Sunday, June 4, 2017

हम कायर ,लालची और डरपोक कौम हैं.


एक साल पहले की 
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हम कायर ,लालची और डरपोक कौम हैं।
धर्म परिवर्तन ज़ेरेबहस है
इतिहास में कभी भी धर्म परिवर्तन किताबो को पढ़ के नही हुआ ,
चाहे वो आसमानी हो या स्वरचित ,
किसी संत , फ़क़ीर या समाज सुधारको ने धर्म परिवर्तन नहीं कराये
धर्म हमेशा सत्ता ,लालच ,या ताकत के बल पे ही बदले हैं।
मुझे याद नहीं आता की कोई अन्य धर्म का व्यक्ति हिन्दू बना हो।
इसका एक कारन ये भी है कि हिन्दुओ में धर्म परिवर्तन की अवधारणा ही नहीं है ,
अगर किसी को अपने धर्म में ले ही आये तो उसे क्या बनाएंगे ,ब्राह्मण या छत्री या फिर शूद्र।
हिन्दू ही मुस्लिम बने ,
ईसाई बने
सिख ,जैन या बौद्ध बने
अगर ताकत ,लालच या सत्ता के डर के धर्म बदला तो इसमें सबसे आगे हिंदू ही हैं।
वैसे भी इतिहास को हमें पढ़ने कीआदत नहीं है ,
नहीं तो हम जानते की ,
हमारे देश में
आर्य आये,
शक़ ,हूण आये
मुसलमान आये
अंग्रेज़ से लेके सिकंदर तक आये ,
और पता नहीं कितने आक्रमण हुये
हम सिर्फ हारे और हारे है ,
जिस 800 साल के बाद हिन्दू राज्य की बात करते हो,
वो भी बुरी तरह हमलावरों से हारे ही थे ,उन्हें कोई वोट देते नहीं जिताया था ,
हम हमेशा और हमेशा हारे और पिटे है,
क्यों ? पूछना चाहते हो ,तो सुनो
हम हमेशा अपनी जातिगत लड़ाईया ही लड़ते रहे
हमने शुद्रो को धिक्कारा
हमने स्त्रियों को धिक्कारा
हमने आदिवासियों को धिक्कारा
हम मुस्लिमो,ईसाइयो बोद्धो के बरख़िलाफ़ खड़े हैं ,और उन्हें खत्म करना चाहते हैं
 हमने गरीबो ,पीडितो को और पीड़ा पहुचाया
हम हमेशा श्रेष्ठता और शुध्दता के घमंड में चूर रहे ,
इसी लिए
जिसने मारा ,हम मरे
जिसने पीटा हम पिटे ,
दलितो को जला रहे है
स्त्रियों को अपमानित कर रहे है
अपनी सेना ,दुश्मनो के खिलाफ नहीं ,बल्कि अपने देश वासियो के
खिलाफ स्तेमाल कर रहे हैं।
हम आज वहीं कर रहे है ,जो हमने इतिहास में किया है
हमरा फिर वही हस्र होगा।,
जो इतिहास में हुआ हैं।
आइये हम इतिहास को दोहराने से रोकें
ये देश सिर्फ इन बजरंगियों ,दंगाईयो या देशद्रोहीयो का नहीं हैं
हम सब का हैं ,
[ लाखन सिंह ]

Saturday, June 3, 2017

सालभर में बस्तर के नक्सली इलाकों तक पहुंच जाएगा बस्तर नेट


Published: Sat, 03 Jun 2017 08:03 PM (IST) | Updated: Sat, 03 Jun 2017 08:07 PM (IST)
By: Editorial Team
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी बस्तर नेट परियोजना पर काम शुरू हो चुका है। 60 करोड़ की इस परियोजना में बस्तर के सातों जिलों में डिजिटल हाइवे का निर्माण किया जाएगा। इसके तहत बस्तर में 836 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाया जाएगा, जिससे सुदूर नक्सल इलाकों और घने जंगलों तक कनेक्टिविटी की समस्या खत्म हो जाएगी।
बस्तर नेट योजना का भूमिपूजन 1 अप्रैल को जगदलपुर में मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने किया था। एक महीने के भीतर ही चिप्स के अफसरों ने इस योजना की सभी औपचारिकताएं पूरी कर टेंडर फाइनल कर दिया और काम शुरू करा दिया। यह परियोजना एक साल में पूरी होगी।
बस्तर के जिला मुख्यालयों तक में मोबाइल नेटवर्क की लुकाछुपी एक बड़ी समस्या है। सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर जैसे जिलों में जिला मुख्यालयों में भी कभी अचानक मोबाइल नेटवर्क चला जाता है और कई-कई दिन तक ये जिले दुनिया से कटे रहते हैं।
संभाग मुख्यालय जगदलपुर में इंटरनेट की धीमी गति की शिकायत आम है। ऐसे में जंगल में मोबाइल कनेक्टिविटी की बात करना ही बेमानी है। सुकमा के सुदूर इलाकों में पदस्थ जवान मोबाइल नेटवर्क न होने से कई दिनों तक अपने परिजनों से बात नहीं कर पाते। हाल ही में बुरकापाल में नक्सल हमले के बाद बस्तर में मोबाइल नेटवर्क की समस्या पर पूरे देश का ध्यान गया।
यह भी कहा गया कि मोबाइल और इंटरनेट न होने से सूचना नहीं मिल पाती है। राज्य सरकार ने हालांकि इससे पहले ही बस्तर नेट का प्लान बना लिया था। अब एक साल में इस योजना को पूरा करने के लिए पूरी ताकत झोंकी जा रही है। बस्तर नेट परियोजना का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। इस योजना में 836 किमी ऑप्टिकल फाइबर को रिंग पद्धति से बिछाया जाएगा। एक रिंग 405 किमी लंबी तथा दूसरी 421 किमी की होगी।
इसका फायदा यह होगा कि एक मार्ग से केबल कटने पर भी दूसरी ओर से कनेक्टिविटी बनी रहेगी। नक्सल प्रभावित इलाकों में केबल जंगल के भीतर तक जाएगी। अभी अधिकांश पुलिस कैंपों में नेटवर्क नहीं है। जवानों को पेड़ पर चढ़कर नेटवर्क तलाश करते देखा जा सकता है। माना जा रहा है कि एक साल में इस समस्या का समाधान हो जाएगा। 
बनेगा डिजिटल इनफॉमेशन हाइवे
बस्तर नेट परियोजना के तहत डिजिटल इनफार्मेशन हाइवे का निर्माण किया जा रहा है। तेज गति के इंटरनेट से मोबाइल जोड़कर इसका उपयोग शिक्षा-स्वास्थ्य सहित तमाम योजनाओं में किया जाएगा। किसानों को आईटी का लाभ मिलेगा। कृषि उत्पादन, मृदा परीक्षण, बिक्री मूल्य की जानकारी आदि सेवाएं शुरू होंगी।
वर्चुअल एजुकेशन में इसका उपयोग कर बस्तर में शिक्षा की दशा सुधारने का भी प्लान है। नक्सल मोर्चे पर इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी से सूचनाओं के आदान प्रदान में सहूलियत होगी। 
इनका कहना है
बस्तर नेट पर काम शुरू हो चुका है। पिछले महीने ही टेंडर जारी हो चुका है। एक साल में बस्तर में मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी की रफ्तार बढ़ जाएगी।
-अलेक्स पॉल मेनन, सीईओ चिप्स

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73 लोगों को जमीन वापस देने का फरमान!!!!! कुनकुनी जमीन घोटाले में प्रशासन का बड़ा फैसला


अजा आयोग के निर्देश के बाद प्रशासन ने उठाया सख्त कदम

नईदुनिया खबर का असर
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रायगढ़।नईदुनिया प्रतिनिधि

कुनकुनी आदिवासी जमीन घोटाले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के निर्देश के बाद एसडीएम खरसिया ने 73 लोगों को नोटिस जारी कर जमीन वापस करने का फरमान जारी किया है। प्रशासन के इस कदम से मामले में संलिप्त लोगों में हड़कम्प है।

जिले का कुनकुनी आदिवासी जमीन घोटाले को लेकर नईदुनिया द्वारा खुलासा किया गया था। कुनकुनी जमीन घोटाले को लेकर नईदुनिया द्वारा हरेक तथ्यों को लेकर खबरें लगातार प्रकाशित की गई थी। इस मामले में अजजा आयोग में गुहार लगाने के बाद आयोग द्वारा कलेक्टर एसपी सहित रेलवे डीआरएम को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया और मामले में त्वरित कार्रवाई का निर्देश देते हुए कार्रवाई से एक सप्ताह में अवगत कराने का भी निर्देश भी दिया गया था। राष्ट्रीय अजजा आयोग की सख्ती के बाद प्रशासन को भी मामले को गंभीरता से लेना मजबुरी बन गई। दर असल मामले का खुलासा होने के बाद प्रशासन सफेद पोशों का कार्रवाई न करने का लगातार दबाव बना रहा जिसकी वजह से प्रशासन इस मामले से जुड़े लोगों पर कार्रवाई नहीं कर पा रही थी हालाकि इस मामले से जुड़े अधिकारियों पर निलंबन के कार्रवाई की गाज जरुर गिरी लेकिन पीड़ित आदिवासियों को न्याय नहीं मिल पा रहा था।

बीते माह कलेक्टर एसपी रेलवे डीआरएम की राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग दिल्ली में पेशी के बाद इसमें तेजी आने की बात कही जा रही थी। आयोग ने भी इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कार्रवाई से आयोग को सूचित करने का भी फरमान जारी किया गया था। बताया जा रहा है कि इसी के बाद प्रशासन द्वारा आदिवासी जमीन खरीदी बिक्री मामले से जुड़े 72 प्रकरणों पर नोटिस जारी करते हुए जमीन वापसी करने का नोटिस जारी किया गया है। कुनकुनी में भूमाफियाओं द्वारा ग्रामीण आदिवासी किसानों की कृषि भूमि को छल कपट पूर्वक औने पौने दाम में अपने नौकरों के नाम पर बेनामी रूप से खरीद के उस पर रेल्वे साइडिंग सहित कोलवाशरी लगाने के प्रयास को उस वक्त झटका लगा जब उक्त मामले में हाईकोर्ट में याचिका कर्ता जयलाल राठिया की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। इसके बाद मृतक जयलाल राठिया के पूत्र ने इसे राष्ट्रीय अजजा आयोग के समक्ष गुहार लगाई।

आदिवासी किसानों की 300 एकड़ भूमि को भूराजस्व संहिता की धारा 170 (1),(2) बेनामी सम्पत्ति क्रय विक्रय अंतरण अधिनियम के तहत मूल भूमिस्वामी को वापसी के आदेश तात्कालिक आईएएस प्रभात मल्लिक द्वारा दिये जाने एवं बिना जाति प्रमाण पत्र के साथ अवैधानिक रूप से आदिवासियों की कृषि भूमि को गैर आदिवासियों द्वारा धोखाधड़ी करते हुए रजिस्ट्री कराए जाने की जांच तहसीलदार खरसिया से कराके अवैध पाए जाने पर लगभग 72 प्रकरण के अंतर्गत 200 एकड़ भूमि को मुल भूमिस्वामी को वापस करने के सम्बंध में एसडीएम न्यायालय खरसिया से सम्बंधित किसानों को आदेश जारी किया गया है।

16 और 19 जून को है तारिख

संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने खरसिया एसडीएम कोर्ट में 16 और 19 जून को बुलाया गया है। उनसे यह भी पूछा गया है कि आपके पास यह जमीन कैसे आई और कहां से खरीदी।

इन लोगों को हुआ नोटिस जारी

इस मामले में प्रमुख रूप से सप्तऋषि इंप्रᆬाटेक, संतराम राठिया, संतोष गौतम, श्रीकांत सोमावार का नाम प्रमुख रूप से शामिल है। इनमें शामिल सभी नाम कंपनियों से जुड़े हैं।

300 एकड़ से ज्यादा जमीन का है घोटाला

कुनकुनी मामले में 300 एकड़ से ज्यादा आदिवासी जमीन को गैर आदिवासियों ने गलत तरीके से खरीदकर कब्जा कर लिया था। नईदुनिया द्वारा मामले के खुलासे के बाद जिला प्रशासन ने भी तत्काल मामले की जांच कराई थी और उक्त लोगों को दोषी पाया गया था।

यहां से 73 लोगों को नोटिस जारी किया गया है और उन्हें 16 जून तक एसडीएम कोर्ट में उपस्थित होने कहा गया है ताकि उनका पक्ष जाना जा सके।

अभिषेक गुप्ता, एसडीएम, खरसिया ।

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Thursday, June 1, 2017

Adani group files FIR against agitators, tribals cry foul By Express News

Adani group files FIR against agitators, tribals cry foul

By Express News Service  |   Published: 02nd June 2017 05:38 AM  |  

Last Updated: 02nd June 2017 05:38 AM  |   A+A-   |  
Adani Group chairman Gautam Adani. (File | Reuters)
RAIPUR: Disregarding their own earlier assurance, Adani Enterprises has registered a first information report (FIR) against tribal people who are opposing the company’s efforts to carry out coal mining in their area.
The FIR, lodged by Ritesh Gautam, Adani’s general manager (land acquisition), sought a probe into the villagers’ agitation which, the complaint claimed, has “affected coal transportation and led to financial loss”.
The villagers had held a demonstration on May 27 and blocked a road that affected transportation of coal for over six hours. The district administration led by the local sub-divisional magistrate (SDM) then convened a meeting between the Adani officials and the agitating villagers to broker peace.
The villagers said the company promised to get back with a response to their grievances on June 3.  “How can the FIR be fair? We withdrew the demonstration following the company’s promise to look into our grievances,” the villagers said in a plea to the SDM with a request to act against the FIR.
When contacted, Ritesh Gautam refused to comment. “We are not authorised to speak to the media,” he said.
The Adani group company is attempting to mine coal in the area, having bagged a subcontract for the Parsa East-Kante Basin coal block from the Rajasthan Rajya Vidyut Nigam Limited, the  contractor engaged by the Ambikapur district administration in north Chhattisgarh.
As per the agreement, Adani Enterprises will work as mine developer-cum-operator through its subsidiary Adani Mining.
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सुकमा पुलिस ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नाम का उपयोग





सुकमा पुलिस ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नाम का उपयोग करके झूट फैलाया , पोडियाम पण्डा के बयान के खिलाफ उसकी पत्नी पोडियाम मुये के वकीलों को बदनाम करने के लिए गलत बयानी की .
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पिछले दिनों सुकमा पुलिस के में एएसपी  जितेन्द्र शुक्ल ने पोडियाम पण्डा द्वारा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अपने आत्म समर्पण के सम्बन्ध में बयान दिया ,लेकिन सुकमा के एएसपी द्वारा तुरंत ही न केवल वादियों के वकील से अभद्र व्यवहार किया बल्कि उसी दिन शाम को शोसल मिडिया पर और पुलिस विज्ञप्ति में लिखा की पडा ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में बयान दिया कि उसकी पत्नी को वकील सुधा भारद्वाज ,शालिनी गेरा ,ईशा खंडेलवाल और नंदनी सुन्दर ने  बंदी बना लिया है और इसकी शिकायत उसने पुलिस में भी की है .
दूसरे दिन ही  वकीलों  की संस्था आल इण्डिया लायर्स यूनियन ने प्रेस काफ्रेंस करके इसका खंडन भी किया और कहा की पुलिस वकीलों को डराना चाहती है जिससे कि वह आदिवासियों के पक्ष में खड़े न हों.

अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का उस दिन का  अंतिम आदेश प्राप्त किया गया है ,जिसमें पडा के बयान में एसा कहीं भी नही कहा गया है , " सलंग्न "

वकिलो ने इस अभद्रता की शिकायत सभी समुचित स्थानों पर कर दी है .
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कृपया आदेश पढ लीजिए .

सम्भावना के आधार पर भी आपको पशु की हत्या का दोषी मानकर पुलिस केस चला सकती हैं

सम्भावना के आधार पर भी आपको पशु की हत्या का दोषी मानकर पुलिस केस चला सकती हैं
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चलिए आपको छत्तीसगढ़ कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम , 2004 पढ़ते और उसके बारे में बताते है
इसकी धारा 6 के अनुसार ‘ कोई भी व्यक्ति किसी कृषिक पशु का इस अधिनियम के उपबंधो के उलंघन के प्रयोजन के लिये यह जानते हुए की उसका इस प्रकार से वध किया जायेगा या वध किया जाने की सम्भावना हैं आदि आदि पर अपराध कायम होगा .
इसका सक्षिप्त मतलब यह है की यदि आप कोइ कृषिक पशु को ले जा रहे अहि और किसी को यह शक हो गया की उसके वध की सम्भावना है तो वो आपके खिलाफ अपराध कायम हो जायेगा ,और इसी अधिनियम की धारा 11 में यह जिम्मेदारी आरोपी की होगी की वो यह सिद्द करे की उस जानवर के मारे जाने की संभावना नहीं हैं .तो यह गो भक्त को सिद्द नहीं करना हा की आपकी मंशा उस जानवर को मारने की नहीं है ,
कमाल का कानून होई की कोई भी भक्त किसी भी ऐसे किसान को पकड़ सकता है जो किसी भी कृषिक पशु [ सिर्फ गाय नहीं ] को कही भी ले जा रहा है भले ही वो पानी पिलाने ले जा रहा हो लेकिन वो भक्त कह देगा कि यह सम्भावना है की आप उसे कत्ल करने ले जा रहे हैं, और उसके लिया उसे कोई सबूत नहि दें हैं ,आपको ही कोर्ट में सिद्द करना पड़ेगा की मेरी मंशा उसे मारने की नहीं थीं.

वर्षा डोंगरे के खिलाफ एक बार कार्यवाही की फिर तयारी ,उन्होंने पिछले दिनों अपने फेसबुक पर यह लिखा था

वर्षा डोंगरे के खिलाफ एक बार कार्यवाही की फिर तयारी ,उन्होंने पिछले दिनों अपने फेसबुक पर यह लिखा था




ऐसा लगता है कि एक लोक सेवक जनता नहीं बल्कि सरकार का सेवक है । जबकि सरकार स्वयं जनता का सेवक है । इस तरह हम सबकी मालिक आम जनता है ।
सरकार ने हमें यह जमीन नहीं दी है बल्कि यह जमीन इस देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक नागरिक को स्वतः ही प्राप्त हो जाती है ।
गलत नितियाँ...जिससे आम जनता का अहित होता हो...के विरूद्ध बोलने की स्वतंत्रता देश के सभी नागरिकों का संवैधानिक मौलिक अधिकार है ।
लोक सेवक को पारिश्रमिक, जनता के टैक्सो द्वारा जमा किए गए पूंजी से प्राप्त होता है ना कि कोई शासन अपने स्वयं के जेब से देती है । इसलिए लोक सेवक की जवाबदेही और जिम्मेदारी जनता व शासन दोनों के प्रति होती है । शासन की नीतियों का पालन करने के साथ ही लोक सेवक का कार्य जनता के संवैधानिक संरक्षण सुनिश्चत करना भी है ।
हम अन्याय विरोधी हैं..सरकार विरोधी नहीं...
जय संविधान...जय भारत...