Thursday, May 4, 2017

शर्मिष्ठा चौधरी और भांगड़ आंदोलन के कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा करो


** शर्मिष्ठा चौधरी और भांगड़ आंदोलन के कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा करो
* आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज किये सभी झूठे इल्जाम वापस लो
* भांगड़वासियों के जमीन पर अधिकार सुनिश्चित करने में उनका साथ दो
* किसानों की जमीन की सुरक्षा करो! मतभेद रखने के अधिकार की सुरक्षा करो!
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साथियो,
तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व की सरकार और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा भांगड़, दक्षिण 24 परगना के लोगों पर जारी निष्ठुर दमन के खिलाफ एकजुट हों। 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के पारित होने के मात्र एक दिन पहले पश्चिम बंगाल की सरकार ने 1894 का कानून इस्तेमाल करके जबरदस्ती से साढ़े तेरह एकड़ जमीन हथियाकर पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को सौंप दी जिसने आन्दोलन और कोर्ट केसों के बावजूद वहां अपना काम शुरू कर दिया।

पिछले साल के मध्य में कम्पनी ने लोगों से सहमति लिए बगैर खेतों के बीच टावर खड़े करने शुरू किये जिससे लोगों का गुस्सा और भी तेज हो गया। गरीब किसानों के हजारों परिवार, जिनमें अधिकांश औरतें थीं, अपनी जमीन और आजीविका को बचाने के लिए एकजुट हुए। नूरजहां, निलोफर, छपिया के साथ-साथ तीन युवकों को भी तीन महीनों के लिए जेल में डाल दिया गया। ऊपर से राज्य शासन ने यूएपीए, एमपीए और पीडीपीए जैसे निष्ठुर कानून भी इन संघर्षरत लोगों पर थोप दिए। लोगों ने अपना शांतिपूर्ण विरोध जारी रखा और हर स्तर पर ज्ञापन दिए और विरोध प्रकट करने के लोकतांत्रिक तरीकों पर टिके रहे। पर राज्य सरकार और कंपनी ने अपना दमन जारी रखा। लोगों ने साथ आकर जोमी, जीबिका बस्तुतंत्र ओ परिवेश रक्षा कमेटी (जमीन, आजीविका, जैव विविधता और पर्यावरण सुरक्षा समिति) का गठन किया।

आपको तो अच्छे से मालूम है ही कि 3 नवम्बर 2016 से कमेटी और उसके नित नए कोलकाता और अन्य स्थानों से जुड़ने वाले समर्थक तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार और कंपनी के निशाने पर हैं। हर बार हमें यह याद दिलाना पड़ता है कि यह वही सरकार है जो नंदीग्राम और सिंगूर के संघर्षरत छोटे किसानों और भूमिहीन मजदूरों की हिमायती होने का दिखावा करके लोगों का वोट पाकर सत्ता में आयी है।

 एक अरसे से हम यह देखते आ रहे हैं कि जो भी दल लोगों के वोट लेकर सरकार बनाता है वह संघर्षरत लोगों से मुंह मोड़ लेता है। पर तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व की सरकार ने तो भांगड़ के आन्दोलन को दबाने की हैवानियत में सबको पछाड़कर लोकतंत्र नष्ट करने का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया।

यौनिक हिंसा और राजकीय दमन के विरुद्ध औरतें (डब्ल्यूएसएस) उनके साथ खड़ी है जो जमीन और उसके जरिये अपने आजीविका के हक की मांग कर रहे हैं! जो लोग कंपनियों के विरुद्ध संघर्ष में उनका साथ निभा रहे हैं! जो जिला अधिकारियों और राज्य सरकार से वार्ता करना चाहते हैं! और जो बहुराष्ट्रीय और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के बारे में सवाल उठा रहे हैं। भांगड़ के लोगों जैसे डब्ल्यूएसएस का भी यही मानना है कि विकास के किसी भी मॉडल के केंद्र में आम जनता होना चाहिए! हमें एक क्षण के लिए भी यह नहीं भूलना चाहिए कि इस अत्यंत गरीब और मुख्यतया खेतिहर इलाके में जमीन ही अधिकांश लोगों के लिए उत्पादन का साधन है।


छोटे किसान एक आत्मनिर्भर तबका हैं जो आज कड़ी मुश्किलें झेल कर उत्पादन कर रहे हैं जहाँ नीतिगत बदलाव कृषि क्षेत्र को कुचलकर करोड़ों किसान परिवारों का जीवन बर्बाद कर रहे हैं। जमीन की लूट के चलते इन छोटे किसानों की स्वतंत्रता खत्म हो रही है और जमीन पारिस्थितिकी विनाश के घोर अन्धकार में पहुँच रही है। जबरन जमीन लिए जाने का विरोध करके भांगड़ के लोग शीर्ष से लादी जाने वाली विकास व्यवस्था के विरोध को भी मूर्त रूप दे रहे हैं जिसके चलते लोगों का अलगाव और त्रासदी बढ़ रही है। जमीन की लूट का विरोध करके भांगड़ के लोग जैव विविधता और पर्यावरण की रक्षा इस धरती पर कर रहे हैं जहाँ हम सभी रहते हैं। उनका संघर्ष हम सब ऐसे लोगों का संघर्ष है जो एक निरामय समाज धरती चाहते हैं।

हमारी मांगे हैं:
शर्मिष्ठा चौधरी व उनके साथ गिरफ्तार किये गए पंद्रह लोगों को तुरंत रिहा किया जाये।
17 जनवरी को मारे गए मोफिजुल खान और अलमगीर मुल्ला के कत्ल की निष्‍पक्ष  सीबीआई जांच कराई जाये।
भांगड़ में लगायी गयी इमरजेंसी जैसी परिस्थिति को बदला जाये और वहां पर आर्थिक गतिविधि पर लगी अनकही रोक हटाई जाये। निवासियों को हरदम परेशान न किया जाये।
भांगड़ के लोगों के साथ जिलाधिकारी वार्ता करें।
यूएपीए, एमपीए और पीडीपीए जैसे निष्ठुर कानून रद्द हों।
भांगड़ और समीप के इलाकों में राजनैतिक कार्यकर्ताओं को धमकाना और परेशान करना रोका जाये।

धमकियों, लाठी करफ्यू और गिरफ्तारियों से लोगों के इरादों को नहीं दबाया जा सकता
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कुणी सिकका, दोधी सिकका और परिवार , प्रणब डोले, सोनेस्वर नरह को तुरंत रिहा किया जाये





कुणी सिकका, दोधी सिकका और परिवार , प्रणब डोले, सोनेस्वर नरह को तुरंत रिहा किया जाये और उनपर लगाये गए सभी झूठें आरोप रद्द किये जाये..
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नियामगिरी (ओडीसा) मे कुणी सिकका कि अवैध गिरफ्तारी और पुरे परिवार को फर्जी सरेंडर के तहद फ़साने की शाजिश का विरोध करे..

असम में प्रणब डोले, सोनेस्वर नरह की पुनः गिरफ़्तारी और जिपल कृषक श्रमिक संगठन के साथियों पर लगाये फर्जी आरोपों और प्रताड़ना का विरोध करे..

विकास और अभयारण्यो के नाम पर जबरन विस्थापन एवं जन विरोधी विकास नीतियों का विरोध करे और जनतांत्रिक विकास प्रक्रिया के निर्माण में आन्दोलन को तेज करे..

नियामगिरी (ओड़िसा): अवैध गिरफ़्तारी, फर्जी सरेंडर और एनकाउंटर - कॉर्पोरेट लुट के लिए डोंगरिया कोंध पर दमन का दौर..

नियामगिरी आंदोलन एक सफल जन आंदोलन है, जिसकी मांगों की वैधता भारत के बड़े नागरी समाज और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी मानी गयी है। क्षेत्र के लोगों द्वारा लगातार प्रतिरोध ने वेदांता जैसी शक्तिशाली बहुराष्ट्रीय कंपनी को पीछे हटने के लिए मजबूर किया है। यह सभी विरोध लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर ही रहे है।

पर सरकार लोगों के इस लोकतान्त्रिक आंदोलन को बल प्रयोग और हिंसा से दबाने का पूरा प्रयास कर रही है. नियामगिरी क्षेत्र में लोगों को मारपीट, झूठें आरोपों में गिरफ़्तारी, फर्जी मुकदमें डाल कर खनन के खिलाप के प्रतिरोध को दबाने का पूरा प्रयास सरकार कर रही है. हाल ही में नियामगिरी सुरक्षा समिति को माओवादी संगठन द्वारा चलाये जाने का बेबुनियाद आरोप भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने किया है. इसके तहद लोगो के आन्दोलन को दबाने के लिए अपने किसी भी हिंसक कार्यवाही को सरकार सही करार देने का रास्ता बना रही है.

सरकार के इन्ही दमनकारी अजेंडे के तहद १ मई के रात CRPF और रायगडा जिल्हे के पुलिस ने नियामगिरी के गरता गाव में आकर कुणी सिकका (उम्र २० साल) को उसके घर से लेके गए. उस समय कोई भी महिला पुलिस भी उपस्थित नहीं थी. कुणी सिकका नियामगिरी सुरक्षा समिति के नेता दधि पुसिका (उम्र ६२ वर्ष) की बहु है और आन्दोलन के दुसरे अन्य प्रमुख नेता लाधो सिकका की वोह भांजी है.

कुणी सिकका की इसा अवैध गिरफ़्तारी के खिलाफ पुरे देश भर से विरोध प्रदर्शित किया गया. ३ में को कुणी को पुलिस थाने से छुड़ाने के लिए लाधो पुसिका और उन्हका परिवार रायगडा गया. पर वहा पर पुलिस ने कुणी और उसके परिवार के ऊपर माओवादी होने का आरोप लगाकर उन्हें धमकाया. ३ मई को रायगडा SP ने कुणी सिकका, उसका पति जोगिली पुसिका, नियामगिरी आन्दोलन के नेता दधि पुसिका, और अन्य साथ गए ग्रामीणों को खूंखार माओवादी बताकर उन्हके द्वारा पुलिस के सामने सरेंडर किया है ये प्रेस विज्ञप्ति जारी की.

दधि सिकका नियामगिरी आन्दोलन के शीर्ष नेता है और वेदांता कंपनी को खदान आवंटन के खिलाफ में आन्दोलन को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्हें और उनके परिवार, अन्य ग्रामीणों और आन्दोलन के साथियों को इस तरफ फर्जी सरेंडर में फसाकर सरकार नियामगिरी में चल रहे आंदोलन को दबाकर खनन का रास्ता साफ करना चाहती है.

इसके पहले भी नियमगिरि क्षेत्र में लोगो को डराने के लिए, नियामगिरी आन्दोलन को दबाने के लिए ऐसे ही हिंसक घटनायों को सरकार ने अमल में लाया है. नियामगिरी आन्दोलन में सहभागी कार्यकर्ता यों पर फर्जी मुकदमे दायर कर उन्हें जेलों में डाल कर रखा है. लोगो में दहशत फ़ैलाने के लिए फर्जी एनकाउंटर किये गए है. (नियामगिरी में चल रहे दमन की वास्तविकता को जानने हेतु विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन द्वारा २०१६ में एक जाँच रिपोर्ट बनायीं गयी थी. वह रिपोर्ट साथ में जोड़ी है.)

नियामगिरी सुरक्षा समिति के नेता दधि पुसिका, कुणी सिकका और अन्य को पुलिस में माओवादी घोषित कर फर्जी सरेंडर करवाया. उन्हें अपमानित किया गया. यह राज्यसत्ता द्वारा नियामगिरी के लीगो पर की गयी हिंसा ही है.

(इस घटनासे सम्बंधित जानकारी के लिय पढ़े - http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tpotherstates/controversy-over-surrender-of-alleged-maoist/article18380748.ece )

असम: विस्थापन, हत्याए और जन आंदोलनों पे दमन..

असम के काजीरंगा क्षेत्र में अभयारण्यो के विस्तार के नाम पर आदिवासी एवं अन्य समुदायों से उन्हकी जमीन छिनी जा रही है. जंगल पर और वन संसाधनों पर स्थानिको के नैसर्गिक अधिकारों को समाप्त किया जा रहा है. अपनी आजीविका और संस्कृती की रक्षा में वनों पर आश्रित आदिवासी समुदायों को उन्ही जंगलो से खदेड़ा जा रहा है, उन्हें जबरन विस्थापित किया गया जा रहा है. पिछले कुछ सालों में शेकड़ो व्यक्तियों को जंगल में घुसपैठ करने के झूठें आरोपों में फर्जी एनकाउंटर में मारा गया है.

जिपल कृषक श्रमिक संगठन इस क्षेत्र में आदिवासी समुदाय के अधिकार और उन्हपर हो रहे दमन का प्रतिरोध कर रहे है. फर्जी एनकाउंटर और हत्यायों के खिलाप लोगों को संगठित कर आवाज उठा रहे है. उन्हों ने हाल ही में जबरन विस्थापन और हत्यायों के खिलाफ धरने का आयोजन किया था. सरकार ने लोगो के इस संगठित प्रतिरोध को दबाने के लिए आंदोलन में सहभागी कार्यकर्तायों पर फर्जी आरोप लगाकर उन्हें जेल में दल रखा है. जिपल कृषक श्रमिक संगठन के साथी प्रणब डोले और सोनेस्वर नरह २४ अप्रिल २०१७ से हिरासत में है. जमानत की अर्जी दो बार ख़ारिज की गयी गई. जान बुझकर पुलिस स्टेशन डायरी और अन्य दस्तावेज कोर्ट के सामने रखने में देरी कर रही थी जिससे जमानत मिलाने में देरी हो. उन्हपर धारा १४७, ४४७, ५५३ और ५०६ के तहद आरोप लगाये थे. ०४.०५.२०१७ को प्रणब और सोनेस्वर को तमानत मिलाने के बाद में फिरसे गिरफ्तार किया गया. इस गिरफ़्तारी का हम विरोध करते है.

(इस घटनासे सम्बंधित जानकारी के लिय पढ़े - http://www.kractivist.org/assam-arest-of-activists-soneswar-narah-and-pranab-doley-and-brutal-lathicarge-on-the-protesters-mediablacksout/ )

सिर्फ कुछ घटनाए नहीं, ये दमन की एक व्यापक रणनीति है..
इसके खिलाफ संगठित प्रतिरोध जरुरी है..

यह सरकार की एक सोची समझी रणनीति है जिससे सत्ता, अपने प्राकृतिक आवास और संविधानिक अधिकारों की रक्षा में संघर्ष कर रहे आदिवासियों और शोषित समुदायों के प्रतिरोध के स्वरों को दबाने का काम करती है. यह समय है कि, वास्तविकता में लोकतंत्र और संविधानिक अधिकारों का समर्थन कर रहे जन आंदोलनो को दबाने के लिए दमनकारी तरीकों की खोज करने की बजाये सरकार ने राजनीतिक समाधानों की तलाश करनी चाहिए और अपनी नीतियों में खामियों की जांच करनी चाहिए.

हम देशभर के तमाम संघर्षरत संगठनो, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, कार्यकर्तायों और जनता से अपील करते है, की वे सरकार द्वारा किये जा रहे इन्ह दमनकारी, लोकतंत्रविरोधी नीतियों का विरोध करे. जनसंगठनों के कार्यकर्ता और उससे जुड़े व्यक्तियों पर दायर फर्जी मुकदमो, आरोपों और जबरन करवाए जा रहे फर्जी आत्मसमर्पण, हत्यायों की निंदा करे. उसका खंडन करे. और आदिवासी एवं अन्य समुदायों के किये जा रहे जबरन विस्थापन और शोषणकारी विकास के एजेंडे के विरोध में जनतांत्रित संघर्ष को मजबूत बनाये.

हम फिर से, किसी भी तरह के असंतोष को दबाने के लिए लोगों के जन आंदोलनों को लेबल करने की राज्य के इस दमनकारी कृत्य की निंदा करते हैं। और हम लोगों के साथ संघर्ष में खड़े रहने की विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराते है. जन विरोधी विकास योजनाओं के चलते हुए अन्याय के खिलाफ, हम सभी प्रकार के विस्थापन के खिलाफ हमारे एकजुट संघर्ष को आगे बढ़ाएंगे, ताकि भूमि और संसाधनों पर दलितों, आदिवासियों, किसानों, मजदूरों के अधिकार को प्रस्तापित कर सुरक्षित रखने के संघर्ष को आगे बढ़ा पाए.

जारीकर्ता:

विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन
( विस्थापन नही, विनाश नही, विपन्नता नही, मौत नही, पुनर्वास नही, बदलाव हो - समानता और न्याय आधारित)

केंद्रीय संयोजक समिति:

त्रिदिप घोष, प्रशांत पैकराय, माधुरी जी, दामोधर तुरी, जे. रमेश, महेश राउत

एवम् स्टीयरिंग कमेटी और संलग्नित राज्य इकाईया.

केंद्रीय कार्यालय: सरई टांड, मोरहाबादी, पोस्ट रांची विश्वविद्यालय, रांची, झारखंड 834008

संपर्क:
 janandolan@gmail.com
8757579898,9437571547,

गुजरात जससंघार के दोषी एक एक कर सामने आयेंगे ,किसी को भले कुर्सी मिली ही ,




कुछ शर्म बांकी है ....
गुजरात जससंघार के दोषी एक एक कर सामने आयेंगे ,किसी को भले कुर्सी मिली ही ,लेकिन बचेगा कोई नही.
किसी को अभी किसी को कभी सजा मिलेगी जरुर .
**

2002 गुजरात दंगो में बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया,उनके परिवार के 14 लोगों को उनके सामने कत्ल कर दिया गया,उसके दूध मुहे बच्चे को कुचल का मार दिया गया .
पुलिस के आईपीएस  अफसर से लेकर डाक्टर तक सारे तथ्य मिटाने और रिपोर्ट तक लिखने में दंगइयो के साथ मिलीभगत सिद्द हुआ.
पूरे 11 लोगो के लिए सीबीआई ने फांसी की मांग की ,कोर्ट ने सभी 11 को आजीवन करवास की सज़ा बरक़रार रखी और पुलिस अधिकारियों तथा डाक्टर को अपराध में दोषी माना
गुजरात में  मोदी मुख्य मंत्री थे ,उनके राज्य में ईमानदारी से कोर्ट निर्णय नही दे सकता इसलिए यह केस मुंबई ट्रांस्फर किया गया .
**
कल निर्भया कांड के दोषियो को फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट निर्णय देगा .
**
इन हत्यारों बलात्कारियो में क्या कोमन है , में बताऊ या आप खुद समझ जायेंगे .
यह सभी एक ही धर्म के मानने वाले है और भक्ति में लीन लोग जान ले की इन सब में एक भी मुस्लिम ,इसाई ,या कोई और नही है.
सब आपके ही ......
***

गुजरात जससंघार के दोषी एक एक कर सामने आयेंगे ,किसी को भले कुर्सी मिली ही

कुछ शर्म बांकी है ....
गुजरात जससंघार के दोषी एक एक कर सामने आयेंगे ,किसी को भले कुर्सी मिली ही ,लेकिन बचेगा कोई नही.
किसी को अभी किसी को कभी सजा मिलेगी जरुर .
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2002 गुजरात दंगो में बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया,उनके परिवार के 14 लोगों को उनके सामने कत्ल कर दिया गया,उसके दूध मुहे बच्चे को कुचल का मार दिया गया .
पुलिस के आईपीएस  अफसर से लेकर डाक्टर तक सारे तथ्य मिटाने और रिपोर्ट तक लिखने में दंगइयो के साथ मिलीभगत सिद्द हुआ.
पूरे 11 लोगो के लिए सीबीआई ने फांसी की मांग की ,कोर्ट ने सभी 11 को आजीवन करवास की सज़ा बरक़रार रखी और पुलिस अधिकारियों तथा डाक्टर को अपराध में दोषी माना
गुजरात में  मोदी मुख्य मंत्री थे ,उनके राज्य में ईमानदारी से कोर्ट निर्णय नही दे सकता इसलिए यह केस मुंबई ट्रांस्फर किया गया .
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कल निर्भया कांड के दोषियो को फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट निर्णय देगा .
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इन हत्यारों बलात्कारियो में क्या कोमन है , में बताऊ या आप खुद समझ जायेंगे .
यह सभी एक ही धर्म के मानने वाले है और भक्ति में लीन लोग जान ले की इन सब में एक भी मुस्लिम ,इसाई ,या कोई और नही है.
सब आपके ही ......
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"आप" कार्यकर्ताओं ने बुर्कापाल जाकर शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि, शांति वार्ता प्रारंभ करने की मांग







"आप" कार्यकर्ताओं ने बुर्कापाल जाकर शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि, शांति वार्ता प्रारंभ करने की मांग

आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा सुकमा जिले के बुर्कापाल के मुठभेड़ स्थल में जाकर सीआरपीएफ के 25 शहीद जवानों को कल 2 मई को श्रद्धांजलि दी गई । इस हेतु आम आदमी पार्टी के के कार्यकर्ताओं का राज्य स्तरीय दल आप नेत्री सोनी सोरी एवम सुकमा के पूर्व सीजीएम प्रभाकर ग्वाल के नेतृत्व में बुर्कापाल स्थित सीआरपीएफ केम्प पहुंचा । आप की टीम ने  दोरनापाल से बुर्कापाल के बीच रास्ते में पड़ने वाले 5 सीआरपीएफ केम्प और 2 पुलिस थाना में तैनात जवानों से मुलाकात की ।  बुर्कापाल के 74बटालियन  सीआरपीएफ केम्प के डिप्टी कमाडेंट से मिलकर शहीद जवानों के प्रति अपनी गहन संवेदना व्यक्त की । इस दल में रायपुर से आप नेता डॉ संकेत ठाकुर, महिला विंग प्रमुख दुर्गा झा, दंतेवाड़ा से सुकल प्रसाद नाग, बीजापुर से  तिरुपति येलम, सुकमा से रामदेव बघेल एवं गीदम से लिंगाराम कोडोपी सहित 10 कार्यकर्ता शामिल थे । उल्लेखनीय है कि माओवादियों के गढ़ में जाकर सुरक्षाबलों से मिलने वाली सामाजिक-राजनैतिक संस्थाओं में से आम आदमी पार्टी पहली संस्था है जिसने बुर्कापाल के मुठभेड़ स्थल ग्राउंड ज़ीरो पर जाकर शहीदों की स्मृति में उन्हें मोमबत्ती जलाकर श्रद्धान्जलि दी । घटनास्थल का अवलोकन करते हुए पेड़ो पर गोलियों  के निशान पाये गये ।

आप टीम की मुलाकात बुर्कापाल के ग्रामीणों से हुई जिन्होंने बताया कि गांव के पुरुष गांव छोड़कर अज्ञात स्थान में चले गये है । 6 पुरुषो को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, इनमें से एक की पत्नी जोगा हेमला ने बताया कि वह गर्भवती है और गर्भ से बच्चा आने को है लेकिन वह भीषण दर्द की वजह से चलने में अपनेें को अक्षम पा रही है । बेहद दुर्गम रास्ता होने की वजह से उसने आप टीम के साथ चलने में अपनी असमर्थता जताई । अतः आप नेत्री सोनी सोरी ने जिला प्रशासन से एम्बुलेंस भेजकर प्रसव गांव में करवाने का निवेदन किया है ।

कर्तव्य के दौरान शहीद होने पर प्रत्येक जवान के परिवार को दिल्ली सरकार द्वारा रु  एक करोड़ की सहायता राशि दी जाती है । इसी तर्ज पर आम आदमी पार्टी ने छत्तीसगढ़ सरकार से बुर्कापाल के प्रत्येेक शहीद जवान के परिवारों को एक-एक करोड़ की सहायता राशि देने की मांग की है ।
आपनेत्री सोनी सोरी ने कहा कि बस्तर में हिंसा का दौर समाप्त होना अब अत्यंत आवश्यक हो गया है । माओवादियों और सुरक्षाबलों के संघर्ष में सबसे ज्यादा पीड़ित आदिवासी हो रहे है । दहशत में  गांव के गांव खाली हो रहे है, बुर्कापाल और चिंतागुफा लगभग वीरान हो गयेहै । अतः बस्तर में शांति लाने राज्य  सरकार तत्काल शांतिवार्ता हेतु आदिवासियों, जनप्रतिनिधियों एवम माओवादियों को जोड़कर आवश्यक पहल करे ।

आम आदमी पार्टी
छत्तीसगढ़

Wednesday, May 3, 2017

एक शहीद के बेटे की चिट्ठी: 'मरते हैं पिता, बचते हैं देश?'


एक शहीद के बेटे की चिट्ठी: 'मरते हैं पिता, बचते हैं देश?'



'कैसी व्यवस्था है जिसमें सैनिक यूं ही मार दिए जाते हैं और हम नमन और गर्व से काम चला लेते हैं'

Pradeep Awasthi | Published On: May 03, 2017 07:54 AM IST | Updated On: May 03, 2017 08:30 AM IST

एक शहीद के बेटे की चिट्ठी: 'मरते हैं पिता, बचते हैं देश?'
मेरे पिता चले गए... कुछ दिन पहले सुकमा में कुछ पिता, भाई, बेटे चले गए और ये लिखना शुरू करने से पहले कश्मीर में दो और जवान चले गए. आगे भी जाते रहेंगे.
यकीन मानिए. ये बात सुनने में खराब लग सकती है लेकिन ये हकीकत है. साल 2007 का नवंबर महीना था. गुवाहाटी के सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर से गुवाहाटी स्टेशन जाते हुए मेरे पिता और उनके साथियों पर घात लगाकर हमला किया गया जिसमें सब मारे गए. हमला उल्फा वालों ने किया था. मेरे पिता सीआरपीएफ में थे.
घटना सुबह 10 बजे हुई थी. उन्होंने सर्विस पूरी होने से एक साल पहले रिटायरमेंट ले ली थी. वे लौट रहे थे. 31 अक्टूबर को पार्टी दी थी अपनी बटालियन के लोगों को. उनके साथ जो लोग थे, वे उन्हें विदा करने स्टेशन तक जा रहे थे.
रास्ते में हाफलोंग नाम का एक पहाड़ी इलाका पड़ता है. वहां उन सबको मार दिया गया. तब मैं 21 साल का था. गाजियाबाद के कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था. घर पर फोन आया होगा. मेरे पास रात साढ़े आठ बजे फोन आया. बस इतना बताया गया कि पापा नहीं रहे. पूरी रात मैं सो नहीं पाया और इस बात का ठीक-ठीक मतलब समझने की कोशिश करता रहा. बहुत रोया.
अगली दोपहर घर पहुंचकर मां की गोद में सिर रखकर जाने कितनी देर रोता रहा. पिता ने पूरी जिंदगी घर से दूर बिता दी. वे हमेशा के लिए लौट रहे थे लेकिन घर लौटा उनका शव वो भी घटना के तीन दिन बाद.
घटना की दर्दनाक यादें
Naxal-Attack
प्रतीकात्मक तस्वीर
मैं अक्सर सोचने की कोशिश करता रहा कि क्या हुआ होगा उस दिन वहां पर. उनको चार गोलियां लगी थीं. एक माथे पर, एक सीने पर बाईं तरफ, एक पेट पर और एक दाईं जांघ में. उनका शरीर फूलकर भारी हो गया था. ये पहला शव था जो मैंने अपने जीवन में देखा था.
आस-पास लोग बातें कर रहे थे कि ऐसे हमलों में शरीर के अंग भी काटकर ले जाते हैं. ये उनके साथ नहीं हुआ था. उनकी पैंट की चोर जेब में 20,000 रुपये थे. हजार-हजार के 20 नोट जो खून से सन गए थे.
मैं तेरह दिन घर पर रुका रहा फिर लौट आया. उसके बाद से उनके सपने आते रहे जिनमें वे घायल हालत में घर लौटते थे. इतने साल बीतने पर वे सपने भी आने बंद हो गए. उनके न होने से बहुत कुछ अधूरा छूट गया.
वो 2007 का साल था और ये है साल 2017. क्या कुछ भी बदला है? मैं बदला लेना चाहता था लेकिन किससे लेता. क्या बदला लेता और कैसे?
ये एक व्यवस्था है जिसने कभी दो अनजान लोगों को तो कभी दो अनजान गुटों को एक दूसरे का दुश्मन बनाकर आमने सामने खड़ा कर दिया है और उनके हाथों में जानलेवा हथियार भी हैं.
इतने सालों में मेरा गुस्सा बेबसी में बदलकर शांत हो चुका है. यही सवाल मन में उठता रहा कि देश के लोगों के मरने से उनके घर उजड़ने से कौन सा देश बच रहा है?
यदि छाती पीटने वाली अंध देशभक्ति से बाहर आकर सोचें तो मुझे नहीं लगता कि कोई भी इंसान दो देशों के बीच इस तरह युद्ध की बात कर पाएगा जैसे सातवीं-आठवीं क्लास के दो लड़कों की लड़ाई हो.
असली हथियारों से असली के जीते जागते लोग मारे जाते हैं. इसलिए जब तक बचा जा सकता है बचा ही जाना चाहिए. हमारे सवाल सरकारों की तरफ होने चाहिए. आप पर भरोसा करके चुनते हैं हम तो राजनीतिक हल क्यों नहीं निकलता इन संघर्षों का?
हम इन खबरों से भी कैसे मुंह मोड़ें जो आए दिन आती हैं बस्तर से..छत्तीसगढ़ से जहां सुरक्षा बल आदिवासियों को प्रताड़ित करते हैं. बलात्कार किया जाता है उनकी औरतों का. हम कैसे न बात करें कि कभी सोनी सोरी की योनि में पत्थर डाल दिए जाते हैं तो कभी उसका चेहरा बिगाड़ दिया जाता है.
इन हमलों पर हम सरकार से सवाल क्यों नहीं करते?
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर
इनपर होते अत्याचारों की खबर पढ़ते हुए गलत क्यों नहीं लगता? इनके मरने पर क्यों नहीं लगता कि देश का नागरिक मरा है. हम इस पर भी क्यों न यकीन करें कि सरकारें चाहती ही नहीं कि इन मुद्दों का कोई हल निकले.
आखिरकार असम में उल्फा के लीडर्स को भी सत्ता में शामिल होने का मौका मिला. जो करोड़ों रुपये इस लड़ाई के नाम पर खर्च होते हैं वो किसकी जेब में जाते हैं. आखिर हम कैसे सवाल न करें.
वहीं दूसरी तरफ ये बर्बर हिंसा है जो अभी सुकमा में देखने को मिली. शोषण सत्ता करती है और जवाब में मारे उसके नुमाइंदे जाते हैं. कोई दस मारता है तो कोई जवाब में बीस मारता है.
ये कैसी व्यवस्था है जिसमें अपने घर वालों का पेट भरने के लिए नौकरी करते सैनिक या सुरक्षा बल यूं ही मार दिए जाते हैं और हम हर बार नमन और गर्व से काम चला लेते हैं.
हम पूछते क्यों नहीं सरकारों से कि बताइए आप कब कोई हल ढूंढ पाएंगे? क्या कभी शांति स्थापित हो पाएगी इन इलाकों में? अपनी पूंजीवादी व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए जो शोषण जरूरत बन गया है उसे आप रोकेंगे? किसे सही कहें, किसे गलत?
जब भी हमारे जवानों के मरने की खबर आती है तब मुझे मेरे पिता याद आते हैं. याद आती है बेबसी कि यूं ही उजड़ गये और कितने घर.
(लेखक के पिता सीआरपीएफ में थे और 2007 में हुए एक उग्रवादी हमले में शहीद हो गए थे)

भांगड़ में चल रहे आंदोलन में राज्य सरकार समर्थित दमन बंद हो।



 भांगड़ में चल रहे आंदोलन में राज्य सरकार समर्थित दमन बंद हो।
* पावर ग्रिड प्रोजेक्ट तुरंत बद हो।
* भांगड़ संघर्ष समिति के काॅ. प्रदीप सिंह  ठाकुर, काॅ. शर्मिष्ठा चैधरी, काॅ. शंकर दास, काॅ. कुशल देबनाथ व संघर्ष समिति के अन्य 16 सदस्यों को अविलंब निशर्त रिहा करो और यूएपीए को निरस्त करो।

** तमाम वाम व प्रगतिशील ताकतों के द्वारा 8 मई 2017 को कोेलकाता पश्चिम बंगाल में आयोजित राजभवन मार्च को सफल बनायें।
** 8 मई 2017 को दोपहर 3 बजे बुढ़ातालाब, रायपुर में धरना-प्रदर्शन
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* भांगड़ किसान आंदोेलन सहायक समिति की बैठक संपन्न.

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रायपुर, 03 मई 2017। पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना में चल रहे भांगड़ आंदोलन के साथ एकता प्रदर्शित करने हेतु भांगड़ जन आंदोेलन सहायक समिति की राज्य स्तरीय कार्यकारिणी समिति की बैठक शंकरनगर, रायपुर में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता नदी घाटी मोर्चा छत्तीसगढ़ के संयोजक गौतम बंद्योपाध्याय व संचालन क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच के अखिल भारतीय संयोजक व ’’विकल्प अवाम का घोषणापत्र’’ पत्रिका के संपादक तुहिन ने किया।

 इस अवसर पर प्रदीप सुबेदार, कलादास डहरिया, सी.पी.आई (एम.एल) रेड स्टार के छत्तीसगढ़ राज्य सचिव काॅ. सौरा यादव, काॅ. सुरेन्द्र महन्ति, काॅ. दीपा, काॅ. तेजराम विद्रोही, काॅ. गोरखनाथ, काॅ. मृदुलसेनगुप्ता, स्वाति मानव, जीतू ठाकुर, व विनोद ने अपने विचार रखे।

बैठक में सर्वसम्मति से भांगड़ किसान आंदोेलन सहायक समिति छत्तीसगढ़ से काॅ. दीपा व काॅ. गौतम बंधोपाध्याय को संयोजक नियुक्त किया गया। साथ ही आगामी 8 मई 2017 को दोपहर 3 बजे बुढ़ातालाब, रायपुर के पास धरना स्थल में  भागड़ जन आंदोलन सहायक समिति छत्तीसगढ़ द्वारा धरना व प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में निम्न प्रस्ताव पारित किए गए
1. भांगड़ में चल रहे आंदोलन में राज्य सरकार समर्थित दमन बंद हो।
2. पावर ग्रिड प्रोजेक्ट तुरंत बद हो।
3. भांगड़ संघर्ष समिति के काॅ. प्रदीप सिंह  ठाकुर, काॅ. शर्मिष्ठा चैधरी, काॅ. शंकर दास, काॅ. कुशल देबनाथ व संघर्ष समिति के अन्य 16 सदस्यों को अविलंब निशर्त रिहा करो और यूएपीए को निरस्त करो।

4. तमाम वाम व प्रगतिशील ताकतों के द्वारा 8 मई 2017 को कोेलकाता पश्चिम बंगाल में आयोजित राजभवन मार्च को सफल बनायें।

इस अवसर पर काॅ. सौरा ने बंगाल के भांगड़ किसान आंदोलन पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि पष्चिम बंगाल में ममता बेनर्जी के नेतृत्व वाली मैजूदा तृणमूल कोंग्रेस की सरकार 34 साल लंबे वाममोर्चा सरकार के खिलाफ सिंगुर और नंदीग्राम में किसानों का विस्थापन का मुद्दा उठाकर सŸाा में आयी है। तब सिंगुर में टाटा और नंदीग्राम में सलेम ग्रुप को जमीन देने के लिए किसानों का बड़े पैमाने पर विस्थापन किया जा रहा था और जबरिया भूमि अधिग्रहण करने के लिए राजकीय दमन का सहारा लिया गया था, जिसमें कई किसानों को अपनी जान गवानी पड़ी, सैकड़ो घायल हुये थे। उस समय  सत्तासीन वाम मोर्चा सरकार को अपने निर्णय को वापस लेते हुये विस्थापन के कार्यवाही को रोकना पड़ा था। लेकिन आज ममता सरकार के नेतृत्व में दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर क्षेत्र में बनाये जा रहे 400 किलोवाट के पावर ग्रिड के खिलाफ संघर्ष कर रहे गरीब किसानों पर सिंगुर और नंदीग्राम से भी बदतर रूप में दमन को दोहराया जा रहा है।

17 जनवरी को हुयी पुलिस फायरिंग में दो ग्रामीण मोफीज्जुल षेख और आलमगीर मोल्ला मारे गए, कई लोग घायल हो गए और कुछ लोगों का आज तक पता नहीं चल पाया है।

पावर ग्रिड का विरोध करने के लिए बनायी गयी ’’जमीन, जीविका और पर्यावरण रक्षा समिति’’ के नेतृत्वकारियों व भाकपा (माले) रेड स्टार के शीर्श नेताओं काँ. प्रदीप सिंह ठाकुर और काँ. शर्मिष्ठा चैधरी, षहनवाज मोल्ला सहित कई अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया हैं, जबकि अन्य कई नेताओं की गिरफ्तारी के प्रयास किया जा रहा है।समिति के नेताओं पर हत्या, लूट, आगजनी जैसे गंभीर आरोपों के तहत कार्यवाही की जा रही है, जबकि 17 जनवरी के हमले में पुलिस तथा पुलिस वर्दी में बाहर से आये तृणमूली गुण्डों पर कोई कार्यवाही नहीं कि गई है। क्षेत्र के हजारों गरीब किसानों द्वारा पुलिस और तृणमूल कांग्रेस के गुण्डों द्वारा किये जा रहे हमलों और दमन के खिलाफ संघर्श करते हुये अपने नेताओं की रिहाई की मांग कर रहें है।

भांगड़ आंदोलन के साथियों केा सभी प्रगतिषील लोगों द्वारा साथ दिया जाना चाहिए ताकि सम्राज्यवादी ताकतें  हावी न हो सके।

 गौतम बंद्योपाध्याय ने बताया कि ओपीडीआर की टीम के साथ 5 तारीख को मैने भांगड़ का दौरा किया था वहां कि हालत चिंताजनक है। वहां का आंदोलन नंदीग्राम का दुहराव जैसा ही है। हम नंदीग्राम व सिंगुर के आंदोलन से सबक लेकर किसानों के आंदोलन को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
इस अवसर पर भांगड़ किसान आंदोेलन सहायक समिति छत्तीसगढ़ ने तमाम प्रगतिशील, जनवादी, जनविज्ञान संगठनों के बुद्धिजीवियों सहित सामाजिक कार्यकर्ताओं व छात्र-छात्राओं से 8 मई को आयोजित धरना स्थल में  उपस्थित होकर जमीन, आजीविका व पर्यावरण की रक्षा के लिए चलाये जा  रहे  भांगड़ तथा छत्तीसगढ़ में चल रहे जन आंदोलनों के समर्थन में खड़े होकर सफल बनाने की अपील की है।
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