Wednesday, November 12, 2014

इतना विरोध कि लोगों ने खुद बंद कर ली दुकानें

इतना विरोध कि लोगों ने खुद बंद कर ली दुकानें

Resistance so that the people themselves have closed shops


Resistance so that the people themselves have closed shops
11/13/2014 4:33:55 AM
बिलासपुर। नसबंदी ऑपरेशन में लापरवाही और महिलाओं की मौत को लेकर इतना विरोध रहा कि लोगों ने अपनी दुकानें खुद ही बंद कर दी। विरोध प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस ने बुधवार को नगर बंद का आह्वान किया था, जिसका मिलाजुला असर रहा। गोलबाजार, सदर बाजार, शास्त्री मार्केट, व्यापार विहार मालधक्का सहित प्रमुख मार्केट बंद रहे। सुबह कांग्रेसियों ने रैली निकालकर कई जगह दुकानें बंद करवाई।
हालांकि शाम चार बजे के बाद सभी दुकानें खुल गई। मेडिकल दुकानों को बंद से अलग रखा गया था। पुलिस ने बंद के दौरान उपद्रव की आशंका से 175 कांग्रेसियों को गिरफ्तार किया। कोई अप्रिय वारदात नहीं हो सकी। पुलिस प्रशासन ने हर जगह चाक-चौबंद व्यवस्था कर रखी थी। बुधवार की सुबह से मुख्य बाजार में अधिकांश दुकानें बंद रहीं। कुछ दुकानें खुली हुई थीं, जिन्हें बंद कराने के लिए सुबह 11 बजे से कांग्रेसी शहर में निकले। कुछ स्थानों में विवाद से स्थिति बिगड़ने की नौबत भी आई, लेकिन पुलिस ने समय पर पहंुचकर हालात काबू में कर लिया और पुलिस ने 175 कांग्रेसियों को गिरफ्तार किया।
अंचल में भी कांग्र्रेस का विरोध प्रदर्शन
जयरामनगर. सकरी में नसबंदी कांड के विरोध में विरोध में व्यापारी संघ व ग्रामीणों ने स्वस्फूर्त जयरामनगर बंद रखने की निर्णय लिया। इसी क्रम में बुधवार को जयरामनगर बंद रहा। यद्यपि कांग्रेस ने भी बंदी का आह्वान किया था।
गोड़खाम्ही: गोड़खाम्ही. नसबंदी काण्ड के विरोध में कांग्रेस ने गोड़खाम्ही बंद का आह्वान किया। युवा कांग्रेस लोरमी अध्यक्ष डॉ. राहुल सिंह ठाकुर के नेतृत्व में व्यापारियों ने गोड़खाम्ही बंद का समर्थन किया। इस पर उन्होंने व्यापारियों के प्रति आभार व्यक्त किय

नसबंदी मामले में एक बैगा महिला की मौत, संरक्षित जाति है बैगा

नसबंदी मामले में एक बैगा महिला की मौत, संरक्षित जाति है बैगा

death of a Baiga female in sterilization case


death of a Baiga female in sterilization case
11/12/2014 5:40:33 PM
बिलासपुर। पेंड्रा के गौरेला में भी नसबंदी शिविर में लापरवाही का बरतने का मामला सामने आया है। यहां नसबंदी के बाद 6 महिलाओं को गंभीर हालत में सिम्स और जिला अस्पताल रेफर किया गया।

रास्ते में एक बैगा जनजाति की महिला की मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार सोमवार को गौरेला में स्वास्थ्य केंद्र में 22 महिलाओं की नसबंदी की गई थी। नसबंदी ऑपरेशन के बाद 6 महिलाओं की हालत बिगड़ गई।

आनन-फानन में अस्पताल प्रबंधन ने गंभीर हालत में दो महिलाएं राहिल और नेहा मांझी को सिम्स तथा 4 अन्य महिलाओं राजकुमारी, शकुन, मानकुंवर और चैतीबाई बैगा को जिला अस्पताल भेजा। अस्पताल पहुंचने से पहले ही चैतीबाई ने दम तोड़ दिया। मृतका बैगा जनजाति की थी।

गौरतलब है कि बैगा जनजाति प्रदेश में संरक्षित जाति में शामिल हैं।
सकरी नसबंदी कांड की जांच के लिए हाईकोर्ट ने न्यायमित्र नियुक्त किया
उधरी सकरी में हुए नसबंदी ऑपरेशन के बाद 13 महिलाओं की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है।

जस्टिस टीपी शर्मा और जस्टिस इंदरसिंह उबेजा ने मामले को काफी गंभीर मानते हुए दो वकीलों को न्यायमित्र नियुक्त किया है। ये दोनों न्यायमित्र मामले की संपूर्ण जानकारी लेकर हाईकोर्ट को विवरण सौंपेंगे। हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र व राज्य सरकार तथा मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी कर दस दिन में जवाब और पूरी जानकारी सौपने के निर्देष दिए हैं।

बताया जा रहा है कि पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल ने इस मामले को लेकर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को पत्र लिखा है।

    एक मां का श्राप है, जिम्मेदार कभी सुखी नहीं रहेंगे

    एक मां का श्राप है, जिम्मेदार कभी सुखी नहीं रहेंगे

    A mother`s curse, the responsible will never be happy

     
    A mother`s curse, the responsible will never be happy
    11/13/2014 4:35:16 AM
    बिलासपुर। "मां" सरकारी लापरवाही का शिकार हो गई। बच्चों से ममता छिन गई। उनकी जिम्मेदारी विकलांग पिता पर आ गई जो खुद मुश्किल से जीवन चला रहा है। ये हालात हैं ग्राम लोखंडी में दिनेश पटेल के घर। मंगलवार को दिनेश की पत्नी दुलौरिन (22 वर्ष) की मौत हो गई। दिनेश की मां लछन बाई बिलखते हुए सवाल कर रही है, बिन मां के बच्चों की परवरिस कौन करेगा, बेटी शादी होकर चली जाएगी। पता नहीं मेरी आंख कब बंद हो जाए, क्या मुख्यमंत्री इन बच्चों को उनकी मां वापस दिला पाएंगे, क्या वे परवरिस की जिम्मेदारी लेंगे। एक मां का श्राप है कि इसके जिम्मेदार कभी सुखी नहीं रहेंगे। उसने मामले के दोçष्ायों को सख्त सजा देने की मांग की है। राष्ट्रीय कार्यक्रम में बरती गई लापरवाही ने न सिर्फ एक दर्जन जिंदगियों को लील लिया, बल्कि कई दूधमुंहे और मासूम बच्चों के सिर से मां का आंचल छीन लिया।
    सबकी एक ही मांग है कि जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उधर चिंता इस बात की भी है कि अब बिना मां के मासूमों का लालन-पालन कैसे होगा। शहर से लगे ग्राम लोखंडी में दिनेश पटेल के यहां दो माह पहले ही एक बेटे का जन्म हुआ। परिवार में खुशी का माहौल था। इस बीच मंगलवार को दिनेश की पत्नी दुलौरिन (22 वर्ष) की मौत से माहौल गमगीन हो गया। बुधवार की सुबह जब सरकारी वाहन से शव घर के दरवाजे पर पहुंचा तो परिवार के लोग बिलख पड़े। सास लक्षन बाई और ननद भुवनेश्वरी व परिवार के अन्य लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। चार साल का बेटा सूर्यकांत अपनी मां को उठाने की कोशिश करने लगा। भला मां कैसे उठती, वह भी रोने लगा। दो माह के भतीजे को कांधे पर लिए बुआ भुवनेश्वरी ने शांत किया।
    मजदूरी करके करते थे पालन-पोषण
    दिनेश की मां लक्षन बाई ने बताया कि दिनेश और दुलौरिन रोजी मजदूरी करके परिवार का पालन पोष्ाण करते थे। गांव की मितानिन के कहने पर दुलौरिन नसबंदी के लिए तैयार हो गई। बहू के कहने पर वह और उसका बेटा भी तैयार हो गए, उन्हें क्या पता था कि घर से सही सलामत गई दुलौरिन की लाश वापस आएगी।

    हालात बेकाबू, एयर एंबुलेंस से मरीज भेजे जा सकते हैं दिल्ली

    हालात बेकाबू, एयर एंबुलेंस से मरीज भेजे जा सकते हैं दिल्ली

    Uncontrollable circumstances, the patient may be sent by air ambulance Delhi


    Uncontrollable circumstances, the patient may be sent by air ambulance Delhi
    11/13/2014 4:37:10 AM
    बिलासपुर। नसबंदी आपरेशन के बाद लगातार मरीजों की किडनी फेल होने और उन्हें डायलिसिस मशीन पर रखे जाने के बाद पैदा हुए हालात से घबराए प्रशासनिक अधिकारी अब रिस्क लेने की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं। संभागायुक्त सोनमणि बोरा ने बताया कि डॉक्टरों की सलाह पर गुरूवार को कभी भी एयर एंबुलेंस से गंभीर मरीजों को दिल्ली एम्स में भेजा जा सकता है।
    हालांकि बुधवार को प्रशासन जिंदल का विमान चकरभाटा एयरपोर्ट पर बुला चुका है, लेकिन मरीज नहीं भेजे। संभागायुक्त बोरा ने बताया कि हमारी पूरी तैयारी है जैसे ही डॉक्टर कहेंगे हम एयर एंबुलेंस फिर बुलवा लेंगे। उधर, अपोलो, सिम्स में भर्ती महिलाओं की स्थिति को देखते हुए तमाम प्रशासनिक अधिकारी दिल्ली, मुंबई और देश के अन्य बड़े शहरों के अस्पताल और डॉक्टरों के संपर्क में हैं। बिलासपुर आई दिल्ली एम्स की टीम ने भी यह संकेत दिए हैं।
    शहर के सारे नर्सिग होम के बेड और आईसीयू उपकरण अपोलो बुलवाए
    बिलासपुर. नसबंदी ऑपरेशन से गंभीर महिलाओं को इलाज के लिए अपोलो शिफ्ट किया जा रहा है। इससे अपोलो के आईसीयू वार्ड में बेड कम पड़ गए। शहर के सभी प्रमुख नर्सिग होम से आईसीयू में उपयोग होने वाले बेड, मॉनिटर, डायलिसिस मशीनें, अपोलो भेजी जा रही हैं। जांजगीर रायपुर व कोरबा से डॉक्टर और भी उपकरण बुलाए गए हैं। साथ ही जूनियर व सीनियर रेसीडेंट डॉक्टरों की टीम राजधानी से बुलाई गई है। सिम्स और जिला चिकित्सालय में भर्ती नसबंदी पीडित महिलाओं को अपोलो अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है। अपोलो अस्पताल में दो नए वार्डो को आईसीयू के रूप में परिवर्तित किया गया है। इसके लिए जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने शहर के सभी प्रमुख नर्सिग होम से आईसीयू के सारे उपकरण, बेड व अन्य संसाधन अपोलो में शिफ्ट करने को कहा है। देर रात इसके लिए कवायद शुरू हो गई है। अभी तक 86 मरीजों के लिए अपोलो में यह व्यवस्था की जा रही है।
    हेल्थ डायरेक्टर पहंुचे
    नए हेल्थ डायरेक्टर आर. प्रसन्ना रात 11 बजे बिलासपुर पहुंचे।
    अफसरों की लगाई ड्यूटी
    संभागीय कमिश्नर सोनमणि बोरा, कलक्टर सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी सिम्स, अपोलो, किम्स रामकृष्ण, जिला अस्पताल में सतत निगरानी कर रहे हंै। अपोलो में दो एसडीएम क्यूए खान, फरिहा आलम, दो तहसीलदार पीसी कोरी, देवेंद्र केशरवानी व राय की शिफ्ट ड्यूटी लगाई गई है।
    अपोलो और सिम्स पहुंची एम्स की टीम
    बिलासपुर. एम्स नई दिल्ली से प्रोफेसर अंजन तिर्की के नेतृत्व में सात सदस्यीय टीम बुधवार की सुबह 11 बजे अपोलो हॉस्पिटल पहुंची। वहां मरीजों की स्थिति के बारे में डॉक्टरों से जानकारी ली। टीम के सदस्यों ने कहा, यहां के डॉक्टर मरीजों का बेहतर इलाज कर रहे हैं। यदि जरूरत पड़ी तो मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली ले जाएंगे। एम्स की टीम तकरीबन डेढ़ घंटे तक अपोलो में रही। सदस्यों ने किसी भी सवाल का जवाब देने से मना कर दिया। दोपहर साढ़े 12 बजे वे सिम्स पहंुचे। शाम 3 बजे छत्तीसगढ़ भवन में मीडिया के लोगों से संक्षिप्त चर्चा की।
    अब तक 15 मौत
    06 जिला अस्पताल में भर्ती
    (सकरी की 5, गौरेला की 1)
    55 सिम्स में भर्ती- (सकरी की 34, गौरेला की 21)
    32 अपोलो में भर्ती- (सकरी की 29, गौरेला की 3)

    Meeting on 17th in Delhi regarding the coal ordinance

    Meeting on 17th in Delhi regarding the coal ordinance



    Dear Friends,

    Thanks for your confirmation for the meeting on 17th regarding coal ordinance. While initially we were planning to focus our discussion only on a select region of Chhattisgarh, we received many suggestions that in light of the sweeping & far-reaching provisions of the coal ordinance it might be useful to focus on the broader issue of coal ordinance itself. As a result, we would like to broaden the objectives of the 17th meeting as an attempt to come up with a concerted strategy for organizing a national campaign on the issue of coal mining & coal block allocation.

    The demonstrated urgency of bringing wide-ranging changes vide the ordinance route, points to Government’s intention towards rapid and ruthless exploitation of coal blocks in the country. Moreover, recent media reports point towards commencement of coal block auctions as early as December – January itself. It maybe pertinent to note that a large majority of the coal blocks earmarked for auction, as per Schedule 1 of the Coal Ordinance, do not possess requisite environment or forest clearances or meet the requirements of gram sabha consents, forest rights' recognition, impact assessments, etc. An auction of these blocks before conclusion of such important processes is likely to significantly undermine them and would lead to devastating impact on the ecology, environment, biodiversity, agricultural productivity, human rights and displacement.  

    Any plan for a campaign on coal mining must necessarily be centered around two critical timelines – a. coal block allocations and b. tabling of this ordinance in Parliament and subsequent discussions. Therefore, we would like to focus on the above and strive for a crisp, participatory and outcome-oriented brain-storming session in order to come up with a well coordinated action plan.

    Date: 17th November, 2014 (Monday)
    Time: 10 AM – 4 PM
    Venue: The Faculty Center (office of the JNU teachers' Association),near railway reservation Centre and in front of the office of  Dean, students. This place is inside the campus, close to the library, JNU

    Tentatively, we propose the following broad agenda items to steer our free-flowing discussions:

    1.  Overview of the current scenario of coal mining, displacement and grassroots struggles’ across various states (10 AM – 11.30 AM)
    a.     Experience sharing by representatives from various states
    b.     Changes in the on-ground scenario post the Supreme Court order and the subsequent Coal Ordinance
    2.   Understanding the SC court order and various provisions of the coal ordinance and their implications (11.30 AM – 1 PM)
    a.     Understanding the challenges thrown up by various provisions of the ordinance
    b.     Impact on previous orders (NGT, courts, etc.) and way forward on enforcing these
    c.     Threat to various grassroots’ movements from the ordinance
    3.    Way forward and strategy planning (post lunch 2 - 4 PM)
    a.     Legal strategy on countering the effects of the ordinance
    b.  Structure and framework for coordinating a national campaign against coal mining involving various grassroots’ movements and like-minded organizations’ & individuals

    Any suggestions / modifications to the above agenda are most welcome. Also, please feel free to share the invite with other people / organizations who you believe would be keen to contribute to and join the discussion on 17th. Also, please find attached a note by CBA on the coal ordinance.

    Looking forward to your participation and valuable inputs. With your support and solidarity.

    Regards
    Alok Shukla,
    Chhatisgarh Bachaao Aandolan

    Bastar police implicating wrong people: Soni Sori

    Bastar police implicating wrong people: Soni Sori

    Pavan Dahat
    Soni Sori
    The Hindu Soni Sori
    Tribal activist and Aam Adami Party (AAP) leader Soni Sori has accused Bastar police of implicating “wrong and innocent” people in connection with the attack on her father by suspected Maoists in 2011.
    Around 30 to 35 armed Maoists had attacked Soni Sori’s father Mundararam Sori at his home in Badebedema village of Dantewada district of Bastar on June 14, 2011 for “spying for police” and had also looted Rs. 42 lakh.
    Three days ago, Bastar police arrested Sodi Baman and Sodi Payake from Koyanlara Fulpad village in connection with the case. Bastar police claimed that both the accused were named by Mr. Sori in his FIR.
    “Sodi Baman and Sodi Payake are innocent tribals. Both of them are our relatives and had no role to play in the attack on my father. Former Maoist Badaru, who surrendered before police last year, was the main conspirator of the attack. Badaru had shot my father in the leg. But police have rewarded Badaru by giving him a job in the police department,” Soni Sori told The Hindu.
    The tribal teacher in Dantewada district also claimed that Sodi Baman and Sodi Payake were not arrested from their village, but were asked to come to the police station for some inquiry.
    “They were asked to come to Kuwakonda police station for three days consecutively on the pretext of some inquiry. On the fourth day, police took them into custody,” alleged Ms. Sori.
    However, Bastar police have denied Soni Sori’s allegations. “Her father had named around 14 Maoists including these two accused. We managed to nab them three days ago. We have a signed FIR by her father,” claimed Bastar Inspector General of Police S.R.P. Kalluri.
    But Ms. Sori claimed that her father was an illiterate and could hardly manage to write his name. “My father had given specific names. Badaru had been harassing him even before the incident. But Badaru has been provided police protection now rather than being tried for the case,” she pointed out.
    But Mr. Kalluri opined that Ms. Sori was making the allegations against police “under some pressure”.
    The AAP leader who had contested 2014 Lok Sabha elections from Bastar seat, said that she would address a press conference with her father in a couple of days and would produce “proof” to the media.

    वनाधिकार अधिनियम 2006 को कार्पोरेट मुनाफे के लिए कमज़ोर करने का प्रयास जनविरोधी –

    छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन
    सी - 52 सेक्टर -1, शंकर नगर, रायपुर, संपर्क 09977634040,


    क्रमांक 106                                                                                   दिनांक ११. ११. २०१४


    प्रेस विज्ञप्ति

    पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा वनाधिकार अधिनियम 2006 को कार्पोरेट मुनाफे के लिए कमज़ोर 
    करने का प्रयास जनविरोधी  – छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन

    जैसा की आपको ज्ञात है की २००६ में संसद ने सर्वसम्मति से “अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम २००६”  पारित किया था I यह अधिनियम सभी राजनैतिक दलों द्वारा समर्थित था I इस कानून का मूल मकसद हे, आदिवासियों के साथ हुए एतेहासिक अन्याय को ख़त्म करते हुए उन्हें उनके जंगल-जमीन पर मालिकाना हक़ दिया जाये I इस कानून में जंगल का प्रवंधन ग्रामसभा को सोपने के साथ यह भी प्रावधान किया गया हे, कि किसी भी परियोजना के लिए भू –अधिग्रहण एवं वन अनुमति के पहले वनाधिकारो की मान्यता की प्रक्रिया की समाप्ति और ग्रामसभा की लिखित सहमती आवश्यक हे I

    पर्यावरण एवं वन मंत्रालय आदिवासी इलाको में जंगल जमींन को कंपनियों को देने के लिए इस अधिनियम को लगातार कमज़ोर करने पर आमादा है I मंत्रालय ने पिछले कुछ दिनों में इस अधिनियम की पारदर्शी प्रक्रियाओं को नष्ट करने और प्रशासनिक अधिकारियों को सभी शक्तियां प्रदान करने की दिशा में कई कदम उठाएं है जिसमें कुछ निम्न उल्लेखित हैं :-
    ·    वन भूमि परिवर्तन के लिए ग्राम सभा की स्वीकृति को सीमित करने के लगातार प्रयास  उच्चतम न्यायालय के उड़ीसा माइनिंग कारपोरेशन बनाम भारतीय संघ के निर्णय में ग्राम सभा की स्वीकृति की आवश्यकता को अनिवार्य बताया गया हैं ,लेकिन पर्यावरण एवं वन मंत्रालय इसके विपरीत फेसला लेते हुए विभिन्न परियोजनाओं को ग्रामसभा की अनुमति से मुक्त करने की कोशिश कर रहा है (हाल ही में मंत्रालय दुवारा 28 अक्टूबर को दिए गए एक अत्यंत अवैध निर्देश से कलेक्टरों को सशक्त किया गया कि वे निर्णय लें की क्या वन अधिकार अधिनियम इस क्षेत्र में लागू होगा अथवा नहीं )  ग्राम सभा की मंज़ूरी किसी भी तरह से परियोजनाओं की देरी का कारण नहीं है I अगर किसी नौकरशाह की मनमानी से ही जंगल का नाश संभव है तो फिर लोगों को वन प्रबंधन के लिए सशक्त बनाने का कोई मतलब नहीं रह जाता I
    ·   ज़िला कलेक्टरों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को सशक्त करना की वे यह निर्णय ले सकें कि कब वन अधिकारों की मान्यता प्रक्रिया समाप्त हो गयी है (जैसा कि मार्च में घोषित वन (संरक्षण) नियम में किया गया) I यह भी पूर्णतया अवैध है और वन अधिकार अधिनियम २००६ की धारा ६ (१) का सीधा उल्लंघन है I यह उन्हीं अधिकारियों को सशक्त बना रहा है जो आज तक वन अधिकारों को मान्यता न देने के लिए प्रमुख रूप से ज़िम्मेदार रहे हैं I यह कोई आश्चर्यजनक नहीं है की प्रत्येक मामले में जब भी कलेक्टर की मान्यता पूर्ती के प्रमाण पत्र की जांच की गयी, वह गलत पाया गया I
    पर्यावरण मंत्रालय के इस प्रकार के निर्देश  कंपनियों और अधिकारियो को गेरकनूनी कार्य करने के लिए प्रलोभित कर रहे हे जिससे परियोजनाए आसान नहीं बल्कि और कठिन हो जाएँगी I इससे परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया में अवैधता, भ्रष्टाचार और क्रोनी कैपिटलिज्म बढावा मिलेगा I छत्तीसगढ़ में विभिन्न परियोजनाओ के लिए वन अनुमति जारी करने में बड़े पैमाने पर वनाधिकार कानून का उल्लंघन करते हुए राज्य शासन दुवारा गलत तथ्य एवं दस्तावेज प्रस्तुत किये गए हे जिसमे कई मामलो में जाँच लंबित हे | मंत्रालय के ये सभी आदेश संसाधनों के अति दोहन के साथ जंगल के विनाश को बढावा देंगे साथ ही गेरकानूनी प्रक्रियाओ को मान्यता देने की कोशिश हे जिसका हम पुरजोर तरीके से विरोध करते हे  
    हम आशा करते हैं कि मंत्रालय तुरंत कार्यवाही कर यह सुनिश्चित करे की वनभूमि परिवर्तन कानून के अनुसार ही किया जाये और हमारे देश के सबसे गरीब लोगों के अधिकारों के हनन किये बिना ही हो और इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की अवैधता और भ्रष्टाचार न हो I

    नोट - प्रेस विज्ञप्ति एवं प्रधानमंत्री को भेजा गया पत्र  संग्लन हे

    भवदीय
    आलोक शुक्ला
    संयोजक
    छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन