Saturday, January 2, 2016

नटोरियन कलेक्टर के साथी और भ्रष्टाचार का केंद्र बस्तर -

नटोरियन कलेक्टर के साथी और भ्रष्टाचार का केंद्र बस्तर -

प्रभात सिंह
बस्तर में करप्शन का पायदान कितना नीचे गिर गया होगा ! इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक कलेक्टर जैसे रौबदार पद पर बैठा व्यक्ति एक विद्यालय में छोटे बच्चों से लिए गए अधिक फीस के मामले को दबाने के लिए खुद न्यायपालिका में हस्तक्षेप करने से भी परहेज नहीं करता है | और वह खबर छापने वाले पत्रकारों को नटोरीयन की संज्ञा देने से भी नहीं हिचकता हैं |
अब मान लिया जाय की वहाँ उनके इर्द गिर्द एक आध नटोरियन होंगे भी जिन्हें पत्रकार तो कहा भी नहीं जा सकता है | क्योंकि उनके लिए पत्रकारिता ब्लेकमेलिंग का व्यवसाय है | इसके बूते सुकमा जैसे पिछड़े इलाके में उनका करोड़ों का कारोबार हो जाता है | लेकिन उस कलेक्टर को इतना भी भान नहीं की उसी जगह पर ऐसे पत्रकार भी रहते है | जो उनकी सच्चाई कोर्रा जैसे छोटे हेराफेरी के मामले से लेकर जिले के बड़े घपलों का पर्दाफ़ाश करते रहे हैं |
तो कलेक्टर साहब को किस बात की खीझ है कि आप सुकमा के साथ बीजापुर और दंतेवाड़ा के सारे पत्रकारों को भी उसी तराजू में तौल रहे हैं | जबकि छत्तीसगढ़ में यदि अव्वल दर्जे की पत्रकारिता कहीं होती है तो वह बस्तर के इन्ही इलाकों में होती है | वो अलग बात है कि इन पत्रकारों के कारण बस्तर में कई अधिकारियों की अपने चढ़ावे की कमाई में कमी दिखने लगती है | बस्तर आकर वापस गए अधिकारीयों के घरों में संगेमरमर के फर्श संडास तक देखने को मिलेंगे |
आप अंदाजा लगा सकते हैं की ऐसे अधिकारियों के रहते इस सुकमा जिले में कई मामले ऐसे ही लगातार दबाये जाते रहे होंगे | जहां एक कलेक्टर ऐसे छोटे भ्रष्टाचार मामलों में खुद न्यायपालिका को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा हो | वहाँ इनके मातहत अधिकारी तो लाखों करोड़ों के गबन के मामले तो सेटलमेंट स्तर पर ही निपटा लेते होंगे |
ऐसे में तो अब यही समझा जाए कि सुकमा में जब तक ऐसे अफसर रहेंगे तब तक कोई भ्रष्टाचार की खबर लिखने का मतलब ही नहीं है | क्योंकि ऐसे अफसर तो तुरंत सेटलमेंट की जुगत में लग जाते होंगे | जिले का सबसे बड़ा अफसर ऐसा होगा तो उसके नीचे काम करने वाला अधिकारी कैसा होगा आप अंदाजा लगा सकते हैं | और इसमें हिस्सा ढूंढने वाले चंद नटोरियन भी हैं जिनका पत्रकारिता से कोई लेना देना ही नहीं है | ये बस्तर में एक पुलिस के एक बड़े अधिकारी से लेकर ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के लिए प्रेस विज्ञप्ति खुद बनाते हैं | क्योंकि उन्हें हर उस खबर पर दाम मिलता है | जिसके लिए बस्तर के गरीब आदिवासियों के तन के कपड़े तक योजनाओं के नाम पर नीलाम हो जाते हैं |
अब आप ऐसे हैं तो आपके जैसे छत्तीसगढ़ में काम करने वाले सारे आईएएस अफसरों को हम आपके जैसा समझने लगे तो ठीक है क्या? आप ही बताइये ! वैसे आपके किये की सजा आपको मिलेगी ही नहीं ! क्योंकि इस छत्तीसगढ़ सरकार में ४५ आईएएस अफसरों के खिलाफ जाँच होनी थी | जिनमें आपके सरीखे १६ जिले के कलेक्टर हैं; कई मामले तो १५ साल भी पार कर गए हैं |
तो क्या अब जनता मान ले की भ्रष्ट लोगों के खिलाफ छत्तीसगढ़ राज्य में अलग से न्याय व्यवस्था खुद जनता को बनानी पड़ेगी | क्या इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्याय कभी आम आदमी के साथ नहीं होगा ? तो क्या इसके लिए कोई अलग तरीके के सरकार की जरुरत है ? सवाल कई है जवाब सिर्फ एक है | सलाम छत्तीसगढ़ |

कितना आसान है किसी गरीब मजदूर लडकी की हत्या और उसके साथ बलात्कार करना ,कही कोई सुगबुहाट नही कोई हल्ला नही कोई बड़ी खबर तक नही और न कोई विरोध सिवाय मजदूर पिता और उनका परिवार . ***

रायगढ़ के टेंडा नयापारा के जंगल में महिला मजदूर की पेड़ पे वस्त्रहीन लाश के हत्यारों का कोई पता नही कर पाई पुलिस .कितना आसान है किसी गरीब मजदूर लडकी की हत्या और उसके साथ बलात्कार करना ,कही कोई सुगबुहाट नही कोई हल्ला नही कोई बड़ी खबर तक नही और न कोई विरोध सिवाय मजदूर पिता और उनका परिवार .
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टी एन आर कम्पनी के ठेकेदार मजदूर 18 साल की लड़की को कुछ लोगो ने हत्या करके उसकी लाश वस्त्रहीन करके टेड़ा नयापारा के जंगल में एक पेड़ से टांग दी , हत्या के पूर्व उसके साथ बलात्कार की आशंका भी व्यक्त की गई है , इस घटना को चार दिन तफ्तीश के बाबजूद अभी तक कोई गिरफ्तारी या प्रारम्भिक जाँच तक नही कर पाई.
नवापारा में रहने वाली साधमति की माँ एक स्कुल में मध्यान भोजन बनाती है , पिता रथु भी मजदूरी का काम करते है ,सधामती शुक्रवार की शाम मड़ई मेला देखने गई थी ,रात को वापस न आने पे उनके घर वालो ने खोजबीन की लेकिन उसका कोई पता नही चला बाद में अगली सुबह नयापारा के जंगल में एक लड़की की लाश दुपट्टे से फाँसी में लटकी होने के खबर पे सरे लोग इकठा हो गये ,तब उस लडकी की पहचान हो पाई,
पुलिस हमेशा की तरह उसे आत्महत्या का मामला बता रही है , पुलिस से कोई ये पूछने को तैयार नही है की कोई लडकी अपने सारे वस्त्र उतार के इतने ऊँचे पेड़ पे चढ़ के आत्म हत्या क्यों करेगी.
ये सब देख के और पुलिस का रवैया जिस तरह का है उससे लगता है की कितना आसान है किसी गरीब मजदूर लड़की का बलात्कार और हत्या करके उसे गुमनामी में डाल देने में सफल हो जाना.




टेंडा नवापारा के जंगल में किया था पांच लडको ने सामूहिक बलात्कार ,वस्त्रहीन करके भगाया ,,
उसके बाद उसने कर की आत्महत्या .
पांचो आरोपी किये गिरफ्ता
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[ 31 disambae 16]

(अनिल रतेरिया की रिपोर्ट )

रायगढ़ टॉप न्यूज 31 दिसंबर। 25 दिसंबर को ग्राम टेंडा नावापारा की रहने वाली 18 वर्षीय बालिका गांव के मेले मे गयी थी । जिसका शव 26 दिसबंर को टेण्डा नावापारा के समीप भेंगारी रोड के पास जंगल में महुआ झाड में लटके अवस्था में पाया गया था जिसकी सूचना मिलने पर मृतिका की मां तथा ग्रामीणो के साथ-साथ थाना प्रभारी घरघोडा भी घटना स्थल पहुंचे थे । बालिका के शरीर पर अधोवस्त्र नही रहने के कारण पुलिस प्रकरण को अत्यंत संवेदनशील मानकर चल रही थी ।
पुलिस अधीक्षक डॉ संजीव शुक्ला, एफएसएल यूनिट के प्रभारी अधिकारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक आर के पैकरा द्वारा भी घटना स्थल पहुंचकर विवेचक को घटनास्थल पर उपलब्ध भौतिक साक्ष्य संकलित करने के संबंध मे समुचित दिशा निर्देश दिये गये । 
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतिका स्थानीय TRN एनर्जी प्रा0लि0 के ठेकेदार के अधीन ठेका श्रमिक के रूप में कार्य कर रही थी ।
मर्ग जांच क्रम में की गयी पूछताछ में पता चला कि मृतिका गांव की उषा और सावित्री के साथ टीआरएन कंपनी में काम करने जाती थी गावं का लक्ष्मी मेला रहने के कारण दो दिन से काम मे नही गयी थी । वह यह बोल कर कि उषा और सावित्री के साथ मेला देखने जा रही हूं घर से 350 रू/ पर्स तथा मोबाईल लेकर निकली थी बदन पर सलवार शूट तथा स्वेटर पहनी थी। 26 दिसबंर को सवेरे 7-8 बजे हल्ला सुनने पर की एक लडकी गावं के जंगल में डेढोला अमरैया में लाश महुआ पेड में फांसी होकर लटकी है बेटी के घर न आने के कारण मां श्रीमति सनिरो यादव ने गांव की कोटवारिन श्रीमति तीजमति तथा सरपंच पति सनत राम राठिया वगैरह को बतायी और मौके पर जाकर देखी तो बदहवास रह गयी। मृतिका की मां ने बताया कि उषा और सावित्री के अलावा ग्राम भेंगारी के गुरूचरण राठिया के साथ मेला घुमने, फोटो खिचवाने की बात कहकर मेला से घूमकर फोटो खिचवाने के बाद रात्री लगभग 12:30 बजे मेले से मृतिका अपने परिचित गुरूचरण के साथ पैदल भेंगारी तरफ जाने के लिये निकली थी । गुरूचरण राठिया ने बताया कि मेला से लगभग एक फलांग दूर भगत गुरूजी के घर के सामने मेन रोड पर मृतिका के साथ पहुचा थी कि पांच लडके 16 से 20 साल उम्र के खडे़ थे जिनमें से एक लड़का ठिकना हटटा कटटा था सामने आकर ये कहते हुये कि लडकी को कहा ले जा रहे हो मृतिका के साथ छेडखानी करने लगे गुरूचरण के द्वारा मोबाईल से फोन किया जाने लगा जिस पर लडको के द्वारा धक्का मुक्की मारपीट कर गुरूचरण को भगा दिये और मोबाईल छीनकर मृतिका को लेकर जंगल की तरफ ले गये दूसरे दिन मृतिका का शव टेन्डा नावापारा के डेढोहा महुवारी में महुआ पेड में लटके हुए दूसरे दिन देखा गया था।
गुरूचरण राठिया से पूछताछ के बाद थाना प्रभारी घरघोडा द्वारा 29 दिसंबर को अपराध क्रंमाक 325/15 धारा 365, 354, 395, 34 ता0हि0 कायम कर विवेचना मे लिया गया तथा थाना घरघोडा एवं क्राइम ब्रांच के संयुक्त प्रयास से 30 दिसबंर की रात्री प्रकरण का पटाक्षेप हुआ ग्राम छाल के पांच आरोपियों जिनमें रायपारा छाल निवासी दो अवस्यक तथा जमीदारपारा छाल के एक बाल अपचारी सहित जमीदारपारा के अविनाश ऊर्फ डमरू पिता जगसाय यादव उम्र 18 साल 6 माह तथा राजकमल ऊर्फ लल्लू पिता हंशराम सिदार उम्र 19 वर्ष को हिरासत में लेकर पूछताछ की गयी
आरोपियों से पूछताछ में जो तथ्य उजागर हुए उससे इन दरिन्दो के दुष्कृत्यो से मानवता शर्मशार हो गई आरोपीगण दो मोटर सायकलो में छाल से मेला देखने आये थे जंहा मृतिका को गुरूचरण के साथ अकेले जाता देखकर पीछाकर बलपूर्वक निर्जन स्थान पर ले जाकर बारी-बारी से दुष्कर्म किया कर अर्धनग्न अवस्था- में ही घर जाने को मजबूर किया गया जबकि मृतिका अपने अधोवस्त्र वापस देने के लिये गिडगिडाती रही लेकिन दुर्दान्त आरोपियों पर कोई असर नही हुआ और इसी ग्लानिवश मृतिका द्वारा महुआ पेड की डगाल मे दुपट्टे से फांसी लगाकर अपनी ईहलीला समाप्‍त कर ली ।
आरोपियों की निशादेही पर मृतिका का सलवार, पेन्टी, बैग, टूटा हुआ मोबाईल तथा मृतिका के परिचित एवं प्रारंभिक घटना के चश्मदीद साक्षी गुरूचरण राठिया का टूटा हुआ मोबाईल जप्त किया गया इसी प्रकार आरोपियों के मोबाईल तथा वह मोटर सायकल जिसमें आरोपीगण छाल से मेला देखने आये थे जप्त किया गया है आरोपियों को हिरासत में लेकर बापर्दा रख शिनाख्त कार्यवाही कराई गयी जिसमें पांचो आरापियों को गुरूचरण राठिया द्वारा पहचान किये जाने पर आज गिरफतार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है ।
अबतक की विवेचना पर पाया गया कि आरोपियो द्वारा एक राय होकर मृतिका की आबरू लूटने के उददेश्य से छेडखानी करते हुये निर्जन स्थान ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म कर मृतिका के अधोवस्त्र साशय कब्जे में लेकर अर्धनग्न अवस्था में ही घर जाने के लिये विवश किये जाने के फलस्वरूप मृतिका के साथ घटित दुष्कर्म और लोक लज्जा के कारण पास के महुआ पेड़ की डगाल में अपने दुपपटे से फांसी लगाकर मौत हो गयी।

Friday, January 1, 2016

स्तन ढकने का अधिकार पाने के लिए केरल में गैर ब्राम्हण महिलाओं का ऐतिहासिक विद्रोह

इतिहास में महिला विद्रोह के अवसर
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स्तन ढकने का अधिकार पाने के लिए केरल में गैर ब्राम्हण महिलाओं का ऐतिहासिक विद्रोह




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केरल के त्रावणकोर इलाके, खास तौर पर वहां की महिलाओं के लिए 26 जुलाई का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। इसी दिन 1859 में वहां के महाराजा ने अवर्ण औरतों को शरीर के ऊपरी भाग पर कपड़े पहनने की इजाजत दी। अजीब लग सकता है, पर केरल जैसे प्रगतिशील माने जाने वाले राज्य में भी महिलाओं को अंगवस्त्र या ब्लाउज पहनने का हक पाने के लिए 50 साल से ज्यादा सघन संघर्ष करना पड़ा।इस कुरूप परंपरा की चर्चा में खास तौर पर निचली जाति नादर की स्त्रियों का जिक्र होता है क्योंकि अपने वस्त्र पहनने के हक के लिए उन्होंने ही सबसे पहले विरोध जताया। नादर की ही एक उपजाति नादन पर ये बंदिशें उतनी नहीं थीं। उस समय न सिर्फ अवर्ण बल्कि नंबूदिरी ब्राहमण और क्षत्रिय नायर जैसी जातियों की औरतों पर भी शरीर का ऊपरी हिस्सा ढकने से रोकने के कई नियम थे। नंबूदिरी औरतों को घर के भीतर ऊपरी शरीर को खुला रखना पड़ता था। वे घर से बाहर निकलते समय ही अपना सीना ढक सकती थीं। लेकिन मंदिर में उन्हें ऊपरी वस्त्र खोलकर ही जाना होता था।
नायर औरतों को ब्राह्मण पुरुषों के सामने अपना वक्ष खुला रखना होता था। सबसे बुरी स्थिति दलित औरतों की थी जिन्हें कहीं भी अंगवस्त्र पहनने की मनाही थी। पहनने पर उन्हें सजा भी हो जाती थी। एक घटना बताई जाती है जिसमें एक निम्न जाति की महिला अपना सीना ढक कर महल में आई तो रानी अत्तिंगल ने उसके स्तन कटवा देने का आदेश दे डाला।इस अपमानजनक रिवाज के खिलाफ 19 वीं सदी के शुरू में आवाजें उठनी शुरू हुईं। 18 वीं सदी के अंत और 19 वीं सदी के शुरू में केरल से कई मजदूर, खासकर नादन जाति के लोग, चाय बागानों में काम करने के लिए श्रीलंका चले गए। बेहतर आर्थिक स्थिति, धर्म बदल कर ईसाई बन जाने औऱ यूरपीय असर की वजह से इनमें जागरूकता ज्यादा थी और ये औरतें अपने शरीर को पूरा ढकने लगी थीं। धर्म-परिवर्तन करके ईसाई बन जाने वाली नादर महिलाओं ने भी इस प्रगतिशील कदम को अपनाया। इस तरह महिलाएं अक्सर इस सामाजिक प्रतिबंध को अनदेखा कर सम्मानजनक जीवन पाने की कशिश करती रहीं।
यह कुलीन मर्दों को बर्दाश्त नहीं हुआ। ऐसी महिलाओं पर हिंसक हमले होने लगे। जो भी इस नियम की अवहेलना करती उसे सरे बाजार अपने ऊपरी वस्त्र उतारने को मजबूर किया जाता। अवर्ण औरतों को छूना न पड़े इसके लिए सवर्ण पुरुष लंबे डंडे के सिरे पर छुरी बांध लेते और किसी महिला को ब्लाउज या कंचुकी पहना देखते तो उसे दूर से ही छुरी से फाड़ देते। यहां तक कि वे औरतों को इस हाल में रस्सी से बांध कर सरे आम पेड़ पर लटका देते ताकि दूसरी औरतें ऐसा करते डरें। 
लेकिन उस समय अंग्रेजों का राजकाज में भी असर बढ़ रहा था 1814 में त्रावणकोर के दीवान कर्नल मुनरो ने आदेश निकलवाया कि ईसाई नादन और नादर महिलाएं ब्लाउज पहन सकती हैं। लेकिन इसका कोई फायदा न हुआ। उच्च वर्ण के पुरुष इस आदेश के बावजूद लगातार महिलाओं को अपनी ताकत और असर के सहारे इस शर्मनाक अवस्था की ओर धकेलते रहे। आठ साल बाद फिर ऐसा ही आदेश निकाला गया। एक तरफ शर्मनाक स्थिति से उबरने की चेतना का जागना और दूसरी तरफ समर्थन में अंग्रेजी सरकार का आदेश। और ज्यादा महिलाओं ने शालीन कपड़े पहनने शुरू कर दिए। इधर उच्च वर्ण के पुरुषों का प्रतिरोध भी उतना ही तीखा हो गया। एक घटना बताई जाती है कि नादर ईसाई महिलाओं का एक दल निचली अदालत में ऐसे ही एक मामले में गवाही देने पहुंचा। उन्हें दीवान मुनरो की आंखों के सामने अदालत के दरवाजे पर अपने अंग वस्त्र उतार कर रख देने पड़े। तभी वे भीतर जा पाईं। संघर्ष लगातार बढ़ रहा था और उसका हिंसक प्रतिरोध भी।
सवर्णों के अलावा राजा खुद भी परंपरा निभाने के पक्ष में था। क्यों न होता. आदेश था कि महल से मंदिर तक राजा की सवारी निकले तो रास्ते पर दोनों ओर नीची जातियों की अर्धनग्न कुंवारी महिलाएं फूल बरसाती हुई खड़ी रहें। उस रास्ते के घरों के छज्जों पर भी राजा के स्वागत में औरतों को ख़ड़ा रखा जाता था। राजा और उसके काफिले के सभी पुरुष इन दृष्यों का भरपूर आनंद लेते थे.
आखिर 1829 में इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया। कुलीन पुरुषों की लगातार नाराजगी के कारण राजा ने आदेश निकलवा दिया कि किसी भी अवर्ण जाति की औरत अपने शरीर का ऊपरी हिस्सा ढक नहीं सकती। अब तक ईसाई औरतों को जो थोड़ा समर्थन दीवान के आदेशों से मिल रहा था, वह भी खत्म हो गया। अब हिंदू-ईसाई सभी वंचित महिलाएं एक हो गईं और उनके विरोध की ताकत बढ़ गई. सभी जगह महिलाएं पूरे कपड़ों में बाहर निकलने लगीं.
इस पूरे आंदोलन का सीधा संबंध भारत की आजादी की लड़ाई के इतिहास से भी है। विरोधियों ने ऊंची जातियों के लोगों और उनके दुकानों के सामान को लूटना शुरू कर दिया। राज्य में शांति पूरी तरह भंग हो गई। दूसरी तरफ नारायण गुरु और अन्य सामाजिक, धार्मिक गुरुओं ने भी इस सामाजिक रूढ़ि का विरोध किया.
मद्रास के कमिश्नर ने त्रावणकोर के राजा को खबर भिजवाई कि महिलाओं को कपड़े न पहनने देने और राज्य में हिंसा और अशांति को न रोक पाने के कारण उसकी बदनामी हो रही है .
अंग्रेजों के और नादर आदि अवर्ण जातियों के दबाव में आखिर त्रावणकोर के राजा को घोषणा करनी पड़ी कि सभी महिलाएं शरीर का ऊपरी हिस्सा वस्त्र से ढंक सकती हैं। 26 जुलाई 1859 को राजा के एक आदेश के जरिए महिलाओं के ऊपरी वस्त्र न पहनने के कानून को बदल दिया गया। कई स्तरों पर विरोध के बावजूद आखिर त्रावणकोर की महिलाओं ने अपने वक्ष ढकने जैसा बुनियादी हक भी छीन कर लिया .

रायगढ़ के पुसौर में 100 एकड़ जमीन गिरबी रखने वाला सूदखोर गिरफतार किया गया,,


रायगढ़ के पुसौर में 100 एकड़ जमीन गिरबी रखने वाला सूदखोर गिरफतार किया गया,,






रायगढ़ के पुसौर में 100 एकड़ जमीन गिरबी रखने वाला सूदखोर गिरफतार किया गया,, सामाजिक कार्यकर्ता डिग्री चौहान की पहल पे एस पी ने की कार्यवाही .
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पुसौर थाना क्षेत्र में जितेंद्र साहू पिता सहदेव साहू जो ओड़ेकरा में रह के सूदखोरी का गैर क़ानूनी काम करता है उसने कम ब्याज का लालच देके 30 -40 किसानो 100 एकड़ से ज्यादा जमीन कब्जा ली ,इसको लेके किसानो में बड़ा रोष है ,8 -10 किसान पी यू सी एल के कार्यकर्ता डिग्री प्रसाद चौहान के साथ एस पी संजीव चतुर्वेदी से मिल के शिकायत की ,उसकेआधार पे तुरंत कर्यवाही करते हुये जितेन्द्र साहू को तुरंत गिरफतार कर लिया गया .
ये सूदखोर किसानो की जमीन अपने नाम रजिस्ट्री करवा लेता था जब वही किसान पैसा वापस करने जाता तो ज्यादा ब्याज बता के जमीन वापस करने से इंकार कर देता था ,गवाह के रूप में उसने एक दो लठेत भी रखे है जो गुंडा गर्दी के काम भी आते है .
पुसौर और आसपास के क्षेत्र में ऐसे की गिरोह काम कर रहे है जो किसानो की खराब खेती और बेंक के बढ़ते कर्ज पटाने के लिए कर्ज देते है और उनकी जमीन हडप रहे है ,एक किसान ने अपना पूरा कर्ज़ भी पता दिया लेकिन उसकी जमीन वापस नही करने से सदमे में उसकी मौत भी हो गई थी .
थाने का घेराव ,अलग अलग ऍफ़ आई आर दर्ज करने की मांग
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पुसौर के बडी संख्या में किसानो ने थाने का घेराव कर लिया है ,उनकी मांग है की सभी किसानो का अलग अलग प्रकरण दर्ज किया जाये और केस सूदखोरी कानून में दर्ज हो जब की पुलिस एक साथ केस दर्ज करना की जिद कर रही है ।
सूचना मिलने तक थाने का घेराव जारी है .

Saturday, December 26, 2015

बीजापुर में महिलाओ के साथ हुए बलात्कार और मारपीट की मानवाधिकार आयोग ने सरकार से और डीजीपी ने कल्लूरी से मांगी रिपोर्ट


बीजापुर में महिलाओ के साथ हुए बलात्कार और मारपीट की मानवाधिकार आयोग ने सरकार से और डीजीपी ने कल्लूरी से मांगी रिपोर्ट 


बीजापुर में फोर्स द्वारा आदिवासी महिलाओ से दुराचार और मारपीट और हत्या पे मानव अधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ डीजीपी को फटकार लगाते हुए चार सप्ताह में मांगी रिपोर्ट .
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राष्ट्रिय मानव अधिकार आयोग ने पुलिस महानिरीक्षक छत्तीसगढ़ से बीजापुर जिले के ग्राम चिन्नागेलुर ,पेदमा पल्ली ,बुडी गेचोर ,और गुडेन में आदिवासी महिलाओ के साथ फ़ोर्स द्वारा किये गये बलात्कार ,मारपीट और हत्या के मामले में कडी फटकार लगाते हुए विस्त्रत रिपोर्ट र्मांगी है .और चार सप्ताह में मामले का पूरा ब्यौरा देने को आदेश दिया है .
लगभग डेढ़ महीने पहले इन ग्रामो में सीआरपी और पुलिस द्वारा 40 महिलाओ के साथ मारपीट बलात्कार और अन्य तरीको से प्रताड़ित किया गया था , जिसमे गर्भवती महिला के साथ मारपीट और रेप किया गया जिसमे एक महिला की बाद में मौत हो गई थी .
आयोग ने शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही न करने और ज्ञात सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज न करने पे नाराजगी जताई है .
महिला संघटनो ने घटना के बाद तुरंत स्थल पे जाके जाँच की थी और रिपोर्ट को प्रेस तथा विभिन्न स्थानो में शिकायत के रूप में भेजी थी , जाँच में पाया गया था की 45 दिन पहले बीजापुर के ग्राम चिन्ना गेलुर ,पेद्दा गेलुर,पेदमापल्ली,बुडगी चेरू और गुधेन में 13 साल की नाबालिग और गर्भवती महिला समेत 40 महिलाओ के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया .चोथे दिन उसमे से एक महिला का मौत हो गयी थी .
परिवार के लोग और जन संघटन के लोगो की शिकायत पे खानापूर्ति के लिए प्राथमिकी दर्ज कर ली गई और बाद में पुरे मामले को ठन्डे बस्ते में डाल दिया गया था .आज तक फ़ोर्स के किसी भी जवान के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई .




चेन्नागेलुर (बीजापुर) अनाचार की याद आई पुलिस डीजीपी को :कल्लूरी से मांगी रिपोर्ट 
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आदिवासी महिलाओ के साथ बदसलूकी मारपीट और बलात्कार की रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय ने आई जी बस्तर से मांगी है .
आई जी कल्लूरी से घटना का पूरा व्योरा देने को कहा गया है . प्रताड़ित के परिवार की मांग, महिला संघटनो की जाँच रिपोर्ट , मिडिया के लगातार दवाव और अब मानवअधिकार आयोग की फटकार के बाद छत्तीसगढ़ का पुलिस प्रमुख जागे और उन्होंने इसकी रिपोर्ट तलब की है .
सबको मालूम है कि बिजपुर ब्लोक का ग्राम चेन्नागेलुर, पेदागेलुर ,पेड़मापल्ली, बुडगी गेचुर और गुडेन में सुरक्षा बलों पे स्थानीय महिलाओ के साथ मारपीट , 13 साल की बच्ची के साथ अनाचार और अन्य 40 महिलाओ के साथ बद्सलुकी का आरोप है जिसमे एक महिला की मौत हो गई थी .
इस घटना के प्रकाश में आने के बाद मानव अधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया और इसकी रिपोर्ट 28 दिन के अंदर देने को कहा .
आयोग ने पीडिता के लिखित शिकायत के बाबजूद कोई जाँच न करने को आयोग ने गंभीरता से लिया ,आज तक किसी आरोपी से पूछ ताछ तक नही की गई वे आरोपी अब भी आज़ाद घूम रहे है और उन्ही गाव में आतंक मचा रहे है .

स्कूली छात्र के साथ सुरक्षा बलों की मारपीट के खिलाफ 700 छात्रो ने त्यागा था स्कुल

स्कूली छात्र के साथ सुरक्षा बलों की  मारपीट के खिलाफ 700 छात्रो ने त्यागा था स्कुल , समाज के हस्तझेप के बाद हुए बच्चे वापस .



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19 नवम्बर को चेरपाल पोटो केबिन छात्रावास के एक छात्र को छुट्टी में घर वापस जाते समय रैगड़ गत्ता नाले के पास सवनार निवासी सातवी के छात्र सोहन ताती को फ़ोर्स के लोगो में मारपीट की जिससे वो वेहोश हो गया इसके विरोध में 700 छात्रो ने अपना होस्टल छोड़ दिया और वे सब अपने घर चले गये .
इस अमानवीय घटना के विरोध में 700 छात्रो का भविष्य खतरे में पड़ता देख कर गोंडवाना समाज का एक दल सोहन ताती के गाव सवानार गया जिसका नेत्रत्व जिला अध्यक्ष श्री तेलम बोरिया ने किया .
गोंडवाना समाज के लोगो ने बच्चो और पालको के बयान लिया और उनके भविष्य का हवाला दिया और आग्रह किया की बच्चो को वापस आश्रम भेजे उनके कहने पर गाव के लोग तैयार हुए और बच्चो को वापस स्कुल भेजा
इस बीच स्कुल या शाशन ने कोई कोशिश नही की जिससे की बच्चे वापस आ पाते.
इस दौरान गोंडवाना समाज से ग्रामीणों ने कहा की फ़ोर्स के लोग गश्त के दौरान ग्रामीणों के साथ मारपीट करते है लूट पाट करते है उनकी कोई पुलिस के लोग न सुनते है और न कोई र्र्पोर्ट लिखते है .
समाज ले लोगो ने ग्रामिणो को आश्वासन दिया की वे मुख्यमंत्री से मिल के शिकायत करेंगे और फ़ोर्स के लोगो के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करवाएंगे .

Saturday, December 19, 2015

कोयली बेडा के मरकनार में फ़ोर्स का ग्रामीणो के साथ मारपीट और जान से मरने की धमकी ,नक्सली सिद्द करने की कबायद

कोयली बेडा के मरकनार में फ़ोर्स का ग्रामीणो के साथ मारपीट और जान से मरने की धमकी ,नक्सली सिद्द करने की कबायद 

प्रताड़ित ग्रामीणो की पीड़ा जैसा उन्होंने लिखा 




























उत्तरी बस्तर के कांकेर जिले में कोयली बेडा के ग्राम मरकानार  में दो दिसंबर बुधवार को कोयली बेडा मेढकी नदी और मरकानार  के बीच हुए बम विस्फोट को लेके थाना कोयलीबेड़ा से फ़ोर्स लगभग दोपहर तीन बजे ग्राम मरकानार में  खेत में काम करने वाले लोगो आयतु ध्रुव ,रामलाल ध्रुव ,राम चन्द्र दर्रो बजनु राम ध्रुव ,हिरदु निषाद ,धंनु राम उसेंडी ,बैजनाथ ध्रुव ,अर्जुन कड़ियांम  और एक मेहमान श्याम सिंह दुग्गा को घर से बुला ले बीच जंगल में नौ लोगो का सामूहिक फोटो खिंच के घटना स्थल से होते हुए थाने  ले गए और वहाँ जाके  पुलिस अधिकारियो के सामने सभी नौ लोगो के नाम रजिस्टर  में अंकित किया।

इसके बाद फ़ोर्स के लोगो ने घटना के बारे में पूछ ताछ किया ,और सभी लोगो को एक कमरे में बंद करके  लात घुसे डंडा और बेल्ट से बेरहमी से पिटाई की गई , इस मारपीट में रामचन्द्र दर्रो बेहोश हो गया। इसके बाद दबा बनाते हुए दुबारा 4 दिसंबर  दिन शुक्रवार को सुबह 9  बजे  पुरे गाव को उपस्थित होने का आदेश देने का बाद रात को 10  बजे छोड़ा गया।
अगले दिन 4  दिसंबर को पूरे गाव के लोग सुबग 9 बजे थाने में उपस्थित हुए ,पुरे  दिन पुरे गाव के लोगो को बेवजह  बिठाया गया और 17 व्यक्तियों से    बरी बारी पूछताछ की गई और उन्हें अलग अलग कमरो में तीन तीन पुलिस वालो ने लात घुसो बेल्ट डंडे से बुरी तरह से मारपीटा  गया , जिससे राजेन्द्र ध्रुव और शेषन लावतरे बेहोश हो गया।
जिन ग्रामीणो के साथ मारपीट की गई उनके नाम है , रामलाल धुर्व ,शेषन लाउत्तरे ,राम लाल दर्रो ,हीरालाल आँचले ,सुबीर कौशल ,आयतु राम ध्रुव ,धनी  राम मांडवी ,महेर सिंह ध्रुव ,राजेन्द्र ध्रुव ,शंकर अचला ,बजणु राम ध्रुव ,अर्जुन कड़ियां ,सग्राम सलाम ,हिरदु राम निषाद ,बेहा राम अचला और अजित ध्रुव है। 

पुरे गाव को बुरी तरह प्रताड़ित करने के बाद अगले दिन शनिवार दिनाक 5  दिसंबर 15  को फिर उपस्थित होने को कह के रात में 10  बजे छोड़ा गया।  बजे तीसरी बार 5  दिसंबर को फिर  पुरे गाव के लोग थाने  में हाजिर हुए ,फिर वही कहानी दोहराई गई इन सब से अलग अलग पूछ ताछ के बार मार पीट  की गई और शाम को 7 बजे यह कह के छोड़ दिया की तुम लोगो में से तीन चार लोगो को समय आने पे नक्सली केस में फसा के जेल भेज दिया जायेगा।
ग्रामीणो ने कलेक्टर और एसपी  से लिखित में शिकायत करते हुए लिखा है की महोदय हम ग्राम वासी खेती मजदूरी ,वनोपज सग्रह करके बड़ी मुश्किल में अपना  जीवन का भरण पोषण करते है ,घने जंगलो में नक्सलियों और पुलिस के बीच किसी तरह अपना जीवन वसर कर रहे हैं। हम कोई घटना के बारे में कुछ नहीं जानते बस हमें पुलिस बार बार प्रताड़ित करती रहती हैं। ऐसी किसी नक्सली घटना से हमारा कोई वास्ता नहीं है और न ही कुछ हमलोगो को कुछ मालूम ही हैं।
ग्रामीणो ने पत्र में लिखा है की ऐसी प्रताड़ना की घटनाये रोज की बात हो गई है। ये पुलिस और नक्सलियों के बीच की लड़ाई है और हम ग्रामवासी इसमें बेगुनाह प्रताड़ित  होते रहते है। आज कल रोज पुलिस हमारे साथ मारपीट करती रहती है।
उन्होंने अपील की है की ऐसे जिम्मेदार फ़ोर्स के लोगो के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की जाये और उन्हें निलंबित करके उनके खिलाफ जाँच की जाये।

ऐसी ही एक अन्य शिकायत 7 नवम्बर 2015  की है ,

मरकानार  में 7 नवम्बर को दिन शनिवार को सुबह साढ़े पांच बजे जिला पुलिस बल और बीएसएफ  की सयुक्त टीम ने गांव का घेराव करके सब को जगाया गया ,और पांच व्यक्तियों को मारकानार और बड़ापारा के बीच जगल में सुबीर कौशल ,राम चन्द्र दर्रो ,आयतु राम ध्रुव ,मखलू राम ध्रुव [ग्राम पटेल ] और राजेन्द्र ध्रुव को अलग अलग करके नक्सलियों के बारे में कड़ाई से पूछ ताछ  किया गया ,इनमे से राजेन्द्र ध्रुव और सुबीर कौशल को नंगा बदन करके 80 -100  बार उठक बैठक करवाया गया और खड़े खड़े पी टी  कराई और नक्सलियों द्वारा स्टाप डेम  में लगी गाड़ियों को जलाने ,पर्चे फेंकने और सामग्री पहुचने के बारे में पूछ ताछ  की गई।
साथ में तलब से मछली पकड़ के चावल बनाने को खा गए जिसका कोई भुगतान फ़ोर्स के लोगो न ेनह किया और खा पीके  पकडे गए लड़को को म छोड़ दिया और कहा की सभी पांच लोग थाने  में हाजिर होंगे एस अादेश देके चले गया।
दूसरे दिन 4 बजे सभी ग्रामीणो ने अपनी उपस्थिति दी  उन लोगो से धमकी देते हुए कहा की तुम सब लोगो के खिलाफ वारंट है कभी भी कोयली बेडा में वारदात होगा तो तुम लोगो को जेल जाने के लिया तैयार रहना पड़ेगा। इसके बाद लाईन वाले कोरे कागज में हस्ताक्षर करवा के शाम  5 ,30  बजे छोड़ दिया गया।

ग्रामवासियो ने इस घटना की भी रिपोर्ट कलेक्टर और एसपी  को की और निवेदन किया की दोषी अधिकारियो के खिलाफ कार्यवाही की जाये।
आज तक न तो पुलिस वालो के खिलाफ कोई कार्यवाही हुई और न ग्राम वासियो की प्रताड़ना ही कम हुई है।

आवेदन पे सुबीर प्रेमलाल कौशल ,रामचन्द्र सोम सिंह दर्रो ,आयतु गस्सु राम ध्रुव ,तथा जिला पंचायत  सदस्य के हस्ताक्षर हैं ,