दिया था कि वे मामला वापस लें. उल्टे देवती कर्मा पर युवकों के परिजनों के अपहरण का मामला बना दिया था.
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Wednesday, October 26, 2016

कुंजाम की पत्रवार्ता में हुड़दंग, पुलिस की मौजूदगी में कुर्सी-टेबल तोड़ डाले



कुंजाम की पत्रवार्ता में हुड़दंग, पुलिस की मौजूदगी में कुर्सी-टेबल तोड़ डाले


(पत्रिका )

जगदलपुर. आईजी एसआरपी कल्लूरी के इशारे पर बस्तर में पुलिस के सुनियोजित विद्रोह की खिलाफत करने पहुंचे मनीष कुंजाम की पत्रवार्ता हंगामे के बाद तोडफ़ोड़ में बदल गई।

कम्युनिस्ट कार्यालय में बुधवार दोपहर को पत्रवार्ता के बीच ही कुछ लोग पहुंचे। पहले तो उन्होंने मनीष को सोशल मीडिया पर मां दुर्गा पर अभद्र टिप्पणी मामले में माफी मांगने कहा। कुंजाम के यह कहने कि टिप्पणी मैंने नहीं की थी मैनें तो सिर्फ फारवर्ड किया है पर युवक भड़क गए।

आधे घंटे तक उन्होंने जमकर हंगामा किया इसके बाद भी बात नहीं बनते देख तैश में आकर भाकपा कार्यालय में रखी कुर्सी- टेबल को तोड़ दिया। आधे घंटे तक चले हंगामे के बीच बोधघाट थाने के जवान वहां पहुंचे।

जवानों ने बीच बचाव करते मनीष कुंजाम व उनके दो अन्य सहयोगियों को भीतर बने एक कमरे तक पहुंचाया। इसके बाद नारेबाजी करते युवाओं को धकियाते हुए कार्यालय से बाहर निकाला। कार्यालय के बाहर भी मनीष कुंजाम मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे।

इस बीच वहां एसपी आरएन दाश व सीएसपी मोनिका ठाकुर भी पहुंची। हंगामे से हतप्रभ मनीष कुं जाम ने कहा कि यह अग्रि व आरएसएस के इशारे पर हुआ हमला है। किसी तरह की रिपोर्ट लिखे जाने पर उन्होंने कहा कि सारी घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई है। पुलिस खुद ही सक्षम है। इधर सीएसपी ने इस घटना पर उच्चाधिकारियों से चर्चा करने की बात कही है।

गर्मागरम हुई बहस
सोशल मीडिया पर टिप्पणी की बात पर मनीष ने कहा कि गलती से फारवर्ड हो गया। सर्व आदिवासी समाज के आप नेता हैं पर उन्होंने कहा कि मैं उनके साथ उठता- बैठता ही नहीं। जेएनयू के कन्हैया व आतंकी अफजल गुरु को नहीं जानता हूं। मां दंतेश्वरी को मानता हूं पहले भी कुछ विद्वानों ने मां दुर्गा के बारे में अपने मत प्रकट किए हैं तो मेरा ही विरोध क्यों? मेरे माफी मंागने से सच्चाई खत्म नहीं होगी। इस बहसबाजी के बीच ही उनका टेबल पलट दिया गया। कुर्सियां फेंकी जाने लगी।

इसलिए पहुंचे थे
बस्तर संभाग में दो दिनों पहले वर्दीधारी आरक्षकों ने मनीष कुंजाम सहित सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वतंत्र पत्रकारों का पुतला दहन किया था। इस पर विरोध जताने कम्युनिस्ट नेता पत्रवार्ता लेने पहुंचे थे।

कल्लूरी के इशारे पर सुरक्षा घटाई
हंगामे व तोडफ़ोड़ के दौरान मनीष कुंंजाम के अंगरक्षक बेबस साबित हुए। चर्चा में मनीष कुंजाम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के कहने पर उन्हें सुरक्षा के लिए पहले एक- चार के गार्ड दिए गए थे। बाद में एसआरपी कल्लूरी के इशारे पर इनकी संख्या घटाकर दो कर दी गई। इन अंगरक्षकों के हथियार भी रखवा लिए गए हैं। इस घटना को लेकर मुझे सदमा लगा है, सोच विचार कर रिपोर्ट दर्ज कराएंगे।

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ताड़मेटला कांड: डीजीपी दिल्ली तलब, दबाव में आठ एसपीओ सस्पेंड, क्या कल्लूरी भी जाएंगे



ताड़मेटला कांड: डीजीपी दिल्ली तलब, दबाव में आठ एसपीओ सस्पेंड, क्या कल्लूरी भी जाएंगे


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राजकुमार सोनी
@CatchHindi | 27 October 2016,

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता मनीष कुंजाम की प्रेस कांफ्रेंस में तोडफ़ोड़ करने वाला शख़्स एक तस्वीर में आईजी शिवराम कल्लूरी के साथ फोटो में दिखा छत्तीसगढ़ सरकार ने पुतला जलाने की घटना पर जांच की सिफ़ारिश की, ताड़मेटला समेत तीन गांवों में हुए कांड के लिए आठ स्पेशल पुलिस अधिकारी को निलंबित करने का आदेश दिया क्या यह कल्लूरी पर दबाव बढ़ने के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं और आदिवासियों नेताओं पर यह हमले की शुरुआत है?

बस्तर के तीन गांव ताड़मेटला, तिम्मापुरम और मोरपल्ली में आगजनी, हत्या और बलात्कार छत्तीसगढ़ सरकार के गले की फांस बनती दिख रही है. 21 अक्टूबर को इस कांड की सीबीआई जांच रिपोर्ट आने के बाद राज्य के डीजीपी एएन उपाध्याय और नक्सल ऑपरेशंस के डीजी डीएम अवस्थी को दिल्ली तलब किया गया.

वापस लौटने पर डीजीपी ने आठ विशेष पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड करने का आदेश किया है. बावजूद इसके आग ठंडी नहीं हो रही है.

विशेष पुलिस अधिकारियों के नाम वंजम देवा, तेलम कोसा, मडकम भीमा, तेलम नंदा, कीचे नंदा, बर्से रामलाल, सोडी दशरू हैं. राज्य पुलिस ने दोनों दंतेवाड़ा और सुकमा ज़िले के एसपी को कार्रवाई के लिए चिट्ठी भेज दी है.

मगर सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार कहते हैं कि जब सीबीआई की रिपोर्ट में कुल 34 एसपीओ के नाम हैं, तो फिर कार्रवाई का आदेश सिर्फ़ आठ पर क्यों हुआ? वैसे भी ये एसपीओ हैं. कार्रवाई इन्हें हुक्म देने वाले इनके कमांडर शिवराम कल्लूरी पर बनती है. हिमांशु कुमार ने कहा है कि हम कल्लूरी पर कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाएंगे.

21 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश सीबीआई रिपोर्ट और उसके बाद माओवादियों से शांतिवार्ता के सुझाव ने बस्तर में आईजी कल्लूरी के अभियान को गहरा धक्का पहुंचाया है. तभी से जगदलपुर समेत आसपास के इलाक़ों में कुछ ना कुछ घट रहा है.

रिपोर्ट पेश होने के दो दिन बाद 24 अक्टूबर को सहायक आरक्षकों ने जगदलपुर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर में सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत कइयों का पुतला फूंका. पूतला हिमांशु कुमार, बेला भाटिया, प्रोफेसर नंदिनी सुंदर, वामपंथी नेता मनीष कुंजाम, आदिवासी नेता सोनी सोरी, वकील शालिनी गेरा और पत्रकार मालिनी सुब्रमण्यम जैसे लोगों का फूंका गया.

मगर छत्तीसगढ़ पुलिस के इतिहास में इस तरह का विरोध प्रदर्शन, वो भी पुलिसवालों की तरफ़ से देखकर राज्य सरकार भी भड़क गई. 26 अक्टूबर यानी बुधवार को गृह विभाग ने बस्तर कमिश्नर दिलीप वासनीकर को पुतला दहन कांड की जांच के निर्देश दिए हैं.

सरकार ने कहा है कि कुछ वर्दीधारियों और सरकारी मुलाज़िमों ने सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों का पुतला दहन किया है. राज्य सरकार को इसकी शिकायत मिली है. लिहाज़ा, इसकी प्रशासनिक स्तर पर जांच की जाए.

फंसते कल्लूरी पर कार्रवाई का दबाव तेज़

शिवराम कल्लूरी पर शिकंजा अब कसता जा रहा है. सीबीआई रिपोर्ट के बाद 25 अक्टूबर यानी मंगलवार को कांग्रेस के बड़े नेताओं ने जगदलपुर में तीखा हमला किया. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि ताड़मेटला कांड में पुलिस की भूमिका उजागर होने के बावजूद सरकार कल्लूरी पर मेहरबान है. उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि कल्लूरी के हुक्म पर जवान गलत काम को अंजाम दे रहे हैं. इसी तरह के आरोप सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार और डीयू प्रोफेसर नंदिनी सुंदर ने लगाए हैं.

वामपंथी नेता मनीष कुंजाम ने भी इसी सीबीआई रिपोर्ट के आधार पर बुधवार को जगदलपुर में प्रेस कांफ्रेंस कर कल्लूरी पर कार्रवाई की मांग की कोशिश की लेकिन इसी दौरान उनपर हमला भी हो गया. आधा दर्जन हमलावरों की अगुवाई कर रहे शख़्स ने चेहरे पर काला कपड़ा बांध रखा था. मगर मज़े की बात यह है इस हमले की तस्वीरें जब सोशल मीडिया पर आईं तो उसमें मौजूद एक शख़्स कल्लूरी और बस्तर एसपी के साथ फोटो क्लिक करवाने वाला निकला.


सोशल मीडिया

आईजी कल्लूरी के बाएं तरफ़ खड़ा शख़्स मनीष कुंजाम पर हुए हमले में शामिल है.

सोशल मीडिया में इसी फोटो के आधार पर यह सवाल भी उठने लगा कि कहीं यह हमला कल्लूरी के इशारे पर तो नहीं करवाया गया. हमलावरों ने कुंजाम से पूछा कि वे बस्तर के बारे में बोलने वाले कौन होते हैं? उन्होंने कुंजाम को धमकी देते हुए कहा कि बस्तर पर बात करने या हिमायती बनने की जरूरत नहीं है. हमलावरों ने प्रेस कांफ्रेंस में रखी कुर्सियां उठाकर फेंक दी. साथ ही, यह भी कहा कि उनके संबंध जेएनयू के कन्हैया कुमार से हैं, इसलिए वे उन्हें देशद्रोही मानते हैं.

माओवाद प्रभावित बस्तर में कुंजाम को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चार गार्ड मुहैया करवाए गए थे, लेकिन बाद में गार्डों की संख्या दो कर दी गई. कुंजाम ने बताया कि उनके सुरक्षाकर्मियों से हथियार वापस ले लिए हैं. अगर उनके पास हथियार होता तो वे हमलावरों को खदेड़ सकते थे, मगर वे निहत्थे खड़े रहे. कुंजाम ने आरोप लगाया कि आईजी कल्लूरी आरएसएस और भगवा बिग्रेड के इशारे पर काम कर रहे हैं.

हालांकि कुंजाम ने इस हमले को लेकर थाने में कोई तहरीर नहीं दी है. उन्होंने दावा ज़रूर किया है कि हमलावरों में एक बाबू बोरई भी हैं जो बीते कुछ समय से अग्नि नामक संगठन में सक्रिय हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार समेत अन्य ने भी सीबीआई रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने और कल्लूरी पर कार्रवाई की मांग का मन लिया है.

संघर्ष समिति

बस्तर पत्रकार संघर्ष समिति के प्रमुख कमल शुक्ला का कहना है कि कुछ महीने पहले बस्तर की पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों का कार्टून सोशल मीडिया पर वायरल किया था. कार्टून में यह बताया गया था कि पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता माओवादियों की दलाली करते हैं.

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले को विधानसभा में जोर-शोर से उठाया तो सरकार ने जांच के निर्देश दे दिए, लेकिन इस मामले की जांच रिपोर्ट भी अब तक सामने नहीं आई है.

पीयूसीएल की प्रदेश ईकाई के अध्यक्ष लाखन सिंह का कहना है कि जनसंघर्षों में जुटे हुए लोग इस मामले में तब तक शांत नहीं बैठेंगे, जब तक सरकार कल्लूरी को बर्खास्त नहीं कर देती. लाखन सिंह ने बताया कि 27 अक्टूबर को मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए गुहार लगाएगा.
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मनीष कुंजाम को प्रेस कांफ्रेंस करने से पूलिस प्रयोजित संस्था अग्नि ने रोका .

मनीष कुंजाम को प्रेस कांफ्रेंस करने से पूलिस प्रयोजित संस्था अग्नि ने रोका
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आदिवासी महसभा के राष्ट्रीय महासचिव और आदिवासी नेता को सीपीआई कार्यालय में पुलिस द्वारा प्रायोजित अग्नि संस्था के लोगों ने प्रेस कांफ्रेंस करने से रोका, भारी संख्या में पुलिस दल तैनात .
कार्यालय को अस्तव्यस्त किया .
अभी परसों ही पुलिस ने सुकमा सहित बहुत स्थानों पर पुतला जलाया था.
कुछ हमलावर काला नकाब बांध के आये थे
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